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ग्लैमर की चकाचौंध से दूर रस्किन बॉन्ड

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मसूरी। जाने-माने लेखक रस्किन बॉन्ड आज भी ग्लैमर की चकाचौंध से दूर रहते हैं। यूं तो तकरीबन 150 से अधिक कहानी संग्रह, उपन्यास, संस्मरण लिख चुके रस्किन बॉन्ड खुद को आलसी कहते हैं, लेकिन 84 साल की उम्र में भी अपने काम खुद करते हैं।
रोजाना सुबह उठकर धूप की पहली किरण पर जाकर बैठ जाते हैं और तीन से चार घंटे एकांत में बैठकर किताब लिखते हैं।

देश-दुनिया में नाम कमा चुके रस्किन बांड ने वह सारे मुकाम पा लिए हैं, जिसकी लोग कल्पना ही कर सकते हैं। रस्किन को मसूरी में बसे हुए 50 साल से अधिक हो चुके हैं। इस दौरान ग्लैमर उनके सिर नहीं चढ़ा। आज भी वह अपने 10 बाई 10 के छोटे से कमरे में सामान्य तरीके से ही रहते हैं। अपनी एक किताब में रस्किन लिखते हैं कि वो सादगी के कायल इसलिये हैं कि वह बहुत आलसी हैं। धूप में सोये रहते हैं। घर की गंदी दीवार पर सिर टिकाए हुए सपने देखते रहते हैं।

ए बुक ऑफ सिंपल लिविंग : ब्रीफ नोट्स फ्रॉम द हिल्स में रस्किन बॉन्ड द्वारा रोजाना लिखे गई बातों को शामिल किया गया है। इसमें रस्किन ने सादगी के बारे में लिखा है कि जीवन में अधिक होशियार होने की जरूरत नहीं, अधिक बोलने वाला स्याणा कव्वा, तेज दौडऩे वाला खरगोश अक्सर मात खा जाते हैं। पेज संख्या 137 पर अपनी उस चाची का जिक्र किया है जो बारिश के दिनों में भी अपने पौधों को पानी देती रहती थी, और पूछने पर जवाब देती थी कि बारिश तो ऊपर से आती है, जबकि पौधे उसका इंतजार करते रहते हैं। खिला हुआ छोटा सा फूल जो खुशी दे सकता है वह बैंक का चेक भी नहीं दे सकता। सादगी अपनाने का उपाय उनकी चिरपरिचित शैली में है। वह लिखते हैं कि खुद पर इतराओ मत… आइना देखो… दाड़ी बनाओ और आगे बढ़ो…, किताब में किस्सागोई भी है।

प्रसिद्ध लेखक पद्मश्री और पद्मभूषण रस्किन बॉन्ड ने शनिवार (19 मई) को मसूरी में अपना 84वां जन्मदिन पारवारिक मित्रों के साथ सादगी से मनाया। जन्मदिन के मौके पर रस्किन ने कहा कि जब तक आखरी सांस है, तब तक वे बच्चों के लिए लेखन का काम करते रहेंगे। वहीं दोपहर साढ़े तीन बजे रस्किन माल रोड स्थित बुक स्टोर पर पहुंचे, जहां पर सुबह से ही बड़ी संख्या में उनके प्रशंसक, पर्यटक और स्थानीय लोग उनकी राह देख रहे थे।

जैसे ही रस्किन बुक स्टोर पर पहुंचे, बच्चों, युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों में उनको शुभकामना देने के लिए होड़ मच गयी। प्रशंसकों की लंबी लाइन बुक स्टोर के बाहर लगी रही। बारी-बारी से लोग बुक स्टोर पर गए, किताबें खरीदी और उनका ऑटोग्राफ लिया। उनके साथ सेल्फी लेने को भी हर कोई लालायित दिखा। रस्किन ने बुक स्टोर पर बच्चों के बीच भी केट काटा। इस दौरान उनकी नई पुस्तक रनजी द म्यूजिक मेकर का विमोचन किया गया।

असम से आई उनकी प्रशंसक भाष्वती ने बताया कि वे रस्किन बांड की इतनी बड़ी फैन हैं कि वे हर साल उनके जन्मदिन को मनाने के लिए मसूरी आती हैं। हर साल उन्हें पेंटिंग भेट करती हैं। इस बार भी उन्होंने रस्किन को उनके जन्मदिन पर पेटिंग भेंट की है। बताया कि उन्हें बचपन से ही रस्किन बांड द्वारा लिखी किताबें, उपन्यास और कविताएं पसंद हैं। बचपन से ही रस्किन बॉन्ड को पढ़ती हुई आ रही हैं। मसूरी के लेखक गणेश शैली बताते हैं कि रस्किन बच्चों से बहुत प्यार करते हैं, वे बच्चों के साथ बच्चे बन जाते हैं।

बताया जाता है कि मसूरी में रस्किन बॉन्ड ने अपनी सरवेंट के बेटे को गोद ले लिया था। अब वह बेटे के परिवार के साथ रहते हैं। रस्किन बॉन्ड 84 साल की उम्र में भी घर पर अपना काम खुद करते हैं। बहु बीना कहती हैं कि आज भी रस्किन बॉन्ड घर पर अपना पूरा काम करते हैं। वह अभी भी निरंतर लेखन का काम कर रहे हैं। रस्किन ने अपने जन्मदिन पर बच्चों से वादा किया है कि उनके लिए अभी भी किताबें लिखूंगा। नए लेखकों से रस्किन ने अपील की है कि जितना अच्छा हो लिखने का प्रयास करें। ऐसी कुछ नहीं लिखें जिससे समाज में कोई नकारात्मक असर न पड़े। कहा कि सभी लोग स्वस्थ रहें, खुश रहें। वह यही चाहते हैं।

रस्किन बॉण्ड का जन्म 19 मई 1934 को हिमाचल प्रदेश के कसौली में हुआ था। मूलरूप से रस्किन बॉन्ड का परिवार ब्रिटेन का है। बॉण्ड को पढ़ाई लिखाई का बचपन से ही बड़ा शौक रहा है। पहली कहानी ‘रूम ऑन द रूफ’ रस्किन ने महज 17 साल की उम्र में लिख दी थी। 1957 में रस्किन को कामनवेल्थ राइटिंग के रूप में जॉन लिवलिन रेज प्राइज भी मिला था। रस्किन ने एक सौ से अधिक कहानी, उपन्यास, कविताएं लिखी हैं। 1963 में रस्किन बॉन्ड पहाड़ों की रानी मसूरी आ गए। रस्किन बांड की उपन्यास पर कई बॉलीवुड फिल्में बन चुकी हैं। 1999 में भारत सरकार ने रस्किन बॉन्ड को पद्मश्री सम्मान से नवाजा था।