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भारत में अफसरशाही का एक नया कारनामा

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17 साल पहले हुई विधवा को पासपोर्ट ऑफिस मांग रहा मैरिज सर्टिफिकेट
अहमदाबाद । हुसैनबीबी का हज की तीर्थयात्रा पर जाने का सपने तब पूरा होते होते रह गया जब वह मैरिज सर्टिफिकेट नहीं दे सकी। हुसैनबीबी को डर है कि उनका मक्का जाने का सपना शायद ही कभी पूरा हो पाएगा क्योंकि पासपोर्ट ऑफिस के अधिकारी उनसे मैरिज सर्टिफिकेट मांग रहे हैं जोकि उनके पास नहीं है।
हुसैनबीबी के पास विधवा पेंशन कार्ड है जो उन्हें 2000 में जारी किया गया था। मानसिक रूप से बीमार उनके पति के घर छोडऩे के 7 साल बाद उन्हें विधवा पेंशन कार्ड दिया गया।सरकारी नियमों के मुताबिक, एक व्यक्ति को लगातार 7 सालों तक गायब रहने के बाद ही मृत घोषित किया जा सकता है।विधवा पेंशन कार्ड के अलावा सरकार ने उन्हें आधार कार्ड और वोटर आईडी भी जारी किया है लेकिन रीजनल पासपोर्ट कार्यालय इन सरकारी दस्तावेजों को आधार नहीं मान रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि जब तक मैं मैरिज सर्टिफिकेट जमा नहीं करूंगी, तब तक मुझे पासपोर्ट नहीं जारी किया जाएगा।मैं कहां से मैरिज सर्टिफिकेट लाऊं? रीजनल पासपोर्ट ऑफिसर नीलम रानी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वह मामले की जांच करेंगी और सुनिश्चित करेंगी कि उनके साथ कुछ अन्याय न होने पाए। पासपोर्ट अधिकारी किसी भी तरह संतुष्ट ही नहीं हो रहे हैं और एक के बाद एक दस्तावेज की मां ग कर रहे हैं।

1962 में जब हुसैनबीबी ने वेस्टर्न रेलवे के लोकोमोटिव ड्राइवर मुस्तफा से निकाह किया तो उस वक्त किसी मैरिज सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होती थी इसलिए उन्होंने कभी इसे बनवाया ही नहीं।हुसैनबीबी ने बताया कि उन्होंने अपने परिवार वालों और पड़ोसियों के सामने निकाह किया था और उनके 4 बच्चे भी हुए।समाज और रेलवे अधिकारी उन्हें मुस्तफा की विधवा के तौर पर पहचानता है लेकिन पासपोर्ट ऑफिस के लिए यह पर्याप्त सबूत नहीं है।

उन्होंने बताया, पासपोर्ट ऑफिस ने मुझे अपने पति की गुमशुदगी का हलफनामा दाखिल करने को कहा। जब मैंने इसे जमा करा दिया तो इसके बाद गुमशुदगी प्रमाणित करने के लिए पुलिस दस्तावेज मांगे गए।पुलिस के दस्तावेज सौंपने के बाद मुझसे गुमशुदा व्यक्ति की पत्नी होने का सबूत मांगा जाने लगा।यही नहीं मुझे अपमानित करते हुए अधिकारियों ने मुझे पासपोर्ट ऑफिस दोबारा नहीं आने की चेतावनी दी है। पहले मुझसे हज यात्रा के लिए हज कमिटी का पत्र जमा करने के लिए कहा गया जिससे हज तीर्थयात्रा में शामिल होने वाले लोगों की पुष्टि होती है।

लेकिन हज कमिटी बगैर पासपोर्ट के हज तीर्थयात्रा के लिए किसी के नाम को मंजूरी नहीं देती है।एक दस्तावेज जमा करने के बाद अधिकारियों की दूसरी पड़ताल शुरू हो जाएगी। 70 साल की बुजुर्ग अपनी शादी के बारे में झूठ क्यों बोलेगी? मैंने पुलिस दस्तावेज भी जमा कर दिए हैं उसके बावजूद भी मुझे पासपोर्ट जारी नहीं किया जा रहा है।
मुस्तफा 1993 में गुमशुदा हो गए थे। परिवार वालों ने बहुत खोजा लेकिन वह मुस्तफा को नहीं ढूंढ पाए। उसी साल 5 सितंबर को परिजनों ने मुस्तफा की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। 4 बच्चों का पेट पालने की जिम्मेदारी हुसैनबीबी पर आ गई क्योंकि उनके अलावा परिवार में कमाने वाला कोई नहीं था। रेलवे ने 1996 में हुसैनबीबी के पेंशन आवेदन को मंजूर किया।