udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news एक वॉट्सऐप मेसेज से खानी पड़ सकती है जेल की हवा

एक वॉट्सऐप मेसेज से खानी पड़ सकती है जेल की हवा

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नई दिल्ली। 18 साल के जाकिर अली त्यागी ने जब फेसबुक पर अपने विचार रखते हुए बीजेपी के राम मंदिर प्लान के बारे में लिखा था, तो उसे कतई अंदाजा नहीं था कि ये उसके लिए बेहद भारी पडऩे वाला है। मुजफ्फरनगर के रहने वाले जाकिर को इस अपराध के लिए 42 दिन जेल की हवा खानी पड़ी, पुलिस का टॉर्चर झेलना पड़ा। उसे इसी साल अप्रैल में धारा 420 और आईटी ऐक्ट की धारा 66 के तहत गिरफ्तार किया गया था। जेल से छूटने के बाद स्टील प्लांट से उसकी जॉब भी चली गई थी।

इसी तरह मेरठ के पत्रकार अफगान सोनी पर 2 नवंबर को पीएम नरेंद्र मोदी का अपमानजनक विडियो शेयर करने का आरोप लगाकर गिरफ्तार कर लिया था। उस विडियो में अपमान सिर्फ इतना था कि पीएम मोदी एक रैली में अच्छे दिन की बात कर रहे हैं और उस पर प्रतिक्रिया के लिए भीड़ की जगह बकरियों का झुंड दिखाई दे रहा है।

इस तरह सोशल मीडिया गिरफ्तारी के मामलों में इन दिनों काफी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। यह गिरफ्तारी नई नहीं है बल्कि यूपीए सरकार के दौरान ही आईटी ऐक्ट की धारा 66ए के तहत कई गिरफ्तारी के मामले सामने आए थे। आपको याद होगा कि 2012-2013 में महाराष्ट्र के पलघर की एक युवती को बाल ठाकरे की अंतिम यात्रा पर आलोचना करने पर गिरफ्तार कर लिया गया था वहीं उसकी एक दोस्त को उस स्टेटस को लाइक करने की वजह से गिरफ्तार किया था।

इसी तरह कोलकाता में ममता बनर्जी के बारे में वॉट्सऐप पर कार्टून फॉरवर्ड करने पर भी एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया था। अब धारा 66ए भले ही खत्म हो गई हो लेकिन स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति के हनन के ऐसे कई मामले निरंतर जारी है।इस बारे में पूर्व डीजीपी और इंडियन पुलिस फाउंडेशन के अध्यक्ष एन रामचंद्रन का कहना है, दूसरे देशों की तरह भारत में भी अभिव्यक्ति की आजादी में कई तरह के उचित बंधन भी हैं।

इसमें किसी सरकारी आदेश को धमकाना, धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़, जाति से जुड़ा कोई तथ्य, मानहानि, चाइल्ड पॉर्नोग्रफी शामिल है लेकिन असल समस्या पुलिस अधिकारियों द्वारा कानूनी प्रावधानों का दुरुपयोग करना है। रामचंद्रन आगे कहते हैं, गिरफ्तारी के लिए दौडऩे के बजाय पुलिस को पहले अपराध को जांचना चाहिए और पहले चेतावनी जारी करनी चाहिए।

इसी तरह आईटी ऐक्ट का दूसरा सेक्शन जिसमें अश्लीलता और फोटो के साथ खिलवाड़ के मामले आते हैं इसके तहत भी इन दिनों कई गिरफ्तारियां हो रही हैं। वकील अपार गुप्ता का कहना है कि किसी महिला की फोटो के खिलवाड़ और उसे मॉर्फ करना एक अपराध है लेकिन दूसरी ओर किसी राजनीतिक कार्टून या कटाक्ष में मॉर्फ इमेज का इस्तेमाल करना अवैधानिक नहीं है। अपार आगे कहते हैं कि यहां तक कि अफवाहें भी गैरकानूनी नहीं है लेकिन पुलिस उन मामलों में गिरफ्तारी कर सकती है जहां अफवाहों के चलते हिंसा या अपराधिक काम हो सकता है।

वकील अखिल सिब्बल का कहना है कि ये सोशल मीडिया गिरफ्तारी कहीं न कहीं विचारों की अभिव्यक्ति पर बड़े आक्रमण का प्रतीक है। किसी के खिलाफ कहीं पर भी कानूनी कार्रवाई करना यह दिखाता है कि शब्दों पर जरूरत से ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।