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एमआर अभियान की सफलता सक्रिय सहभागिता पर जोर

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रुद्रप्रयाग। 11 सितंबर से शुरू होने वाले मिजील्स-रूबेला (एम-आर) टीकाकरण अभियान की की सफलता के लिए आयोजित जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक में जिलाधिकारी द्वारा शत-प्रतिशत सहभागिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंनें निजी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों से अभियान में सक्रिय प्रतिभागिता सुनिश्चित करने की अपील की।

 

मुख्यालय में आयोजित एमआर की डीटीएफ में अभियान की तैयारियों की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने कहा कि जनपद के आधे से ज्यादा विद्यार्थी निजी विद्यालयों में अध्ययनरत हैं। ऐसे में निजी विद्यालयों के नौ माह से 15 वर्ष तक के बच्चों को उक्त अभियान के अंतर्गत प्रतिरक्षित करने के लिए विशेष ध्यान दिया जाना आवश्यक है।

 

उन्होंने निजी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को इस दिशा में जनसहभागिता बढ़ाने व अभियान की शत-प्रतिशत सफलता के लिए निजी विद्यालयों से लक्षित आयु वर्ग का डेटा उपलब्ध कराने की अपील की। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, बाल विकास विभाग व शिक्षा विभाग को अभियान की पूर्ण सफलता के लिए आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

 

इससे पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सरोज नैथानी द्वारा खसरा व रूबेला टीकाकरण अभियान के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कहा कि नौ माह से 15 वर्ष तक के बच्चों में खसरा-रूबेला बीमारी की चपेट में आने की संभावना सबसे अधिक रहती है, जिसके मद्देनजर जनपद में सितंबर से अक्टूबर माह तक खसरा-रूबेला टीकाकरण अभियान चलाया जायेगा।

 

उन्होंने कहा कि लक्षित आयु वर्ग के समस्त बच्चों को एमआर टीके से प्रतिरक्षित करने के लिए जनपद में हर एक बच्चे की गणना की जानी बेहद जरूरी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के एसएमओ डॉ अर्जित गुप्ता द्वारा एमआर टीकाकरण के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया व विद्यालय स्तर पर भरे जाने वाले फार्म के बारे में जानकारी दी।

 

बैठक के द्वितीय सत्र में आगामी दस अगस्त को होने वाले राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के सफल आयोजन के लिए जिला स्तरीय टॉस्क फोर्स की बैठक की गई। जिसमें जनपद में एक वर्ष से 19 वर्ष तक के आयु वर्ग के समस्त बच्चों को कृमि नियंत्रण की दवा खिलाने के लिए कार्ययोजना पर चर्चा की गई।

 

बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) श्री चतुर्वेदी, बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री धर्मवीर सिंह आदि समेत निजी विद्यालयों के करीब 75 प्रधानाचार्य मौजूद रहे।