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दुनिया का अकेला स्कूल, यहां पढ़ाई के साथ कराई जाती है विकलांग लड़कियां शादी !

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उदय दिनमान डेस्कः दुनिया का अकेला स्कूल, यहां पढ़ाई के साथ कराई जाती है विकलांग लड़कियां शादी ! शायद आप चौंक गए। क्योंकि आधुनिक युग में जहां स्कूल एक दुकान के रूप में संचालित हो रही हैं वही ऐसी खबर पढ़कर आप हैरान होने के साथ चौंक अवश्य जाएंगे। यह सत्य है और दुनिया का यह पहला और अनोखा स्कूल हमारे देश में हैं जहां लड़कियों को पढ़ाई के साथ-साथ उनकी शादी भी करवायी जाती है वह भी विकलांग लड़कियों की।

 

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि आधुनिक समय में जहां दिखावे का बोलवाला है और हर व्यक्ति अपने बच्चे को महंगे से महंगे स्कूल में दाखिला दिलाकर अपनी समाज में इसे बड़ी इज्जत मानता है। चाहे बच्चे को कुछ आये या न आये, वह सामाजिकता को जाने या ना जाने उसे दो चार शब्द अंग्रेजी के आ जाने वाहिए। फिर क्या मां-बाप खुश, समाज खुश और रिस्तेदार ीाी खुश, हुई ना बड़ी बात।

 

यह हमारे समाज की सोच है और आजकल जितने भी प्राइवेट स्कूल खुले हैं वह दुकानों का रूप धारण कर चुकी हैं। इन स्कूलों में हर चीज की बोली लगती हैं। वहीं हमारे देश में एक ऐसा भी स्कूल हैं जहां पढ़ने वाले विकलांग हैं और वह प्राइवेट स्कूल के बच्चों से हर क्षेत्र में आगे हैं। इस विद्यालय की खासियत यह है कि इस विद्यालय में जो भी विकलांग कन्या पढ़ती है उसकी शादी भी स्कूल करवाता है। चलिए जानते हैं ऐसे अनोखे स्कूल के बारे में-

 

आज हम जिस स्कूल के बारे में आपको बताने जा रहे हैं वह शायद दुनिया में अपने तरह का अनोखा स्कूल है। यहां न सिर्फ लड़कियों को पढ़ाया जाता है बल्कि उनकी शादी का भी ख्याल रखा जाता है। गुजरात के अहमदाबाद में स्थित इस स्कूल का नाम अंध कन्या प्रकाश गृह है। कभी चार बच्चों के साथ खोला गया यह आज एक बड़े आवासीय विद्यालय के रूप में दुनिया के सामने है।

 

दरअसल, इस स्कूल को खोलने का मकसद बहुत ख़ास था। यह विकलांग लड़कियों को शिक्षित करने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए खोला गया था। बताते चलें कि विकलांग लड़कियों की खराब शिक्षा को लेकर 1954 में नीलकांत राय छत्रपति ने 10 हजार रुपए फंड के साथ इस स्कूल को शुरू किया था। इसकी देखरेख, अंध कन्या प्रकाश गृह नाम के एक गैर सरकारी संगठन के जिम्मे है।

 

आज की तारीख में यह संस्थान शारीरिक रूप से विकलांग लड़कियों को क्वालिटी एजुकेशन देने के साथ ही उन्हें जीवन के प्रति आत्मनिर्भर बनाने के लिए जाना जाता है। जब विकलांग लड़कियां शादी के योग्य हो जाती हैं तो संस्थान की ओर से उनकी योग्य शादी भी कराई जाती है। निश्चित ही यह अन्य परंपरागत स्कूलों से बिल्कुल अलग है।

 

विद्यालय की लड़कियां चिक्की, दिवाली के दिए और दूसरे हथकरघा प्रोडक्ट को भी बनाती हैं। जिन्हें मार्केट में काफी पसंद किया जाता है और उनके ठीक-ठाक पैसे भी मिल जाते हैं। यहां के छात्रों को धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलते सुन किसी का चौकना भले लाजिमी हो लेकिन ये विकलांग छात्र पढ़ाई और अन्य गतिविधियों के मामले में किसी भी सामान्य छात्र से बिल्कुल कम नहीं हैं।