udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news एक चौकीदार का बेटा आज अरबपति,कहानी किसी किवदंती की तरह लगती है...

एक चौकीदार का बेटा आज अरबपति,कहानी किसी किवदंती की तरह लगती है…

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उदय दिनमान डेस्कः आज आधुनिकता की चकाचौंध में जहां हर व्यक्ति अपने आप को हाई प्रोफाइल जीवन जीना चाहता है वही इस संसार में कुछ ऐसे भी लोग हैं जो करोडो-करोडो का मालिक है, रहता है सीधा-साधा। अगर आपको कही साधारण-सा कुर्ता और लुंगी पहनी हुई ,चेहरे पर सरलता और सहजता और बर्ताव में आत्मीयता। वाला व्यक्ति दिखे और वह भी ऐसा शख्स की जो 100 भारतीय धनकुबेरों की लिस्ट में और 25 .००० करोड रूपये की जायदाद का मलिक हो, और आप उसे जानते हों, तो आपको कैसा लगेगा। लाजमी है कि अजीब सा लगेगा और आप उसके बारे में सोचने को मजबूर हो जाएंगे कि आखिर….। यहां बात हो रही है हरिद्वार में स्थित पतंजलि योगपीठ की और उसके सीईओ आचार्य बालकृष्ण की।

उल्लेखनीय है कि पतंलली आज देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी सभी की जुबा पर है। मैं पिछले काफी समय से इस बात से हैरान था कि आखिर बाबा रामदेव और आर्चाय बालकृष्ण ने इतना बडा कारोबार कैसे खडा कर दिया और उस पर मेरी बेटी डा. लाटी की डिमांड कि पापा मुझे पतंजलि की वह चीज चाहिए। डा. लाटी की हर डिमांड पूरी करने की मेरे में फिलहाल तो क्षमता नहीं, लेकिन बाबा रामदेव और आर्चाय बालकृष्ण के बारे में कुछ खोजने की ललक मन में पैदा हुई और इंटरनेट पर बैठ गया और वैसे भी आजकल काफी लंबे समय से अज्ञातवास में रहते हुए कुछ ज्ञान अर्जन करने का समय है तो लगा हू इसी दिशा में।

पतंजलि की वेबसाइट पर आचार्य बालकृष्ण का परिचय आयुर्वेद संस्कृत भाषा और वेद के महान ज्ञाता के रूप में है जिन्होंने जड़ी.बूटियों पर कई किताबें और शोध.पत्र लिखे हैं् बालकृष्ण कहते हैं कि पतंजलि ने कऱीब 100 वैज्ञानिकों को जड़ी.बूटियों के शोध के काम में लगा रखा है और जड़ी.बूटियों का एक विश्वकोश तैयार करने का काम भी कर रही है वो ये भी बताते हैं कि उन्होंने कऱीब 65प्त000 किस्म की जड़ी.बूटियों पर काम किया है और दावा करते हैं जड़ी.बूटियों के औषधीय गुण पर लिखी उनकी एक किताब की एक करोड़ प्रतियां बिक चुकी हैं उन्होंने ये भी बताया कि जड़ी.बूटियों के जिस विश्वकोश पर वो काम कर रहे हैं वो कऱीब डेढ़ लाख पन्नों की होगी आचार्य बालकृष्ण ने कहाए ष्मुझ पर मेरी मां का गहरा प्रभाव है और वो मेरी प्रेरणास्रोत भी हैं जड़ी.बूटियों के मेरे ज्ञान का आधार मां के घरेलू नुस्खे हैं पतंजलि योगपीठ में आचार्य बालकृष्ण का जन्मदिन जड़ी.बूटी दिवस के रूप में मनाया जाता है

भारत में लोकप्रिय योग गुरु बाबा रामदेव के करीबी सहयोगी आचार्य बालकृष्ण की कहानी किसी किवदंती की तरह लगती है् एक गऱीब नेपाली चौकीदार के परिवार में पैदा हुए बालकृष्ण को हाल में भारत के 100शीर्ष अरबपतियों की फ़ोब्र्स सूची में शामिल किया गया है। आचार्य बालकृष्ण भारत की सबसे तेज़ रफ्तार से आगे बढ़ती उपभोक्ता सामान बनाने वाली कंपनी पतंजलि आर्युवेद लिमिटेड के प्रबंध निदेशक हैं फ़ोब्र्स के मुताबिक आचार्य बालकृष्ण भारत के 48वें अमीर व्यक्ति हैं जिनकी कुल संपत्ति ढाई अरब अमरीकी डॉलर है।
उनकी कंपनी शैंपू से लेकर अनाज और साबुन से लेकर नूडल्स तक हर चीज़ बेचती है। हरिद्वार में नेपाली माता.पिता के घर जन्मे आचार्य बालकृष्ण एक आम सी ज़िंदगी जीते हैं और पतंजलि आयुर्वेद के रोज़मर्रा का कामकाज उन्हीं के ज़िम्मे हैण्हरिद्वार के अपने दफ्तर में एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि कंपनी की संपत्ति उनकी निजी नहीं है बल्कि उस ब्रांड की है जो समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सेवा प्रदान करता है। बालकृष्ण का जन्म 4 अगस्त 1972 को हुआ।

 

उनकी माँ का नाम सुमित्रा देवी और पिता का नाम जय वल्लभ था। उन्होंने संस्कृत में आयुर्वेदिक औषधियों और जड़ी.बूटियों के ज्ञान में निपुणता प्राप्त की और इसका प्रचार.प्रसार का कार्य करते रहे हैंद्य उनका जन्म दिवस पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट से जुड़े लोग जड़ी.बूटी दिवस के रूप में मनाते हैंआचार्य बालकृष्ण ने पतंजलि योगपीठ के आयुर्वेद केंद्र के माध्यम से पारंपरिक आयुर्वेद पद्धति को आगे बढ़ाने का कार्य किया बालकृष्ण ने आयुर्वेदिक औषधियों से सम्बंधित कई पुस्तकें भी लिखी है। बालकृष्ण ने रामदेव के साथ मिलकर हरिद्वार में आचार्यकुलम की स्थापना की। , वह नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किए गए स्वच्छ भारत अभियान से भी जुड़े हैं।

आर्चाय बालकृष्ण आयुर्वेद के साथ.साथ योग संस्कृत भाषा एवं व्याकरण और वेदों के भी विद्वान हैं। आर्चाय बालकृष्ण ने सांख्य योग संस्कृत भाषा एवं व्याकरणए पाणिनी अष्टाध्यायी वेद उपनिषद एवं भारतीय दर्शन की शिक्षा आर्चाय श्री बलदेव जी से हरियाणा के एक गुरुकुल में ली। आयुर्वेद के विद्वान आर्चाय बालकृष्ण का जन्म 4 अगस्त 1972 को हरिद्वार में हुआ। उस समय किसे पता था कि यह छोटा सा बालक आने वाले समय में पूरे विश्व में आयुर्वेद के क्षेत्र में एक अद्भुत क्रांति का वाहक बनेगा। आर्चाय बालकृष्ण आयुर्वेद के साथ.साथ योगए संस्कृत भाषा एवं व्याकरण और वेदों के भी विद्वान हैं।

 

विगत कुछ दिन पूर्व एक समाचार पत्र की साईड पर आर्चाय बालकृष्ण का एक इंटरब्यू पडा। इंटरब्यू लेने वाले पत्रकार मित्र राजेश मित्तल और अमित मिश्रा के सावालों को हुबहू यहां दिए जा रहे हैं।अपने बाल सखा बाबा रामदेव से अलग उनका धीर.गंभीर और संकोची व्यक्तित्व है। पेड़.पौधों, जड़ी.बूटियों को लेकर उनमें जूनून है। वह पतंजलि आयुर्वेद ल् िके सीईओ हैं। इसके 97प्रतिशत शेयरों के मालिक हैं। इनकी कंपनी ने आयुर्वेद और स्वदेशी के नारे के दम पर रोजमर्रा की चीजों के बाजार में धूम मचा दी है। एक अनुमान के मुताबिकए वह 25.000 करोड़ रुपये की जायदाद के मालिक हैं। इन्हीं आचार्य बालकृष्ण से हाल में राजेश मित्तल और अमित मिश्रा ने बात की।

 

देश के सबसे अमीर लोगों में शुमार होकर कैसा महसूस कर रहे हैं
बालकृष्ण:अपनी धूल भरी चप्पलों को दिखाते हुए इन्हें देख कर बताइए कि कैसा महसूस कर रहा होऊंगा। किसी लिस्ट में शामिल कर लेने से मुझमें कोई बदलाव नहीं आ सकता। मैं पहले जैसा था, अब भी वैसा हूं। रहता भी पहले की तरह हूं और कपड़े भी पहले ही तरह ही पहनता हूं। आपको एक और बात बताऊं मैंने जो कपड़े पहन रखे हैंए वे भी मेरा कोई परिचित ही सिला कर दे देता है।

 

तो फिर आपको धनकुबेरों की लिस्ट में शामिल कैसे कर लिया गया
बालकृष्ण: यह तो मेरी भी समझ से बाहर है। मेरी जानकारी के मुताबिक ऐसी लिस्ट में किसी भी अनलिस्टेड कंपनी को शामिल नहीं किया जाता। अगर इसके सकारात्मक पहलू की बात करें तो यह गौरव का विषय है कि एक अनलिस्टेड कंपनी को इतना ताकतवर समझा गया कि उसे इस लिस्ट का हिस्सा बनाया गया। इसके पीछे की सबसे बड़ी ताकत वे आम लोग हैं जो इस कंपनी के प्रॉडक्ट्स परए उनकी शुद्धता पर भरोसा करते हैं।
कुछ तो होगा जिसकी वजह से कंपनी की वैल्यू इतनी ज्यादा बताई गई है
बालकृष्ण: यह तो मेरी समझ से भी बाहर है कि 5 हजार करोड़ के टर्नओवर वाली कंपनी की कीमत 6 गुना ज्यादा कैसे निकली। हमें 10.15: प्रॉफिट होता भी है तो उत्तराखंड के टैक्स.फ्री जोन की वजह से। इसके अलावा जो पैसा भी हैए वह किसी की पॉकेट में नहीं है। जो है वह काम को आगे बढ़ाने में खर्च हो रहा है।

तो एक हिसाब से आप खुद को अमीर नहीं मानते। फिर भी आपके रेग्युलर खर्चेए सैलरी आदि क्या हैए कुछ बताएं।
बालकृष्ण: मेरे सारे खर्चे श्पतंजलिश् देखती है। मुझे नहीं पता कि कहां जाने का खर्च क्या है और वहां कैसे पहुंचना है। मैं गाड़ी से एयरपोर्ट तक पहुंचा दिया जाता हूं। मेरे पास मेरा टिकट होता है और मैं यात्रा कर लेता हूं। जहां पहुंचता हूंए वहां भी एयरपोर्ट पर कोई लेने आ जाता है।

 

फिर भी कुछ तो रुपये रखते होंगे
बालकृष्ण:अपने टेबल की ड्रॉअर खोलते हुए आप देखिए इसमें तकरीबन 40 हजार रुपये होंगेए जिसे मैं दिन भर आने वाले जरूरतमंद लोगों को सुविधानुसार देता हूं। मिसाल के तौर पर किसी कर्मचारी के घर पर शादी है या कोई ऐसा जरूरतमंद है जिसके पास कुछ भी नहीं है। मेरे सामने अगर कोई ऐसा शख्स आता है तो उसे में ना् नहीं बोल पाता। मदद जरूर करता हूं।

 

बस इतना ही पैसा है आपके पास
नहीं और है झोला उठाते हुए। इसमें करीब 40 हजार रुपये कैश है जो शायद 6.7 महीने से पड़े हैं। खर्च ही नहीं हो रहे। मेरी हर जरूरत यहीं पूरी हो जाती है तो मैं खर्च कहां करूं

पतंजलि के सीईओ होने के नाते कुछ सैलरी तो पाते होंगे। आपके सैलरी अकाउंट में कुछ तो आता होगा
मेरा कोई सैलरी अकाउंट नहीं है तो इसमें पैसे आने का सवाल ही नहीं उठता। मैं किसी भी तरह की कोई सैलरी नहीं लेता।

कोई क्रेडिट.डेबिट कार्ड तो होगा
मेरे नाम पर एक क्रेडिट कार्ड है जो मेरे पास न होकर ऑफिस में रहता है। इसे भी मजबूरी में विदेशों से किताबें आदि खरीदने के लिए बनाया गया है क्योंकि वे और किसी तरीके से खरीदने नहीं देते। चूंकि क्रेडिट कार्ड कंपनी के नाम नहीं बन सकताए इसलिए मेरे नाम पर बनवाया गया।

आप लोग स्वदेशी की बात करते हैं लेकिन आपके पास आईफोन है रेंज रोवर गाड़ी से आप चलते हैं।
मैं कुछ खरीदता नहीं। लोग दे जाते हैं। यह आईफोन भी किसी परिचित ने दिया है। कोई साथी देसी मोबाइल दे देगा तो वही इस्तेमाल करने लगूंगा। जहां तक रेंज रोवर की बात है तो जड़ी.बूटियों के सिलसिले में पहाड़ों पर जाना रहता है इसलिए ऐसी गाड़ी लेनी थीए जो हर जगह जा सके। वैसे भी अब रेंज रोवर को भारतीय कंपनी ने खरीद लिया है।

लेकिन फिर भी यह गाड़ी बनती तो विदेश में ही है
तो क्या हुआ! हमारा टेक्नॉलजी से किसी तरह का विरोध नहीं है। कंप्यूटर विदेश में बनता है तो क्या उसे हम इस्तेमाल न करें् स्वदेशी की हमारी परिभाषा को समझने की जरूरत है।

क्या है आपकी स्वदेशी की परिभाषा
विदेशी कंपनियां देश के पानी और दूसरे संसाधनों के जरिए चीजें बनाती हैं। बनाने वाले देश के इस्तेमाल करनेवाले देश के। हम विदेशी लोगों को मुनाफा क्यों कमाने दें ये सारी चीजें जीरो टेक्नॉलजी की हैं। इन्हें खरीदने से हम बच सकते हैं और विदेशी चीजें वहां भी नहीं खरीदनी चाहिए जहां हमारे पास स्वदेशी का विकल्प है। इसका मतलब नहीं कि हम दकियानूसी होकर तकनीक से मुंह चुराएं। तकनीक तो चाहिए। हमें कहा जाता है कि तुम्हारी मशीनें भी तो बाहर की बनी हैं और स्वदेशी की बात करते हो। सचाई यही है कि इन्हीं मशीनों की बदौलत ही देश के लोगों को बेस्ट क्वॉलिटी की चीजें उपलब्ध करा पा रहे हैं। तमाम जरूरी बड़ी मशीनें जर्मनीए जापानए अमेरिका या कनाडा में बनती हैं। यह स्थिति बदलेए इसलिए हमने पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन बनाया है। इस पर हम 150 करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं।

आपका पतंजलि गु्रपमें रोल क्या है
हंसते हुए मेरा काम यहां पर हुक्का भरने का है। मेरा कहने का मतलब है कि पहले के जमाने में घर में एक को मेहमानों के लिए हुक्का भरने का काम सौंप दिया जाता था। बस मेरा काम भी कुछ वैसा ही है। दिन भर लोग आते हैंए मैं उन्हें सुनता हूं। उसी के मुताबिक निर्देश आदि देता हूं। बस इसके अलावा मेरा कोई खास काम नहीं है। दुनिया में भगवान ने लोगों को एक ही चीज बराबरी से दी हैए वह है समय। अमीर.गरीबए राजा.रंक संन्यासी.सेठजी सबके पास दिन में 24 घंटे ही हैं। अब चैलेंज है कि उनका इस्तेमाल कैसे करना है। हम जहां हैं या जहां पहुंचेंगे अपनी प्राथमिकताओं के आधार पर पहुंचेंगे।

ऐसा कौन.सा प्रॉजेक्ट है जो दिल के सबसे करीब हैए जिसे करने से आपको संतुष्टि मिली हो
हमने जो हर्बल गार्डन तैयार किया हैए वह मेरे दिल के वाकई सबसे करीब है। मेरी गाएंए मेरी बतखें मेरे दिल के काफी करीब हैं। जब मैं इनके बीच होता हूं तो जड़ी.बूटी वाला बालकृष्ण बन जाता हूं। उस माहौल में मैं किसी ऑफिस में काम करनेवाले से कतई अलग नजर नहीं आता हूं।

फिर तो आप यहां खुद को फंसा महसूस करते होंगे
शुरुआत में कई बार लगता था। अब नहीं लगता। अब कई तरह से मैं भीड़ में होते हुए भी जंगल में रहता हूं। मैं इस वक्त आपको अपनी कहानी सुना रहा हूं लेकिन दिन भर में यहां लोगों की कहानियां सुनता रहता हूं। यह सब मुझे काफी बिजी रखता है। अब खाली वक्त ही नहीं है जो ऐसा कुछ महसूस कर सकूं।

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