udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news द्रोण की तपस्थली देहरादून ने लिया अपराधनगरी का रूप!

द्रोण की तपस्थली देहरादून ने लिया अपराधनगरी का रूप!

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देहरादून। द्रोण नगरी कई मायनों में अब पहले जैसी नहीं रह गई है, कि द्रोण नगरी में मात्र पहुंचने भर से ही सुकून और सुरक्षा का अहसास होने लगे। प्रदेश गठन के बाद से ही यहां जनसंख्या बढऩे लगी। द्रोण की तपस्थली देहरादून की आबोहवा और मनलुभावन पर्यावरण भी ऐसा कि जो भी एक बार यहां आकर रहने लगा, वापस लौटने के लिए कम ही लोगों की इच्छा होती है। शिक्षा का हॅब देहरादून में भारी संख्या ऐसे बाहरी लोगों की भी है जो कि पढ़ाई या फिर रोजगार के नाम पर देहरादून में पीजी या फिर बस्तियों में रह रहे बताए जाते हैं। इनके बीच ही आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों ने भी दून को पनाह स्थली के तौर पर वरीयता दी जाती रही है।

 

पुलिस की ओर से किए गए ऐसे खुलासों जिसमें कि बाहरी जिलों में अपराध घटित करने के बाद वहां से फरारी काट रहे बदमाशों के दून में पकड़े जाने के मामलों, ने इस बात को पक्का किया है। अभी कल ही जब झारखंड के जमशेदरपुर में हत्या की घटना अंजाम देकर फरार चल रहे आरोपी विक्रम शर्मा को जाखन स्थित अमन विहार में झारखंड की पुलिस टीम गिरफ्तार करने पहुंचती है तो दून पुलिस की ओर से बाहरी लोगों के चलाए जा रहे निवास सत्यापन की पोल अपने आप ही खुलती दिखी।

 

कड़वी सच्चाई यह भी है कि निवास सत्यापन के नाम पर पुलिस स्थानीय लोगों पर जिस तरह ‘कानून की लाठी’ चलाती है, लोगबाग कराहते मात्र रह जाते हैं। एक नहीं कई मामले ऐसे सामने आए हैं जबकि पुलिस के निवास सत्यापन अभियान की पोल खुली हो, मगर अधिकारियों का हाथ सिर पर होने के चलते संबंधित कर्मचारी पर कोई कार्रवाई हुई हो। कुछ ही वर्षों पूर्व जबकि रायपुर के ननूरखेड़ा में अलसुबह ही कुछ लोग एक ठेकेदार को उसके घर के बाहर ही ताबड़तोड़ गोलियों से भून देते हैं, तो मामले की छानबीन होने पर पता चलता है कि वह ठेकेदार तो दिल्ली के शातिर गिरोह का सदस्य था, और गैंगवार में हुई हत्या का आरोप है।

 

पैरोल पर छूटने के बाद वह नाम और पता बदलकर दून में ठिकाना बनाए हुए था। सहसपुर, राजपुर, पटेलनगर क्षेत्र में हुई आपराधिक घटना के बाद पकड़े गए लोगों के बाहरी जिलों के कुख्यात और ईनामी अपराधी होने का पता चला, ऐसा भी हो चुका है। देहरादून में बीते कुछ समय से जिस तरह ठेली-रेहड़ी वालों, मजदूरी करने वालों की संख्या में इजाफा होता जा रहा, उससे भी इस बात की पुष्टि होती है कि बाहरी लोग किस तादात में दून में उमड़ रहे हैं। दून में कुकुरमुत्तों की तरह खुलने वाली गन्ना रस की ठेली के अधिकांश संचालक बाहरी जिलों के बताए जाते हैं।

 

एक नहीं यह हर गर्मी हाल होता है कि सडक़ों के किनारे थोड़ी जगह मिलने पर ही ऐसी दुकानें सजा ली जाती हैं। साल दर साल इनकी संख्या बढ़ती ही जा रही है। हैरानी कि जहां एक ओर पुलिस अधिकारी अतिक्रमण के नाम पर धड़ाधड़ होने वाली कार्रवाई का बखान करते नहीं अघाते, वहीं कई जगह अवैध तरीके से चल रही सब्जी-फ्रूट मार्केट मानों आम लोगों को मुंह चिढ़ा रहे हैं।

 

जहां एक ओर राजधानी देहरादून में विश्व विख्यात स्कूल, सैन्य संस्थान आदि स्थित हैं और आतंकी धमकियों की सुगबुगाहट भी गाहे बगाहे मिलती रही है। ऐसे में देहरादून की सुरक्षा की जिम्मेदार खाकी को सुरक्षा के लिहाज से हर वह कदम उठाने चाहिएं, जिससे कि संदिग्ध गतिविधियों की समय रहते सूचना मिलती रहे और कार्रवाई हो सके। मगर यदि इस तरह ही बाहरी जिलों की पुलिस टीमें यहां रह रहे ‘अपराधी’ के दरवाजे पर पहुंचकर दस्तक दें, और इसके बाद स्थानीय पुलिस नींद से जागे तो क्या कहा जाए।