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शिक्षा के साथ संस्कार, संस्कृति, पर्यावरण, स्वरोजगार की दीक्षा

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शिक्षा समाज के विकास में अहम् भूमिका अदा करता है, लोग अपने नौनिहालों को बेहतर शिक्षा देना चाहतें हैं, लेकिन मौजूदा प्रदृश्य देखें तो साफ़ पता चलता है की पहाड़ों से सबसे ज्यादा अगर पलायन हुआ है तो वो शिक्षा के लिये, बेहतर शिक्षा के लिए लोगों ने अपने घर गांव को छोड़ दिया है, यदि हम लोगों को उनके घर पर ही बेहतर शिक्षा उपलब्ध करा दे तो फिर भला क्यों कोई पलायन को मजबूर हो पायेगा, ऐसी ही एक अनोखी पहल की है शिक्षाविद अनीता नौटियाल ने, आनंद वाटिका गुरुकुल के माध्यम से जो आने वाले समय में एक मील का पत्थर साबित होगा, जनपद टिहरी के धारमंडल, मदन नेगी गांव में रक्षाबंधन के दिन 18 अगस्त को स्थानीय लोगो के सहयोग से आनंद वाटिका ग्रीन गुरूकुलम की नीव रखी गई, पहले दिन 19 अगस्त को इस गुरुकुल में 21 बच्चे पहुंचे आज गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चों की संख्या १०० के पार पहुँच गई है, जिससे हर कोई हतप्रभ है, दीदी का यह प्रयास पूरे प्रदेश में अपने आप में एक अभिनव प्रयोग है, जिसमे स्कूल के बाद अनौपचारिक लेकिन सार्थक शिक्षा के द्वारा बच्चों के बेहतर भविष्य के लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में सार्थक पहल की जा रही है, इस गुरुकुल के माध्यम से बच्चों को गुरुकुल पद्वति की तरह ग्रीन विचार-दर्शन और मूल्यों की शिक्षा, पारम्परिक लोक ज्ञान, बोली भाषाओँ का ज्ञान, लोकसंस्कृति, लोकसंगीत, परम्पराएँ, रीति रिवाज और लोक बाध्य यंत्रों की जानकारी, के साथ साथ दैनिक जीवन में काम आने वाले कौशल में भी प्रशिक्षित किया जायेगा, हतकरघा से लेकर हस्तशिल्प, कृषि से लेकर बागवानी, दुग्ध उत्पादन से लेकर मुर्गी पालन यानी की रोजगार परक शिक्षा भी दी जायगी ताकि यहाँ से पढने वाले बच्चों को जीवन में कभी भी रोजगार के लिए दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े, इसके अलावा बच्चों को पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा भी दी जायगी, जिसमे वृक्षारोपण से लेकर चाल खाल, गाड़ गदेरे, और जल, जंगल, की उपयोगिता के बारे में विस्तार से अवगत कराया जायेगा साथ ही स्वच्छता की जानकारी भी मुहैया करवाई जायेगी, अगर दीदी का ये गुरुकुल अपने उद्देश्यों को पूरा करने में सफल सिद्ध होता है तो न केवल ये एक अभिनव प्रयोग होगा साथ ही गुणवतापरक शिक्षा की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा,
गौरतलब है की आनंद वाटिका गुरुकुल की कल्पना करने वाली शिक्षाविद अनीता नौटियाल बिगत कई बरसों से प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में हैं, गुजरात से लेकर काशीपुर और ऋषिकेश में उन्होंने शिक्षा के लिए बहुत कार्य किये, इसके अलावा अनीता नौटियाल एक समाजसेविका भी हैं और लगातार कई सामजिक कार्यों में प्रखर रूप से अपना सहयोग भी प्रदान करती हैं, वे कई बार अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड सहित कई देशों का भ्रमण भी कर चुकी हैं, जहां उन्होंने लोकतान्त्रिक व्यवस्था का अध्ययन भी किया, अनीता नौटियाल कहती है की उन्हें बेहद दुःख होता है की लोग पहाड़ों में बेहतर शिक्षा मुहैया न होने के कारण पलायन कर रहें हैं, यदि लोगों को उनके घर में गुणवतापरक शिक्षा मिल जाती है तो फिर क्यों कोई पलायन करेगा, इसलिए मेरी कोशिस है की आनंद वाटिका के जरिये लोगों की बेहतर और रोजगारपरक शिक्षा मिल सके, जिससे न केवल पलायन रुके अपितु लोग वापस अपने घरो की और लौटे
वास्तव में जिस तरह से अनीता नौटियाल ने आनंद वाटिका के तहत जो कार्य करने का बीड़ा उठाया है वह प्रशंसनीय तो है ही अपितु काबिलेतारीफ़ भी है यदि इसी तरह से अन्य लोग भी अनुसरण करके अपने अपने इलाके में पहल करें तो इससे न केवल लोगो को अपने घर में बेहतर शिक्षा मिल पाएगी अपितु रिवर्स माइग्रेशन भी लौट आयेगा,

संजय चौहान