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हिमाचल प्रदेश में ट्राउट मछली खाने के शौकीनो को अब जेब ढीली करनी होगी

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मंडी। हिमाचल प्रदेश में ट्राउट मछली खाने के शौकीनो को अब जेब ढीली करनी होगी। प्रदेश में सरकार ने ट्राउट का दाम 100 रुपये प्रति किलो बढ़ा दिया है। मंडी व कुल्लू जिले में सरकारी तथा निजी क्षेत्र में तैयार होने वाली ट्राउट मछली अपने लाजवाब जायके के लिए देशभर में विख्यात है। सरकारी व निजी क्षेत्र में वर्तमान में ट्राउट मछली 350 रुपये प्रति किलो बिक रही थी। सरकार ने मत्स्य विभाग व निजी क्षेत्र के आग्रह को स्वीकार कर ट्राउट के दाम 450 रुपये प्रति किलो तय कर दिए हैं। महंगाई से जूझ रहे ट्राउट खाने वालों के लिए यह करारा झटका है। प्रदेश में हर साल करीब 167.100 टन ट्राउट का उत्पादन होता है। इसमें मंडी जिला के बरोट में मत्स्य विभाग के फार्म में सालाना करीब 2.5 टन, बरोट, जोगेद्रनगर व जंजैहली के कुछ क्षेत्रों में निजी तौर पर करीब 42 मत्स्य पालक 100 टन ट्राउट का उत्पादन करते है। कुल्लू जिले के पतलीकूहल में 15 टन ट्राउट का उत्पादन होता है। ट्राउट मछली की सबसे ज्यादा खपत दिल्ली के बड़े-बड़े होटलो में होती है। अब चंडीगढ़ के लोगों को भी ट्राउट का चस्का लग गया है। चंडीगढ़ से मांग बढऩे के बाद मत्स्य विभाग ने वहां भी ट्राउट का रिटेल काउंटर खोल दिया है। ट्राउट मछली सेहत के लिए खासकर हृदय के लिए फायदेमंद मानी जाती है। यह ओमेगा प्रोटीन से भरपूर होती है। ओमेगा प्रोटीन कोलेस्ट्रॉल को हृदय में जमा होने से रोकता है। ट्राउट मछली मे कांटे नहीं होते है, इसलिए भी यह खाने के शौकीनो की पहली पंसद मानी जाती है। मछली फीड के दाम व माल भाड़ा बढऩे के बाद ट्राउट के दाम बढ़ाने की सिफारिश की गई थी। मत्स्य विभाग के अवर सचिव नवीन शर्मा ने सरकार द्वारा ट्राउट उत्पादको की मांग को ध्यान में रखते हुए ट्राउट के दाम इस साल 450 रुपये प्रति किलो तय किए जाने की पुष्टि की है।