udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news गांव की बदरंग तस्वीर हुई रंगीन, आजादी के बाद पहली बार पहुंची गांव में बस !

गांव की बदरंग तस्वीर हुई रंगीन, आजादी के बाद पहली बार पहुंची गांव में बस !

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पिथौरागढ़ : गांव की बदरंग तस्वीर हुई रंगीन, आजादी के बाद पहली बार पहुंची गांव में बस ! आप खुद ही सोचिए कि उस गांव की तस्वीर कैसे रंगीन हो गयी होगी जब लोगों ने देश की आजादी के बाद अपने गांव में पहली बार बस देखी होगी। स्वाभाविक है कि गांव वाले जश्न मनाते हुए होली, दीपावली सहित सभी त्योंहार मनाएंगे ही। क्योंकि आजदिन तक जिस कठिन जीवन को ग्रामीण जी रहे थे वहा खुशी की थोड़ी झलक दिख जाए तो सपनों को पंख लगने स्वाभाविक हैं। यह तस्वीर है उत्तराखंड के एक गांव की।

 

गूगल युग है और आज के दौर में पिछडे़ से पिड़ड़ा गांव भी सोशल मीडिया से जुड़ा हुआ है। उस गांव में बिजली हो या ना हो या फिर सड़क हो या फिर न हो या फिर अन्य सुविधाएं हो या ना हो, लेकिन सोशल मीडिया से सभी जुडे़ हुए है और देश-दुनिया के बारे में जानकारी रखते है साथ ही सपने भी देखते हैं कि काश हमारा गांव भी वैसा है और हमारे गांव में भी वह सब कुछ हो। लेकिन हमारे भाग्यविधाताओं की काली करतूतों के कारण हमारे सपनों पर हमारे भाग्यविधाता ब्रेक लगाने का काम करते हैं और कर रहे है। लेकिन कभी-कभी हमारे भाग्यविधाताओं या फिर कुछ ईमानदार कर्मियों के कारण हमे कुछ फायदा मिल जाता है। कुछ ऐसा ही हुआ उत्तराखंड के पिथौरागड़ जनपद के गंगोलीहाट के गानुरा गांव में।

 

वर्तमान 21वीं सदी के जिस दौर में जहाँ देश -दुनिया में साइंस और टेक्नोलॉजी की बदौलत एक से बढकर एक चमत्कार हो रहे हो, ऐसे दौर में कोई पहली बार अपने क्षेत्र में बस को देखकर उसकी आरती उतारने लगे तो क्या कहेंगे। यह कोई कहानी नहीं है बल्कि हकीकत है। दरअसल 18 बरस के उत्तराखंड़ में विकास के नाम पर सत्तासुख भोगने वाले सरकार और प्रशासन के नुमांइदों की करतूत के चलते पिथौरागड़ जिले के गंगोलीहाट के गानुरा गांव की तस्वीर बदरंग बनी हुई थी।यह अकेला गांव नहीं है हमारे राज्य में हर तीसरे गांव की यही तस्वीर है और हमारे भाग्यविधाता इस तस्वीर को सही करने के बजाय खुद का सिद्ध साधने में लगे रहते हैं।

 

आपको बता दें कि बीते गुरूवार को पिथौरागड़ जिले के गंगोलीहाट के गानुरा गांव में सब कुछ बदल सा गया है। आजादी के बाद से ही अपने गांव में सड़क की राह तकने वाले गानुरा गांव के वाशिन्दों के लिए गुरुवार का दिन दोहरी खुशी लेकर आया। दरअसल इस दिन पहली बार गांव में कुमाऊं मंडल विकास निगम (केमू) की बस पहुंची। जिसे देखते ही ग्रामीणों की खुशी का ठिकाना ही नही रहा। और उसके बाद जो कुछ हुआ उसने हर देखने वालों की आंखों को नम कर दिया।यह होना भी स्वाभाविक था क्योंकि इतने सालों से इस गांव की तस्वीर बदरंग थी और आज गांव की तस्वीर रंगीन हो गयी।

 

उल्लेखनीय है कि लम्बे समय से गंगोलीहाट से पव्वाधार-चौरपाल से गानुरा गांव के लिए लगभग 14 किमी सड़क का निर्माण चल रहा था। सड़क का काम पूरा होते ही लोनिवि की सहायक अभियंता रीना नेगी गुरुवार को परीक्षण के लिए इस सड़क से बस लेकर पहुंची। गांव में बस के पहुंचते ही ग्रामीणों की खुशी का ठिकाना नही रहा।गांव की सबसे बुजुर्ग महिला किड़ी देवी ने दिया जलाकर बस की आरती उतारकर टीका लगाया। किड़ी देवी का कहना था कि उम्र निकल गई, अब जाकर गांव तक सड़क और बस पहुंचने का सपना साकार हुआ है। उनकी पीढ़ी ने तो जिन्दगी भर पैदल चलकर अपने दिन गुजार दिए। लेकिन अब नई पीढी के लिए अच्छा हो गया।

 

तहसील मुख्यालय से मात्र 26 किमी की दूरी पर स्थित गानुरा गांव के वाशिन्दों ने बताया कि उन्हें अब तक 10 किमी की खड़ी चढ़ाई चढ़कर मड़कनाली पहुंच कर गाड़ी मिलती थी। ऐसे में कई महिलाओं बच्चों समेत बुजुर्गों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता था। ऐसे में सड़क बनने से इस गांव के लोगों के बीच होली से पहले ही रौनक बनी हुई है। गांववालों को उम्मीद है कि अब गांव छोड़कर शहरों में रह रहे लोग भी गांव में आसानी से आ जा सकेंगे।सिफ यही नहीं गांव के युवाओं ने अगर पलायन कर भी रखा है तो वह अपने गांव समय -समय पर आ जा सकते है और अपने गांव में त्योहार मना सकते हैं। क्योंकि बस के पहुंचने से गांव की राह आसान हो गयी है।

 

उत्तरा,ांड के इस गांव की बदरंग तस्वीर में तो रंग भर दिए गए लेकिन आज भी कई ऐसे गांव है जहां सड़क सुविधा के साथ-साथ अन्य मूलभूत सुविधाएं आज भी नहीं है। ग्रामीण आज भी कठिन जीवन जी रहे हैं। कई सालों से अपने सपनों को संजोये ग्रामीणों को उम्मीद है कि कभी ना कभी उनके गांव की तस्वीर भी रंगीन हो जाएगी और गांव के हालात बदलेंगे। साथ ही अपने भाग्यविधाताओं पर भी लोगों को गुस्सा आता है कि वह सिर्फ अपना सिद्ध साधाने के लिए आते जाते है और बाकी समय ग्रामीणों को बेसुध छोड़ देते है। आज आवश्यकता है ग्रामीणों को जागने की ताकी उनके सपनों को पंख लग सके।

उदय दिनमान के लिए बीना बेंजवाल द्वारा संपादित