udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news दुर्लभ : धरती पर है इंद्रलोक का सदाबहार पुष्प वृक्ष *पारिजात* !

दुर्लभ : धरती पर है इंद्रलोक का सदाबहार पुष्प वृक्ष *पारिजात* !

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पारिजात यही नाम है इस पुष्प वृक्ष का। इसे “हारश्रृंगार” भी कहा जाता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार पारीजात इस धरती का पेड़ नहीं है, अपितु इसे भगवान श्रीकृष्ण इंद्रलोक से रुकमणी के लिए भेंटस्वरूप लाए थे।

इस की विशेषता यह है कि यह सदाबहार है इस पर कभी पतझड़ नहीं आता और स्नेह से निरूपण करने पर यह किसी जलवायु विशेष का मोहताज नहीं रहता। इस पर यह सुंदर पुष्प संध्या काल में खिलने शुरू होते हैं पूरी रात्रि अपनी खुशबू बिखेरने के उपरान्त सुबह सूर्य उदय तक सारे के सारे पुष्प अपने आप धराधाम पर आगिरते हैं अर्थात भगवान के चरणों में अर्पित हो जाते हैं।

 

इन्हें इस पेड़ से निकालना नहीं पड़ता। क्योंकि आनंदकंद भगवान ही इस धराधाम पर नित नए हैं इसलिए इस वृक्ष पर भी नित नए पुष्प खिलते हैं और झरते हैं। जहां यह पारिजात का पेड़ लगा रहता है वहां का वातावरण सुगंधित, स्व: सिद्ध एवं शुद्ध हो जाता है। इस अत्यंत दुर्लभ वृक्ष ने देहरादून स्थित मेरे अंगने में आकर अहेतुक कृपा की है।

यह न केवल आध्यात्मिक पेड़ है बल्कि बहुत सारी बीमारियों को जड़ से खत्म करने की अद्भुत शक्ति रखता है। आयुर्वेद संहिता में इस पेड़ को वेदना नाशक और शांति प्रदायक कहा गया है वास्तव में श्रीकृष्ण भगवान भी रुकमणी पीड़ा व मन की शांति के लिए ही इस पेड़ को धरा पर लाए थे। आयुर्वेद के अनुसार इस पेड़ के पत्तों का काढ़ा ब्लड शुगर, गठिया, वदन दर्द व गैस्ट्राइटिस जैसी अनेक बीमारियों की अत्यंत प्रभावकारी औषधि है।

 

इसके पत्तों के काढ़े में थोड़ी सी केसर मिलाने के उपरांत इसका सेवन किया जाए तो यह गठिया रोग की अत्यंत प्रभावशाली औषधि बन जाता है, समस्त बदन दर्द को समूल नष्ट करता है। इसके पुष्पों की पंखुरी स्वेत तथा नालिका केसरिया रंग लिए होती है। यह और भी अनेक रंगों में दिखता है।

इस पुष्प के सेवन से पुष्टि वर्द्धन होता है। 10-15 पुष्प नित्य प्रति निहार सेवन करें उपर बताये गये सभी रोगों में लाभ होता है साथ ही शरीर व रक्त शुद्धिकरण भी हो जायेगा इस पेड़ के पत्ते हाथ से महसूस करने पर आर्टिफीसियल खरखरे प्लास्टिक के जैसे लगते हैं।

 

मुझे यह पेड़ पहली बार उत्तराखंड में श्रीनगर के विख्यात कमलेश्वर मंदिर आहते में दिखा था, एक संत ने इस पेड़ के बारे में हमें बताया था, तब से मन में यह प्रबल उत्कंठा थी कि यह वृक्ष हमारे अंगने भी उग जाए। प्रभु कृपा से आज यह पारिजात का वृक्ष प्रतिदिन अपने दर्शन देता है।

अब तो इसकी पौध भी देहरादून की नर्सरियों में मिल जाती है खासकर सतपाल महाराज जी की नर्सरी में इसकी पौध विशेष विशेष रूप तैयार की जाती हैं – जय नारायण जी की सरकार :-

हरीश मैखुरी जी की फेसबुक वाल से साभार

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