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जंगल बचा काफल को बनाया आय का जरिया

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पौड़ी। वैज्ञानिक तरीके से बागवानी के साथ ही अब काफल भी किसानों की आय में इजाफा कर रहा है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उगने वाले काफल फल को लेकर जलागम ने भी किसानों को प्रशिक्षण देकर इससे जूस बनाने के गुर बताए हैं।

हालांकि इस बार जंगलों की आग ने काफल को भी नुकसान पहुंचाया है। जलागम क्षेत्र ग्वाड़ीगाड़ में किसानों ने जंगलों की आग पर अंकुश लगाने के साथ ही काफल से भी अपनी आय में बढ़ाई। किसान विपिन पंत ने बताया कि किसानों के समूह ने करीब एक लाख की आय इससे अर्जित की है।

हालांकि काफल से आय अर्जित करने में किसानों को काफी मेहनत करनी पड़ी और इसे श्रीनगर तक भी बिक्री के लिए ले जाना पड़ा। स्थानीय ग्रामीणों ने जंगल से आग को बचाने का काम किया और जब आग काफल के पेड़ों तक नहीं पहुंची तो इससे किसानों को स्थानीय स्तर पर लाभ भी मिला।

हर साल काफल सीजन पर आय में इजाफे का साधन बन सकते हैं। जिन इलाकों में यह फल नहीं होता है वहां इसकी कीमत भी अच्छी मिलती है। एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना के अधीन आने वाले इस क्षेत्र में किसान पॉलीहाउस और कृषि यंत्रों के जरिए खेती कर उत्पादन में भी बढ़ोत्तरी कर रहे हैं।

मरोड़ा में अनार की भगवा प्रजाति का रोपण किया गया है तो ग्वाडीगाड आदि क्षेत्रों में फ्राजबीन, टमाटर, बैंगन के उत्पादन पर जोर दिया गया है। उप परियोजना निदेशक आईएलएसपी रवि शंकर मिश्रा ने बताया है कि जिन क्षेत्रों में काफल का उत्पादन अच्छा है वहां यह किसानों की एक आय का प्रमुख साधन बन रहा है।

इसके लिए किसानों को प्रेरित किया गया है। किसान काफल से आय के साथ ही इन जंगलों को भी आग से बचाने का काम कर रहे हैं। 30 किसानों के एक समूह को काफल से जूस और स्कवैश बनाने की ट्रेनिंग पहले ही दी गई है। हालांकि यह अभी शुरू नहीं हो पाया।

इसके साथ ही पूरे परिक्षेत्र में वैज्ञानिक तरीके से ही टमाटर, खीरा, मिर्च आदि की बागवानी पर जोर दिया गया है ताकि कम रकबे में किसानों का उत्पादन बढ़े और उनकी माली हालत में भी सुधार हो। जिन इलाकों में पानी की कमी थी वहां पानी की सुविधा किसानों को दी गई है।