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डीएम ने बिठाई स्वीली-दरमोला पेयजल योजना पर जांच 

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योजना के पुनर्गठन के बाद से ही पानी का बना है संकट,पानी के संकट के कारण स्कूलों में नहीं बन रहा मध्यान्ह् भोजन

रुद्रप्रयाग। स्वीली-दरमोला पेयजल योजना के पुनर्गठन के नाम पर घपला सामने आया है। स्थिति यह है कि योजना पर पचास लाख रुपए से अधिक पैसा खर्च होने के बावजूद ग्रामीणों को पानी की एक बूंद तक नहीं मिल पाई। शिकायत के बाद जिलाधिकारी ने इस योजना की जांच बिठा दी है।

दिसम्बर 2014 में जल निगम ने स्वीली, डुंगरी और दरमोला गांव के ग्रामीणों को पानी उपलब्ध कराने के लिए स्वीली-दरमोला पेयजल योजना का निर्माण किया था। 58.50 लाख रुपए की लागत से बनी यह योजना ग्रामीणों की प्यास नहीं बुझा पाई। पिछले वर्ष अप्रैल माह में जल निगम ने यह योजना जल संस्थान को हेंडओवर की थी।

 

ग्रामीणों का आरोप है कि पेयजल योजना का पुनर्गठन सिर्फ कागजों में ही हुआ है। योजना से आज तक गांवों में पानी की सप्लाई नहीं हुई। यह योजना पेयजल एजेंसियों के लिए सोने का मुर्गी देने वाली अंडा साबित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पुनर्गठन योजना के अन्तर्गत नए स्रोत से पानी टेप किया जाना था, लेकिन विभाग ने पुरानी लाइन से ही योजना जोड़ दी। इस तरह शासकीय धन का दुरूपयोग किया गया और ग्रामीणों को पानी भी नहीं मिला।

स्थानीय निवासी कृष्णानंद डिमरी, कमल विकास, बलवीर रावत का कहना है कि पेयजल योजना के पुनर्गठन पर भारी-भरकम धनराशि खर्च करने के बावजूद ग्रामीण पानी के लिए तरस रहे हैं। विगत डेढ़ माह से डंुगरी, स्वीली और दरमोला में पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। ग्रामीणों को तीन किमी दूर सेम और धेड़ा से पानी ढोना पड़ रहा है।

 

स्थानीय निवासी कृष्णानंद डिमरी ने कहा कि पानी की कमी के कारण ग्रामीणों को अपने पशुधन बेचना पड़ रहा है। गांवों से पलायन का मुख्य कारण पेयजल की कमी है। उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारी कह रहे हैं कि पेयजल स्रोत के समीप स्लाइडिंग जोन है, जब अधिकारी जानते थे कि यहां पर स्लाइडिंग जोन है तो फिर योजना का निर्माण कर लाखों रुपए क्यों फूंके गए। यह योजना अधिकारियों के लिए दुधारू गाय साबित हो रही है।

जिला पंचायत सदस्य आशा डिमरी ने कहा कि पेयजल आपूर्ति न होने से राजकीय इंटर कॉलेज स्वीली-सेम और प्राथमिक विद्यालय सेम में छात्रों व अध्यापकों को पीने के पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि मध्यान्ह् भोजन भी नहीं पक पा रहा है। उन्होंने कहा कि पेयजल योजना के पुनर्गठन में बड़ा घपला हुआ है। इसकी जांच के लिए जिलाधिकारी से शिकायत की गई है।

 

जिस समय योजना को जल संस्थान के हेंडओवर किया गया, उस समय योजना पीएमजीएसवाई की सड़क के कारण क्षतिग्रस्त थी। पुनर्गठन का काम मानकों के तहत ही हुआ है। –प्रवीण शाह, सहायक अभियंता जल निगम

पेयजल योजना के स्रोत के समीप ही स्लाइडिंग जोन होने के कारण योजना क्षतिग्रस्त हो रही है। योजना के अलाइमेंट बदलने के लिए शासन से आठ लाख रुपए मांगे गए हैं। पैसे मिलने के बाद योजना का अलाइमेंट बदला जाएगा। –संजय सिंह, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान

पुनर्गठन योजना की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच दल का गठन किया गया है। उप जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग, ग्रामीण अभियंत्रण के अधिशासी अभियंता और जल संस्थान के अधिशासी अभियंता इस योजना की जांच कर रिपोर्ट सौंपेगे। -मंगेश घिल्डियाल, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग