udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news दर्द  : पहाड़ के पहाड़ी पथरीले रास्ते  बीमार और घायल के लिए पहाड़ !

दर्द  : पहाड़ के पहाड़ी पथरीले रास्ते,बीमार और घायल के लिए पहाड़ !

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तब जब एक ओर देश अंतरिक्ष में एक शतक से ज्यादा सेटेलाइट भेजने की सफलता में गौरवान्वित है । जिसका कि उसे पूरा अधिकार भी है । एक ओर देश इस सफलता पर भी मुग्ध है कि उसने ” चांद पर पानी ” होने के लक्षण और प्रमाण ढूंढ निकाले है । झील और समुद्र में ” सी प्लेन ” उतारने की सफलता भी बडी बात है । बुलट ट्रेन चलाने की बात भी अच्छी बात है । स्वर्णिम चतुर्भुज सडक सफलता भी भारत के हिस्से में है । 140 की स्पीड वाली मक्खन नुमा सडक पर भी वाहन दौड रहे हैं।

 

उत्तराखंड में कई बार सुधारी गयी चार धाम सडक पर ” आल वेदर सडक ” योजना के तहत युद्ध स्तर पर काम हो रहा है । यह भी सुखद है । ” रेल पहाड़ चढेगी ” यह भी सुन्दर योजना है । “” पर इस चमकती धमकती स्थितियों के बीच एक तल्ख हकीकत यह भी है कि आज भी उत्तराखंड का ” पहाड़ यदि बीमार और घायल हो जाय तो उसे ” सड़क के अभाव में ” कंधे पर लाद पर मीलों पहाड के पथरीले , रपटते रास्तों से अस्पताल लाने की पीडा जनक हालत अभी भी वैसी ही है जैसे 70 साल पहले तब थी जब सात समुद्र पार के शासकों की थी ।

” घटना शनिवार की है । चमोली जिले के सुदूर वर्ती गांव किमाणा का 40 वर्षीय बादर सिंह तब पेड से गिर पडा जब वह मवेशियों को चारा पत्ती काट रहा था । पेड से गिर कर वह गहरी खाई में जा गिरा । साथ के लोगों ने गांव में घटना की जानकारी दी । गांव वाले उसे पीठ में लाद कर घर लाये । बादर सिंह की हालत गम्भीर थी । उसे तुरंत उपचार के लिए अस्पताल लाना जरूरी था । ” किमाणा गांव सडक से अभी भी 12 किमी दूर ठेठ पहाड पर है । गांव वाले बादर सिंह को दर्द में तडपते हुये तुरंत अस्पताल लाना चाहते थे । पर भारी वर्षा और हिमपात अचानक होने लगा । किमाणा से सडक मार्ग लंगसी 12 किमी दूर है ।

 

स्वस्थ ब्यक्ति मवभी आज के दौर मे बडी मुश्किल से गांव आता जाता है । हिमपात और वर्षा से गांव से लंगसी आने वाला पहाडी पथरीला मार्ग रपटीला हो गया । ऊपर से हिमपात जारी रहा । इंतज़ारी थी कि वर्षा और हिमपात रुके तो दर्द में पडपते बादर सिंह को अस्पताल पहुंचायें। पर जब न वर्षा रुकी न हिमपात ।इधर बादर सिंह दर्द से और भी कराहने लगा तो गांव वालों ने उसी स्थित में लकडी का स्टेचर बनाया और बादर सिंह को रटपटीले फिसलते , पथरीले 12 किमी पहाड़ी रास्ते से गुजरते हुये पहले सडक मार्ग से लंगसी पहुंचाया । और फिर 108 वाहन से जोशीमठ अस्पताल लाये । बादर सिंह की गम्भीर स्थिति को देखते हुये उसे जिला चिकित्सालय लाया गया है । अभी भी उसकी हालत गम्भीर बनी है ।

” चमोली जो सीमा पार चीन से लगा भारत का सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील जिला है । यहाँ उर्गम घाटी है । जिसके कई गांव सडक के अभाव में आज भी दुर्गम हैं । ” किमाणा गांव इसी उर्गम घाटी में है । सडक आज भी यहाँ सपना है । किमाणा से भी दूर कलगोंठ गांव है 17 किमी दूर यहाँ सडक अभी भी चांद पर जाने की तरह का सपना है । पल्ला जखोला गांवो मे भी सडक नहीं है । उत्तराखंड के किमाणा , कलगोंठ गांवों जैसी दर्दनाक हकीकत आज भी कई गांवों की है । सडक के अभाव में ऐसे गांवो के बीमार , घायल नही बल्कि असल अर्थ में पहाड़ कंधों पर लादे जाने की मजबूरी है । यही दर्द गर्भवती महिलाओं का भी है । उपचार की जरूरत पडे तो तडपने या पीढ पर लादे जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं।

क्रांति भटृ वरिष्ठ पत्रकार की वाल से साभार