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छोटी बच्चियों से बलात्कार करने वालों को अब होगी फांसी

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नई दिल्ली । 12 वर्ष तक की उम्र के बच्चों-बच्चियों से बलात्कार करने वालों को अब फांसी की सजा दी जाएगी। मोदी सरकार ने छोटी बच्चियों के खिलाफ अपराध रोकने के लिए यह कड़ा कदम उठाया है। कैबिनेट ने बच्चियों से रेप करने वालों को को मौत की सजा देने संबधी अध्यादेश को मजंूरी दे दी है।

 

इन मामलों में जांच का काम 3 महीनों में पूरा करना होगा। विदेश से लौटने के बाद मोदी ने दो महत्वपूर्ण अध्यादेश पर चर्चा करने के लिए कैबिनेट की विशेष बैठक बुलाई। एक अध्यादेश छोटी बच्चियों से रेप करने के वाले दोषियों को मृत्यदंड देने संबधित था। दूसरा अध्यादेश सदिंग्ध अपराधियों की संपत्ति जब्त करने के प्रवाध संबधित था, जो कि अपराधी देश से भाग गए। उन्नाव और कठुआ में हाल ही मेें हुए बच्चियों से दुष्कर्म की घटनाओं से देश भर में रोष प्रकट किया गया है और यह मांग की गई कि ऐसा कानून बनाया जाए जिससे दोषियों को मौत की सजा अनिवार्य हो।

 

दुष्कर्म के दोषी को मौत की सजा
प्रस्ताव के अनुसार 12 साल तक बच्ची के साथ दुष्कर्म के दोषी को भी मौत की सजा सुनाई जाएगी। पॉक्सो कानून के प्रावधानों के अनुसार इस जघन्य अपराध के लिए अधिकतम सजा उम्रकैद है। न्यूनतम सजा 7 साल की जेल है। सरकार ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय में सूचित किया कि वह दंडनीय कानून में संशोधन कर 12 साल या उससे छोटी उम्र की बच्चियों के साथ यौन अपराध के दोषियों को मौत की सजा के प्रावधान को शामिल करने पर विचार कर रही है। विधि मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि फिलहाल अध्यादेश सर्वश्रेष्ठ तरीका है।

 

मेनका गांधी आ रही है पुलिसवालों पर सख्त नजर
वहीं, कठुआ और उन्नाव गैंग रेप कांडों के बाद महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी जांच बाधित करने वाले पुलिसवालों पर सख्त नजर आ रही है। उन्होंने साफ कहा है कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध के मामलों में जांच को बाधित करने वालों या ऐसे अपराधों को अंजाम देने वालों के साथ सांठगांठ करने वाले पुलिस अधिकारियों पर राज्य सरकार सख्त कार्रवाई करें।

 

इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री ने इस तरह के मामलों की जांच निश्चित समय सीमा में पूरी करने की भी अपील की है। मेनका ने यौन अपराधों या बच्चों से यौन अपराधों से निपटने के लिए विशेष प्रकोष्ठ का गठन करने का भी सुझाव दिया है। उन्होंने राज्यों से यौन अपराधों के विभिन्न पहलुओं पर, खासतौर पर सबूत एकत्र करने और उनके संरक्षण से जुड़े पहलुओं पर अपनी-अपनी पुलिस को फिर से प्रशिक्षित करने का भी निर्देश दिया है।

 

क्या है पॉक्सो एक्ट और उसमें सजा के प्रावधान?
पॉक्सो एक्ट यानी की प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्राम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट 2012 जिसको हिंदी में लैंगिक उत्पीडऩ से बच्चों के संरक्षण का अधिनियम 2012 कहा जाता है। इस एक्ट के तहत नाबालिग बच्चों के साथ दुष्कर्म, यौन अपराध और छेड़छाड़ के मामलों में कार्रवाई का प्रावधान है। इस एक्ट के जरिए बच्चों को सेक्सुअल असॉल्ट, सेक्सुअल हैरेसमेंट और पोर्नोग्राफी जैसे अपराधों से सुरक्षा प्रदान होती है।

 

सजा के कड़े प्रावधान
पॉक्सो एक्ट के तहत अलग-अलग अपराध में अलग-अलग सजा का प्रावधान है और यह भी ध्यान दिया जाता है कि इसका पालन कड़ाई से किया जा रहा है या नहीं। इस एक्ट की धारा 4 में वो मामले आते हैं जिसमें बच्चे के साथ कुकर्म या फिर दुष्कर्म किया गया हो। इस अधिनियम में सात साल की सजा से लेकर उम्रकैद तक का प्रावधान है साथ ही साथ जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

 

वहीं एक्ट की धारा 6 के अधीन वो मामले आते हैं जिनमें बच्चों के साथ कुकर्म, दुष्कर्म के बाद उनको चोट पहुंचाई गई हो। इस धारा के तहत 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है। अगर धारा 7 और 8 की बात की जाए तो उसमें ऐसे मामले आते हैं जिनमें बच्चों के प्राइवेट पाट्र्स या गुप्तांग में चोट पहुंचाई जाती है। इसमें दोषियों को 5 से 7 साल की सजा के साथ जुर्माना का भी प्रावधान है।

 

पॉर्नोग्राफी दिखाना भी है अपराध
बता दें कि 18 साल से कम किसी भी मासूम के साथ अगर दुराचार होता है तो वह पॉक्सो एक्ट के तहत आता है। इस एक्ट के लगने पर तुरंत गिरफ्तारी का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त एक्ट की धारा 11 के साथ यौन शोषण को भी परिभाषित किया जाता है। जिसका मतलब है कि यदि कोई भी व्यक्ति अगर किसी बच्चे को गलत नीयत से छूता है या फिर उसके साथ गलत हरकतें करने का प्रयास करता है या उसे पॉर्नोग्राफी दिखाता है तो उसे धारा 11 के तहत दोषी माना जाएगा। इस धारा के लगने पर दोषी को 3 साल तक की सजा हो सकती है।