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दिलचस्प : देवरानी और जठानी नाम से है दो गांव !

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लखनऊ के पास काकोरी कस्बे में हैं यह मंदिर। सरोसा और भरोसा दो भाइयों की पत्नियों के समाधि स्थल पर मंदिर।

यहां है देवरानी-जेठानी का मंदिर, मन्नत होती है पूरी,सौ साल पहले दुनियाराम नाम के सख्श ने दोनों का मंदिर बनवाया

उदय दिनमान डेस्कः दिलचस्प : देवरानी और जठानी नाम से है दो गांव ! हमारी संस्कृति और सभ्यता हमें हर बार कुछ नया सिखाती रहती है और हम उससे सीखते हुए आगे बढते हैं। हमारे समाज में रिस्तों की क्या अहमियत है यह हम सभी को पता है और हम उन रिस्तों को निभाते आ रहे हैं वह भी सदियों से।समय के अनुसार हमने आपने लिए वह राह चुनी है जो शायद कभी हमारी पेरणा बनी। आज दो तस्वीरों के माध्यम से हम आपको बताने जा रहे है दो ऐसे गांवों के बारे में जो आपको भी अजीब लगेंगे लेकिन हमारी संस्कृति का यह भी एक हिस्सा हैं।

हमारे देश में देवरानी और जेठानी के रिस्ते को प्राचीन काल से माना जाता है और इसमें जो सुख दुःख और दर्द है उसे हम आभाष भी करते हैं। हमारे समाज में इस रिस्ते को लेकर जो कुछ है वह हम आज के आधुनिक युग में टीवी सीरियों से लेकर फिल्मों में देखते है। अगर इन्हीं रिस्तों के दो गांव आपको दिख जाए तो आपको कैसा लगेगा। सोशल मीडिया पर दो फोटो ऐसी ही वायरल हुई तो उसे यहां साभार देना का मन किया सो दे दिया। यह दोनों गांव है कहा कुछ पता तो नहीं लेकिन रिस्तों के नाम पर दो गांों की फोटों दिखी तो अच्छा लगा कि हमारी संस्कृति और हमारे रिस्तें हकीकत में जमीन पर भी हैं। चलिए आपको बताते है इनके बारे में विस्तार से-

उत्तर प्रदेश के काकोरी कस्बे में एक देवरानी-जेठानी मंदिर है। इसका नाम जितना अलग है उतनी ही दिलचस्प है इसकी कहानी। इस मंदिर में बड़ी संख्या में लोग पूजा करते हैं। मान्यता है कि यहां हर मन्नत पूरी होती है।स्थानीय निवासी विनोद उपाध्याय के मुताबिक, सरोसा और भरोसा नाम के दो गांव हैं।-सरोसा और भरोसा नाम के दो सगे भाई हुआ करते थे। दोनों को सिद्धि हासिल थी, वह लोगों के कष्टों को दूर कर दिया करते थे।उनके बाद उनकी पत्नियों ने अपनी शक्तियों से लोगों की भलाई का सिलसिला जारी रखा।

जेठानी-देवरानी की मौत के बाद लोग उनकी समाधि स्थल पर पूजा करन लगे। मन्नत पूरी होने की वजह से लोगों का विश्वास बढ़ता गया।
संतान प्राप्ति से खुश होकर करीब सौ साल पहले दुनियाराम नाम के सख्श ने दोनों का मंदिर बनवाया।इतिहासकार योगेश परवीन ने कहते हैं, दोनों मंदिरों के शिखर में काफी समानता है।शिखरों पर जो कलाकृतियां उकेरी गईं हैं, वह प्राचीन स्थापत्य कला की विशिष्ट शैली है।
-मंदिरों के निर्माण में लाखौरी ईंटों का ज्यादा प्रयोग हुआ है।इन दोनों ही मंदिरों की बनावट और आर्किटेक्चर में काफी समानता है।

जेठानी मंदिर प्रांगण में लाखौरी ईंटों से बना एक कुआं भी है।देवरानी-जेठानी मंदिर लखनऊ के काकोरी पंचायत के सरोसा-भरोसा ग्राम सभा के बाहर मोहान रोड पर है। इसके पास से ही न्यू आगरा एक्सप्रेस वे निकला है।

फोटो : मन्नु भाई जौनपुरी