udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news डिजिटल युग में कागज की नाव ! याद आयेगी ही बचपन की!

डिजिटल युग में कागज की नाव ! याद आयेगी ही बचपन की!

Spread the love

जेपी मैठाणी

देहरादूनः डिजिटल युग है तो क्या हुआ मन तो करता है ना कुछ अलग करने काद्ध आपने भी किया ोगा ऐसा और हमने भीद्ध आज जहां गूगल युग है लेकिन हमारी सकारात्मक सोच तो वही रहेगीद्ध इसी पर यह आलेख जो आपको अपने बचपन की याद दिलाएगीद्ध

ये फोटो सेशन का युग है – ये जो चारों बच्चे हैं – बिलकुल पड़ोसी है – जैसे एक घर के बिखरे हुए लोग —
अब ये बारिश की बूंदों के मानिंद – मेरे चारों और सुबह से बिखरे हुए थे की – मैं इनकी इस बारिश में जो कल से बेहद गीलेपन के साथ बिखरी पडी थी एक दो फोटो खींच लूँ.

मुझे बचपन में लौट जाने का मन है –
फिर से डाकबंगला और उसके आगे बिछे गोल गोल गंगा जी के पत्थर जो गारे के रूप में फैले हुए थे .
उनके बीच पानी का फैलाव होता और गोल गोल पत्थर आपस का अपना घमंड भूल जाते .
वो बारिश की बूँदें जो आस पास के खडीक और एकमात्र सुराई के पेड़ से छनती हुई बंगले के आगे आँगन में फ़ैल जाती .
उस बारिश में सारे गारे एकसार हो जाते .
टीन के बने फॅमिली क्वार्टर की खिड़की से हम बाहर झांकते .

पत्थरों की वजह से जो उछाल होता उससे बुलबुले बन जाते
वो बुलबुले पानी के बहाव की दिशा में बहते – तब तक टप्प से ऊपर से बूँद आती .
बुलबुला जो फूला हुआ था वो फट से फट जाता एक सार हो जाता फिर पानी के साथ.

इस रुके हुए पानी में चलायी जाती बचपन की नाव जो अक्सर धूलभरी कागजो की कापियों से बनाई जाती .
जैसे ही नाव हम पानी में उतारते उस पर नील- स्याही टिक्की ( इंडिगो) से लिखी स्याही के अक्षर पानी के साथ घुल जाते वो फिर पानी में एकसार होते और गायब हो जाते थे .
अकड कर चली नाव थोड़ी दूर जाकर पानी में गीली होकर पसर जाती एक ओर
फिर हम उसको खड़ा करते फिर वो थोड़ी सी तैरती फिर लटक जाती आखिर में गीली और फटी नाव घटते पानी के साथ छोड़ दी जाती.
अगले बारिश के लिए .
नयी नाव का इन्तजार होता फिर वही क्रम- बारिश की बूँदें – गारे गीले और कॉपी की नाव.

अब बच्चे ना तो नाव डुबोते ना ही वो छाते गीले करते बारिश में.
मां बाप के मोबाइल ने उनसे ये सब छीन लिया है.
नए युवा बच्चे – मां बाप को सोशियल मीडिया का गुर सिखा रहे हैं
वो चाहते हैं पुराने लोग – सोशियल मीडीया में कतरब्योंत करें यानी बिजी हो जाए ताकि –
युवा पीढ़ी अपने हिस्से की चैट, शेयरिंग,ट्वीट, हॉट स्पॉट, डाटा,नेट, पैकेज,प्लान, FB पोस्ट ,
वाट्सएप- वायरल आदि में सोशियल हो जाए –
फिल्म – गीत- संगीत – पर्यावरण , संस्कृति सब कुछ चालित यानी मोबाइल है
गेम भी उसी पर हैं .
लो चलो ये बरसात – गीले छाते – कपडे, खेत खलिहान-
और वो गीली नाव –
पुराणी बात है शायद !