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चीन व्यापार को जा रहे व्यापारी रास्ते में फंसे

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पिथौरागढ़। कैलास मानसरोवर यात्रियों के लिए सरकार ने हेलीकॉप्टर की सुविधा देकर राहत तो दी है। लेकिन वहीं दूसरी तरफ लखनपुर व नजंग के बीच बीआरओ की और से रोड कटिंग शुरू किए जाने से कैलाश मानसरोवर पैदल मार्ग पूरी तरह से बाधित हो गया।

बीआरओ इस मार्ग के ठीक उपर चीन सीमा तक सडक़ निर्माण कर रहा है। जिसके चलते भारत से चीन जा रहे व्यापारी व माग्रेशन करने वाले लोग रास्ते में भी फंस गए। स्थानीय लोगों में रास्ता बंद होने से आक्रोश है। आपको बता दें कि बीआरओ चीन सीमा तक सडक़ का निर्माण कर रही है। जिले लेकर सीमांत में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

फरवरी माह में चीन सीमा तक बन रही सडक़ निर्माण के दौरान कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग में लखनपुर से नजंग के मध्य 16 सौ मीटर पैदल मार्ग ध्वस्त हो गया था। फरवरी से मई मध्य तक मार्ग बंद रहा। बाद में कैलास मानसरोवर यात्रा प्रारंभ होने के चलते प्रशासन के निर्देश पर बीआरओ द्वारा लखनपुर से नजंग के मध्य पैदल मार्ग चलने योग्य बनाया।

आदि कैलास यात्रा के दो एडवांस दल और दो यात्रा दल इस मार्ग से गए तो पहला कैलास मानसरोवर यात्रा दल भी इसी मार्ग से गया। बीआरओ द्वारा बनाए गए इस मार्ग से यात्री तो जैसे-तैसे गुजरे और उनका सामान ले जाने रहे घोड़ों का चलना मुश्किल हो गया।

यात्री बूंदी पड़ाव पहुंच गए थे परंतु उनका सामान नजंग तक नहीं पहुंचा था। मार्ग में तीन खतरनाक चढ़ाई होने से कुछ यात्री तो रात के दस बजे पड़ाव पर पहुंचे थे। मार्ग की हालत देखते हुए यात्रियों ने भी इसकी शिकायत उच्च स्तर तक की।

केंद्र सरकार द्वारा कैलास मानसरोवर यात्रा को देखते हुए वायु सेना के हेलीकॉप्टरों से यात्रियों को गुंजी तक पहुंचाने का निर्णय लिया। दूसरा और तीसरा दल हैलीकॉप्टर से गुंजी भेजा गया। वहीं यात्रा पूरी कर वापस लौटे आदि कैलास के यात्रियों ने धारचूला पहुंच कर मार्ग की हालत को देखते रोष जताया।

इस संबंध में यात्रा प्रारंभ होने से पूर्व प्रशासन और बीआरओ अधिकारियों की बैठक में प्रशासन ने यात्रा के दौरान सडक़ निर्माण का कार्य बंद करने का अनुरोध किया परंतु बीआरओ ने चीन सीमा तक सडक़ निर्माण में हो रहे विलंब को देखते हुए माह में बीस दिन कार्य करने और दस दिन कार्य रोकने का सुझाव दिया। जिस पर किसी ने भी सहमति नहीं जताई।

इधर शुक्रवार से बीआरओ द्वारा लखनपुर से सडक़ कटिंग का कार्य शुरू कर दिया गया है। कार्य प्रारंभ होने से सडक़ से नीचे गुजरने वाला पैदल मार्ग अब जानवरों के चलने योग्य नहीं रह चुका है। घोड़े, खच्चरों से सामान ले जा रहे भारत चीन व्यापार के व्यापारी और उच्च हिमालयी गांवों को जा रहे ग्रामीण सामान और जानवरों के साथ फंसे हैं।

अकेले व्यक्ति तो जैसे तैसे मार्ग पार कर ले रहा है परंतु जानवरों के साथ सामान ले जाकर जाना असंभव है। तीन दिन बाद 25 जून से बीआरओ अपना कार्य तेजी से करने वाला है।

जिसके बाद स्थिति अधिक खराब होने के आसार हैं। चीन सीमा तक सडक़ बनाना प्राथमिकता बीआओ के ओसी मेजर रोहित कटना का कहना है कि लखनपुर के पास से आगामी 25 जून से कार्य गति पकड़ लेगा। चीन सीमा लिपूलेख तक बन रही सडक़ के निर्माण कार्य में पहले ही विलंब हो चुका है।

सडक़ को निर्धारित समय पर पूरा करना आवश्यक है। इसकी सूचना पहले ही केंद्र सरकार को दी जा चुकी है। तब जाकर सरकार ने कैलास यात्रियों को हेलीकॉप्टर की सुविधा मुहैया कराई है।

आदि कैलास यात्रियों को पैदल ही जाना पड़ेगा। कार्य के दौरान बीआरओ मानवों के पैदल चलने योग्य पैदल मार्ग तैयार करेगा परंतु जानवरों का चल पाना मुश्किल है। भारत चीन व्यापार के व्यापारियों को तीन दिन का समय मिला है।

इस अवधि में वह अपना सामान लखनपुर से नजंग होते आगे पहुंचा सकते हैं। बीते दिनों हुए भूस्खलन के चलते बीआरओ केवल नौ सौ मीटर ही मार्ग यहां पर बना सकी है।