udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news जबतक सूरज चांद रहेगा सूरज तेरा नाम रहेगा

जबतक सूरज चांद रहेगा सूरज तेरा नाम रहेगा

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कर्णप्रयाग। आतंकियों से लड़ते हुए जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में शहीद हुए कर्णप्रयाग के बेटे सूरज सिंह तोपल का पार्थिव शरीर शनिवार सुबह ही उनके पैतृक गांव फलौटा पहुंचा। पिंडर और अलकनंदा संगम तट पर शहीद जवान का पूरे सैन्य सम्मान से अंतिम संस्कार किया गया।

 

शहीद के परिवार को सांत्वना देने खुद सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत भी कर्णप्रयाग संगम घाट पर पहुंचे। तिरंगे में लिपटे अपने लाल के पार्थिव शरीर को देख परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। शहीद सूरत के अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोग चमोली और आसपास के इलाकों से यहां पहुंचे हुए थे। हर ओर से यही ध्वनि सुनाई दे रही थी- जबतक सूरज चांद रहेगा, सूरज तेरा नाम रहेगा। पिता नारायण सिंह ने अपने होनहार बेटे को मुखाग्नि दी।

 

शनिवार सुबह लगभग 11 बजे सूरज का पार्थिव शरीर उनके निवास स्थान से हजारों की भीड़ के साथ निकला। दो बहनों और मां का तो जैसे सब कुछ लुट गया था। पिता अपने सीने पर पत्थर रख अपने जवान बेटे की अर्थी को कंधा दे रहे थे। उन्होंने बताया कि जम्मू कश्मीर में तैनाती के दौरान सूरज अकसर अपने घर पर बात करता रहता था।

 

अब इस आंगन में नहीं उगेगा सूरज
माता-पिता की आंखों का तारा और दोनों बहनों का लाडला सूरज अब आसमां में अनंत तारे की तरह जगमाएगा। परिवार अंदर से टूट गया है लेकिन फिर भी अपने बच्चे पर उन्हें गर्व है। किसी से ये न सोचा था कि उनका बेटा अबकी बार घर आएगा तो तिरंगे में लिपटकर। ये शब्द एक पिता के लिए कहना बेहद कठिन हैं लेकिन नारायण सिंह तोपाल फिर भी कहते हैं कि उन्हें गर्व है कि उनका बेटा देश की रक्षा करते हुए शहीद हुआ।

 

इस पिता को उठानी पड़ी जवान बेटे की अर्थी
एक पिता के लिए वो पल बेहद मुश्किल भरा होता है कि उसके बेटे की अर्थी उसके कंधे पर जाए। इस गम से गुजर रहे सूरज सिंह के पिता नारायण तोपल कहते हैं कि अब सरकार को पाकिस्तान और आतंकवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। जो आए दिन भारत में घुसकर आतंक फैलाने की हिम्मत जुटा रहे हैं।

 

अपने हाथों पर अब कौन बांधेगा वो रंगीन धागे
सूरज सिंह की दो बहनें हैं और सूरत उनका इकलौता भाई था। दो बहनों के भाई की वजह से परिवार जल्द से जल्द उसकी शादी करवाने की योजना बना रहा था। वहीं शहीद हुआ जवान घर में ही नहीं बल्कि पूरे गांव में लोगों की आंखों का तारा हुआ करता था। शहादत की खबर सुनकर उनके घर में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। घरवालों को अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है कि उनका लाडला अब इस दुनिया में नहीं रहा।

 

यहां से मिली सेना में जाने की प्रेरणा
25 साल के इस जवान का जन्म 3 सितंबर 1992 को चमोली जिले के कर्णप्रयाग में हुआ था। बेटे की शहादत पर पिता का कहना है कि हमें गर्व है अपने बेटे पर, जिसने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। सूरज के पिता नारायण सिंह तोपाल भी भारतीय सेना का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने ही ये फैसला किया था कि उनका बेटा भी देश की रक्षा करेगा। दो बहनों के इकलौते भाई सूरज की शहादत की ख़बर सुनकर परिवार में मातम छाया है। लेकिन पिता नारायण सिंह कहते हैं कि उन्हें अपने बेटे की शहादत पर गर्व है।

 

सीएम ने दिया पूरी मदद का भरोसा
इस दौरान शहीद के परिवार को सांत्वना देने पहुंचे सीएम त्रिवेंद्र रावत ने कहा है कि सूरज के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता। दो बहनों को इकलौते भाई का इस तरह से चले जाना का गम क्या हो सकता है ये समझा ही जा सकता है। सीएम ने कहा है कि सरकार की तरफ से जो भी परिवार को मदद चाहिए वो दी जाएगी।