udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news विडंबनाः लकड़ी की बल्लियां लगाकर अलकनंदा कर रहे ग्रामीण पार

विडंबनाः लकड़ी की बल्लियां लगाकर अलकनंदा कर रहे ग्रामीण पार

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चमोली । वर्ष 2013 में खीरों घाटी में आई आपदा के जख्म अभी भी हरे हैं। खीरों घाटी के अरूड़ी पटूड़ी समेत आधा दर्जन गांवों की 800 की आबादी आवाजाही का एकमात्र साधन अलकनंदा नदी पर बना पुल बह गया था। इसका निर्माण पांच वर्ष बाद भी नहीं हो पाया है। ग्रामीण अलकनंदा नदी के ऊपर लकड़ी की बल्लियां लगाकर आवाजाही कर रहे हैं।

वर्ष 2013 में जोशीमठ विकासखंड की खीरों घाटी में भी व्यापक नुकसान हुआ था। इस घाटी के अरूड़ी, पटूड़ी, ज्याबगड़ समेत अन्य गांवों की आवाजाही का एकमात्र साधन पुल भी उस दौरान बह गया था। तब ग्रामीण कई दिनों तक गांव में ही कैद रहे। हालांकि नदी का जल स्तर कम होने के बाद कच्चे लकड़ी के पुल से ग्रामीण गांव से इधर आ पाए।

 

आपदा के बाद से ही यहां के ग्रामीण अलकनंदा नदी पर पुल निर्माण की मांग कर रहे थे। वर्ष 2015 में सरकार ने विनायकचट्टी के पास अलकनंदा पर 140 मीटर लंबे स्पान झूला पुल की स्वीकृति दी। इसके लिए 1021.49 लाख रुपये आवंटित कर वर्ल्ड बैंक आपदा का निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी। पहले तो दो सालों तक वर्ल्ड बैंक आपदा ने पुल निर्माण प्रारंभ ही नहीं किया। तब ग्रामीणों ने कई बार जन आंदोलन किए। वर्ष 2017 में विभाग ने पुल निर्माण प्रारंभ किया।

 

परंतु एक साल में अभी तक निर्माण एजेंसी पुल के एबेडमेंट का ही निर्माण कर पाई है। एबेडमेंट बनाने के बाद कार्य लंबे समय से बंद है। पुल निर्माण न होने के बाद ग्रामीणों ने अलकनंदा नदी पर लकड़ी की बल्लियां लगाकर आवाजाही की जा रही है। पटूड़ी गांव के कुलदीप ङ्क्षसह राणा का कहना है कि जन आंदोलनों के बाद पुल को स्वीकृति मिली। परंतु निर्माण एजेंसी की कछुवा चाल से अभी तक पुल का निर्माण नहीं हो पाया है। ग्रामीण प्रदीप चौहान का कहना है कि लकड़ी की बल्लियां डालकर अलकनंदा नदी को पार करने में खतरा है।

 

उनका कहना है कि नदी का जल स्तर बढ़ते ही कच्ची पुलिया बह जाती है। ग्रामीण बार बार पुलिया बनाकर आवाजाही करने को मजबूर हैं। वर्ल्ड बैंक आपदा के अधिशासी अभियंता मनोज कुमार का कहना है कि पुल निर्माण स्थल पर पांच पेड़ों का कटान होना है। इसके लिए वन विभाग से बातचीत चल रही है। बताया कि वर्ष 2018 में पुल निर्माण पूरा कर आवाजाही चालू कर दी जाएगी।