udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news देवभूमि के देवदूत: उत्तराखंड के रावतों का विदेशों तक जलवा !

देवभूमि के देवदूत: उत्तराखंड के रावतों का विदेशों तक जलवा !

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उदय दिनमान डेस्कः देवभूमि के देवदूत: उत्तराखंड के रावतों का विदेशों तक जलवा ! आपको यह पढ़कर कुछ अजीब लग रहा होगा कि खुद को देवदूत कह रहे हैं, लेकिन यह हम नहीं पूरी दुनिया मानती चुकी है और उत्तराखंड के लोगों ने देश से लेकर विदेशों तक जो अपनी अमिट छाप छोड़ी है उससे यह बात पुष्ट होती है। फिर यह कहने में हिचकिचाहट क्यों कि उत्तराखंड के लोग देवदूत हैं।वर्तमान समय में उत्तराखंड के रावतों का जलवा आप देख रहे हैं और विश्व के अदम्य शक्ति वाले राष्ट के प्रमुख लोग ीाी इसे देख कर चुप्पी साधे है अर्थात भारत के सामने झुके हुए हैं शायद रावतों के अद्भुत कारनामों के कारण।

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड की धरती से नाता रखने वाले देवताओं के दूत माने जाते हैं। अर्थात अगर हम भारत के दक्षिण,पश्चिम और पूरब में चले जाए और वहां के लोग हमे यह पूछे कि आप कहा से है और हमने खुद को उत्तराखंड का बता दिया तो लोग हमारा आदर सत्कार ऐसा करते हैं जैसे कि हम देवदूत हों। अर्थात वह लोग हमे देवदूत मानते हैं और हमारी पूजा अर्चना करते हैं। करें भी क्यों नहीं हमने ऐसी भूमि में जन्म लिया है जहां के लिए कहा जाता है कि यह देवभूमि है और इस देवभूमि में रहने वाले भी देवताओं के समान हैं।

आपको बता दें कि उत्तराखंड का कोदा, झंगोरा और यहां का पानी कितना शक्तिशाली, जीवनदायनी, बुद्धिशील और कितना अनोखा होने के साथ-साथ संजीवनी बुटि की तरह है कि आज इसके सेवान के बाद अर्थात इसी के आस-पास पल-बढ़ कर देश के सवोच्च पदों पर बैठने वाले उत्तराखंडी राज्य के लोगों और आने वाली पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा के स्रोत होने के साथ-साथ देवभूमि के सम्मान के रूप में है। कहते हैं कि जिसने पहाड़ का पानी पिया उसमें देवीय शक्ति का वास होता है और इसे शायद सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं है।

कहते है कि प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती और न उम्र देखती है। हा समय की चाल को अवश्य ही देखती है और समयानुसार अपने को साबित करती है। कभी-कभी वह किसी का साथ लेकर चलती जरूर है लेकिन प्रतिभाए अपना रास्ता खुद ही तैयार करती हैं। उत्तराखंड भी सदियों से प्रतिभाओं की खान रहा है और समय-समय पर यहां की प्रतिभाओं ने अपना लोहा इस संसार को मनवाया है। वर्तमान युग में उत्तराखंड के रावतों ने जो जलवा विश्व के मानसपटल पर बिखेर रखा है वह अपने आप में एक नयी क्रांति का ध्योतक है और इसे आगे बढ़ाने में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काम किया है।

आइए जानते हैं उत्तराखंड के कुछ खास रावतों के बारे में जिन्होंने आज के समय में राजनीति, प्रशासनिक व्यवस्था, विदेश नीति से लेकर हर उस क्षेत्र में आज अपनी अलग पहचान बना रखी है।पहाड़ी प्रदेश उत्तराखंड की प्रतिभाओं का जलवा विश्व स्तर पर कायम है। देश के लगभग सभी बड़े पदों पर पहाड़ी आसीन हैं। हाल ही में देश के मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में ओम प्रकाश रावत का नाम फाइनल किया गया है। वो उत्तरकाशी के चिन्यालीसौड़ से संबंध रखते हैं। लेकिन केवल ओम प्रकाश ही नहीं पिछले काफी समय से उत्तराखंड के रावतों का जलवा हर क्षेत्र में नज़र आ रहा है।

साल 2015 से लगातार रावतों का जलवा बरकरार है। देश में इस समय राजनेता हों या फिर बड़े पदों पर बैठे अधिकारी, सभी में रावत शुमार हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत हों, देश की कमान संभालने वाले सेनाध्यक्ष जनरल विपिन रावत या फिर आध्यात्म क्षेत्र से जुड़े अंतरराष्ट्रीय शांतिदूत प्रेम रावत, हर जगह रावतों ने बाजी मारी है।

त्रिवेंद्र सिंह रावत-उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत डोइवाला विधानसभा से विधायक हैं। हाल ही में हुए चुनावों में उन्हें पार्टी आलाकमान ने प्रदेश की कमान सौंपी है। इससे पहले भी त्रिवेंद्र सिंह रावत राज्य की सत्ता में मंत्री पद पर आसीन रहे हैं साथ ही बीजेपी में वह कई पदों पर रहे हैं। संघ में उन्हें कई राज्यों की जिम्मेदारी भी दी थी त्रिवेंद्र सिंह रावत पीएम मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के खास माने जाते हैं।

प्रेमपाल सिंह रावत-प्रेमपाल सिंह रावत आज देश ही नहीं विदेशों में भी जाना माना नाम है। प्रेमपाल सिंह रावत आध्यात्म क्षेत्र में न केवल हरिद्वार बल्कि पूरे उत्तराखंड का नाम रोशन देश-विदेश में रोशन कर चुके हैं। उन्हें सुनने के लिए लोग हर कोने से उनके कार्यक्रमों में पहुंचते हैं। बताया जाता है कि प्रेमपाल सिंह रावत ने 4 साल की उम्र से ही प्रवचन करना शुरू कर दिया था। 13 साल की उम्र के पड़ाव में पहुंचते ही उन्होंने शांति का संदेश देशभर में फैलाने शुरू किया। शांति संदेश लेकर प्रेमपाल सात समंदर पार लंदन और लॉस वेगास के बड़े कार्यक्रमों में हिस्सा ले चुके हैं। प्रेमपाल सिंह रावत एक फाउंडेशन भी चलाते हैं, जो देश के साथ-साथ विदेशों में भी काम कर रही है।

हरीश रावत-उत्तराखंड से लेकर केंद्र की राजनीति में अपनी धाक रखने वाले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से कौन परिचित नहीं है। हरीश रावत उत्तराखंड के अल्मोड़ा से ताल्लुक रखते हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री के साथ ही हरीश रावत केंद्र में मंत्री भी रहे हैं। इसके साथ ही कांग्रेस संगठन में भी उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिल चुकी हैं।

कांग्रेस के तेज-तर्रार नेताओं में हरीश रावत का नाम गिना जाता है। वो बात अलग है कि राजनीति के क्षेत्र में बीता साल रावत के लिये बेहद बुरा साल साबित हुआ है। जहां उनके नेतृत्व में कांग्रेस प्रदेश में चुनाव हारी वहीं दो सीटों से लड़े हरीश अपनी एक सीट भी नहीं बचा सके। हालांकि, एक समय वो भी था जब नारायण दत्त तिवारी हों या विजय बहुगुणा, तमाम बड़े नेताओं के लिए हरीश रावत एक चुनौती बन गए थे। आज भी उनकी हनक कम नहीं हुई है।

नितेन्द्र सिंह रावत-नितेंद्र सिंह रावत उत्तराखंड के बागेश्वर के रहने वाले एक खिलाड़ी हैं। इन्हें पुरुषों के मैराथन में रियो-डी जनेरियो में 2016 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया था। 2013 में 5000 मीटर दौड़ में नितेंद्र नेशनल चैंपियन भी रह चुके हैं ।

बिपिन रावत-रावतों की बात जब भी की जाती हैं तो एक प्रमुख जो सामने आता है वो है बिपिन रावत का। भारतीय थल सेना की कमान संभाले हुए बिपिन रावत उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में पैदा हुए। उनके पिता एलएस रावत भी सेना से लेफ्टिनेंट जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुये थे। वैसे तो सेना अध्यक्ष पद पर जो भी रहता है वो हमेशा चर्चाओं में रहता है लेकिन बीते साल सर्जिकल स्ट्राइक करने के बाद बिपिन रावत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों मीडिया में खूब सुर्खियों में रहे।

ओम प्रकाश रावत- मुख्य चुनाव आयुक्त पदभार संभालने वाले ओम प्रकाश रावत मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं। इससे पहले भी ओम प्रकाश रावत कई बड़े पदों पर रह चुके हैं। हालांकि सीधा-सीधा उनका संबंध उत्तराखंड से नहीं है लेकिन कहा जाता है कि उनके पूर्वजों की जन्मभूमि उत्तराखंड रही है।

दीपक रावत-दीपक रावत एक ऐसा नाम है जिसे उत्तराखंड में पहचान की ज़रूरत नहीं है। वर्तमान में हरिद्वार जिले की कमान संभाल रहे IAS दीपक रावत यूथ आइकॉन हैं। उनके किये कामों से प्रदेश का युवा बेहद प्रभावित है। दीपक देश के उन चुनिंदा अधिकारियों में से एक हैं जिनको लोग बेहद पसंद करते हैं और उनके काम के ढंग से हर भ्रष्टाचारी खौफ खाता है।

सतपाल महाराज- राज्य सरकार में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज (सतपाल सिंह रावत) जाने-माने आध्यात्मिक गुरू होने के साथ ही उत्तराखंड की राजनीति का बेहद बड़ा नाम माने जाते हैं।

हरक सिंह रावत- राज्य की त्रिवेंद्र सरकार में वन मंत्री हैं। इससे पहले भी हरक सिंह तमाम उत्तराखंड उत्तर प्रदेश की सरकारों में मंत्री रह चुके हैं। उनकी छवि दबंग नेता की है।

धन सिंह रावत- उच्च शिक्षा मंत्री का कार्यभार संभाल रहे धन सिंह रावत सरकार बनने के साथ ही अपने विवादास्पद फैसलों को लेकर सुर्खियां बटोर चुके हैं। चाहे वो वंदेमातरम गाना अनिवार्य हो या कॉलेजों में ड्रेस कोड लागू करने की बात, धन सिंह हमेशा ही अपने कामों से चर्चाओं में रहते हैं।

तीरथ सिंह रावत- बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। साथ ही मौजूदा बीजेपी में वो महासचिव के पद पर है संगठन में भी उन्हें बेहद तवज्जो दी जाती है। राज्य के तमाम बीजेपी नेता उनकी बातों को गंभीरता से लेते हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के ओएसडी पीआरओ और सलाहकार भी रावत ही हैं

स्व. नैन सिंह रावत-नैन सिंह 21वीं शताब्दी के उन पण्डितों में से थे, जिन्होने अंग्रेजों के लिये हिमालय के क्षेत्रों की खोजबीन की। नैन सिंह कुमाऊं घाटी के रहने वाले थे। उन्होंने नेपाल से होते हुए तिब्बत तक के व्यापारिक मार्ग का मानचित्रण किया। बताया जाता है कि उन्होंने ही सबसे पहले ल्हासा चीन की स्थिति तथा ऊंचाई ज्ञात की और तिब्बत से बहने वाली नदी त्सांगपो के बहुत बड़े भाग का मानचित्रण भी बनाया था। आज भी नैन सिंह रावत को याद किया जाता है।

कान्हा रावत-कान्हा रावत दिल्ली से कुछ किलोमीटर की दूरी पर हरियाणा के एक छोटे से गांव में रहते थे। उनके बारे में कहा जाता है कि बचपन से ही वो वीरों की कहानियां और उनसे जुड़े किस्सों में बेहद रुचि रखते थे। शायद यही कारण है कि देश के स्वाभिमान और उसकी रक्षा करते हुए कान्हा रावत ने अपना बलिदान दिया था।