udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news गंगा:कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा नदी के घाटों पर उमड़ा जनसैलाब

कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा नदी के घाटों पर उमड़ा जनसैलाब

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पटना। आज कार्तिक पूर्णिमा है। राजधानी पटना में गंगा घाट पर आज सुबह से ही स्नान- ध्यान करने के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़े हैं।गंगा में डुबकी लगाने के बाद लोग पूजा-अर्चना कर रहे हैं। कल रात से ही बिहार के कई जगहों से श्रद्धालु पटना पहुंचे हैं। गंगा घाट पर विहंगम दृश्य दिख रहा है। गंगा के साथ ही बिहार में अन्य नदियों पर भी लोगों की काफी भीड़ देखी जा रही है। लोग नदी में डुबकी लगा पूजा-अर्चना कर रहे हैं।

कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर बिहार -यूपी की सीमा पर अवस्थित बांसी नदी में और सदानीरा गंडक मे लोगों ने डुबकी लगाई और पूजा-अर्चना की। सीतामढ़ी में चोरौत पूर्वी पंचायत अन्तर्गत कोकन गाँव स्थित धौंस नदी के बृजागंगा घाट पर कार्तिक पूर्णिमा अवसर पर श्रद्धालुओं नें लगाई डुबकी। शिवहर में भी कातिॅक पूणिॅमा पर लोगों ने लगाई नदी व तालाबों में डुबकी। देकुली धाम में बाबा भूवने्वर नाथ पर किया जलाभिषेक। सोमवार को कातिॅक पूणिॅमा के अवसर पर लोगों ने बागमती नदी के डुब्बा, पिपराही , बेलवा एवं अदौरी समेत अन्य घाटों पर पहुंच नदी में स्नान को ले डुबकी लगाई। वहीं नदी घाटों पर स्नान -दान पुण्य कर देकुली धाम स्थित बाबा भूवने्वर नाथ पर जलाभिषेक कर पूजा अर्चना करते हुए दर्शन लाभ लिया ।

सोमवारी को कातिॅक पूणिॅमा होने को लेकर अन्य शिवालयों में भी पूजन व जलाभिषेक को लेकर भीड उमड पडी है। वहीं पिपराही ,देकुली व अदौरी में मेले का भी आयोजन है। हिंदू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा की काफी मान्यता है। इसे कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है। इस पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा की संज्ञा इसलिए दी गई है क्योंकि इस दिन ही भगवान शंकर ने त्रिपुरासुर नामक महाभयानक असुर का अंत किया था और वे त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए थे। ऐसी मान्यता है कि इस दिन कृतिका में शिव शंकर के दर्शन करने से सात जन्म तक व्यक्ति ज्ञानी और धनवान होता है। इस दिन चन्द्र जब आकाश में उदित हो रहा हो उस समय शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा इन छ: कृतिकाओं का पूजन करने से शिव जी की प्रसन्नता प्राप्त होती है। इस दिन गंगा स्नान करना चाहिए। स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा-आरती करनी चाहिए। इस दिन उपवास रखना चाहिए और संभव हो तो एक समय ही भोजन करें ।

नमक का सेवन ना करें इस दिन और हो सके तो ब्राह्मणों को दान दें और उन्हें भोजन कराएं। शाम के समय निम्न मंत्र से चन्द्रमा को अघ्र्य देना चाहिए।

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