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दिल्ली से लेकर दून तक राजनैतिक दलों में चुनावी सरगर्मी बढ़ी

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चुनावी चेहरे पर कश्मकश तेज
देहरादून । विधानसभा चुनाव 2017 का शंखनाद हो चुका है। दिल्ली से लेकर दून तक राजनैतिक दलों में चुनावी सरगर्मी बढ़ी हुई है। ऐसे में जबकि विधानसभा चुनाव को चंद दिन ही बाकि बचे हैं, भाजपा में चुनावी चेहरा तय न होने से कार्यकर्ताओं में उत्साह की कमी नजर आ रही है। हैरानी वाली बात कि भाजपा के पास तीन पूर्व मुख्यमंत्री होते हुए भी 2017 के लिए चुनावी चेहरा साफ नहीं हो पा रहा।
उत्तराखंड में 15 फरवरी को विधानसभा चुनाव होने हैं और इसके नतीजे 11 मार्च को आएंगे। सभी पार्टियों ने चुनावी दंगल में उतरने के लिए राजनीतिक गोटियां बिछा ली हैं। भाजपा ने भी पूरी तैयारी कर रखी है, लेकिन अगर कुछ नहीं दिख रहा है तो पार्टी का चुनावी चेहरा। जबकि पार्टी के पास बड़े चेहरों की कोई कमी नहीं हैं, एक नहीं बल्कि चार पूर्व सीएम हैं। बहरहाल इस बीच सवाल एक ही है कि इस चुनावी रण में भाजपा का सेनापति कौन होगा? भारतीय जनता पार्टी वैसे तो महारथियों से भरी पड़ी है। यहां एक दो नहीं बल्कि तीन पूर्व मुख्यमंत्री मोर्चाबंदी को तैयार हैं। इनके अलावा और भी कई दिग्गज हैं, जो चुनावी कमान थामने की काबिलियत रखते हैं। मगर केंद्रीय नेतृत्व मुख्यमंत्री का चेहरा सामने करने की बजाए सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लडने को तरजीह दे रहा है।
उत्तराखंड में यह पहला मौका होगा, जब भाजपा बगैर सेनापति के चुनाव मैदान में उतरने जा रही है। पार्टी इसका कारण सामूहिक नेतृत्व को बढ़ावा देना बता रही है। मगर सूत्रों की माने तो अब तक के तजुर्बे के बाद पार्टी ने यह रास्ता अपनाना ही बेहतर समझा है। राज्य के पहले विधसनसभा चुनाव 2002 के समय भगत सिंह कोश्यारी मुख्यमंत्री थे, लिहाजा स्वाभाविक रूप से पार्टी की चुनावी कमान उनके ही हाथ में थी। दरअसल, राज्य के पहले मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी को पार्टी के भीतर इस कदर विरोध झेलना पड़ा कि केंद्रीय नेतृत्व को अल्प अवधि की अंतरिम सरकार में भी नेतृत्व परिवर्तन करना पड़ा था। कोश्यारी को भी चुनाव होने से पहले बस चंद ही महीनों का कार्यकाल मिला था। बीसी खंडूरी के उत्तराध्सिकारी बने डॉ$ रमेश पोखरियाल निशंक को भी अंदरूनी कलह ने ज्यादा मौका नहीं दिया। करीब सवा दो साल के बाद केंद्रीय नेतृत्व ने ऐन विधासनसभा चुनाव से पहले निशंक को हटाकर फिर भुवन चंद्र खंडूरी को मुख्यमंत्री बना दिया था। खंडूरी हंै जरूरी के चुनावी नारे के साथ, भाजपा उन्हें ही मुख्यमंत्री का चेहरा बनाकर चुनाव मैदान में उतरी, लेकिन महज एक सीट के अंतर से सत्ता गंवा बैठी थी।
भट्ट पहुंचे दिल्ली
दिल्ली से बुलावा आने पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट को एकाएक ही दिल्ली का रूख करना पड़ा। यहां बलवीर रोड में पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया था। इसी बीच दिल्ली से बुलावा आने पर भट्ट को सुबह ही दिल्ली का रूख करना पड़ा। सूत्रों की माने तो उत्तराखंड में चुनावी रणनीति पर मंत्रण के लिए वे दिल्ली बुलाए गए हैं।