udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news जीरो टॉरलेंस:घोटालों के प्रदेश उत्तराखंड में सामने आया एक और घोटाला !

जीरो टॉरलेंस:घोटालों के प्रदेश उत्तराखंड में सामने आया एक और घोटाला !

Spread the love

राजधानी देहरादून  में मनरेगा के लाखों के फंड को ठिकाने लगाने का मामला सामने आया

देहरादून। घोटालों के प्रदेश उत्तराखंड में सामने आया एक और घोटाला ! उत्तराखंड में कौन का घोटाला कब सामने आ जाए कुछ कहा नहीं जा सकता है। हाल ही में मनरेगा में एक बडा घोटाला सामने आया है और जीरो टॉरलेंस की सरकार चुप है।जी हां यह मामला है देहरादून का, जहां नेता-अधिकारी एक साथ रहते हैं और उनकी नाक के नीचे यह सब कुछ होता रहता है। इससे तो साफ है कि यह उनकी शय पर ही हो रहा होगा नहीं तो किसकी हिम्मत थी कि…! गैरसैंण राजधानी शायद इसलिए नहीं चाहिए क्योंकि वहां किसी घोटाले को अंजाम नहीं दिया जा सकता है।

समाचारों के अनुसार, देहरादून के ईस्टहोप टाउन ग्राम पंचायत क्षेत्र में मनरेगा योजना की आड़ में लाखों का एक और घोटाला सामने आया है।देहरादून जिले में मनरेगा से जुड़े घोटाले एक के बाद एक सामने आते रहते हैं लेकिन इस ओर अभी तक जीरो टॉलरेंस की दुहाई देने वाली भाजपा की मौजूदा सरकार कोई ठोस कार्रवाई करती नहीं दिख रही है। भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की लड़ाई की सच्चाई दिखाता मामला देहरादून के ईस्टहोप टाउन ग्राम पंचायत का है। यहां मनरेगा के लाखों के फंड को ठिकाने लगाने का मामला सामने आया है। जांच में मामला सही पाए जाने पर भी शासन-प्रशासन सब मौन है।

ये मामला प्रदेश की राजधानी देहरादून स्थित सचिवालय से महज 9 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ईस्टहोप टाउन ग्राम पंचायत के ठाकुरपुर गांव का है। यहां एक-दो नहीं बल्कि गांव की मुख्य सड़क से गलियों को जोड़ने वाली 6 सड़कें हैं जिनका धरातल पर कोई नामों निशान तक नहीं है लेकिन मनरेगा के तहत इसको कागजों में बनाया दिखाया गया है।शायद इस जगह पर सचिवालय में बैठे अधिकारियों की भी जमीने होंगी शायद इसलिए यहां यह घोटाला हुआ !

इतना ही नहीं जब ग्रामीणों ने मनरेगा की ऑनलाइन वेबसाइट से इसके संबंध में जानकारी निकाली तो सभी 6 गलियों की रोड का पेमेंट मस्टररोल निकल गया। जिसको देख सभी हैरान रह गए।अपने गांव में मनरेगा द्वारा जब धरातल पर कोई सड़क ना बनने की सच्चाई का ईस्टहोप टाउन पंचायतवासियों को पता चला तो इसकी जांच का शिकायत पत्र देहरादून डीएम को सौंपा गया। जिसके बाद जिला विकास कार्यालय के सीडीओ ने इस मामले की जांच सहायक परियोजना निदेशक विक्रम सिंह को दी।

विक्रम सिंह सहित सभी संबंधित अधिकारियों ने मिलकर धरातल में जाकर जांच की तो ग्रामीणों का अंदेशा सही पाया गया। जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में माना कि यहां मनरेगा योजना के तहत फर्जी मस्टररोल बनाकर लाखों का घोटाला हुआ है।ईस्टहोप पंचायत वासियों का कहना है कि जांच में घोटाला सामने आने के बाद भी ग्राम प्रधान सहित अन्य लोगों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हुई है जो हैरान करने वाला है जबकि प्रदेश में मौजूदा भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री राज्य में जीरो टॉरलेंस का दम भरते नहीं थकते।

आपको बता दें कि यह वहीं उत्तराखंड है जिसके निर्माण को लेकर लडी गयी लडाई के बारे में पूरा विश्व जानता है और राज्य बने 17 साल से भी अधिक का समय हो गया लेकिन राजधानी के नाम पर अभी तक के सत्ताधीसों की चुप्पी और राजनीति के रंग सभी ने देखे। सत्तरा और शासन का देहरादून प्रेम जग जाहिर हो गया। और साथ ही घोटालों की लंबी लिस्ट भी सभी के सामने है साथ ही यह भी कि यहां शासन में बैठे अधिकारियों में कोई भी काका, बौडा,मंगसीरू, चैतू नहीं है और यही कारण है कि यहां शासन में बैठे वो जो सदा पहाड विरोधी रहे और पहाड के नाम पर उन्हें हजारों बीमारियां घेर लेती हैं।

देहरादून में बैठकर घोटालों ो अंजाम देने और बाहरी प्रदेशों के पत्रकारों के साथ साठगाठ करने में ही मजा आता है के हाथों प्रदेश है तो यहां घोटाले नहीं होंगे तो और क्या होंगे।क्योंकि शासन में बैठे अधिकारी अगर थोडा भी पैदल चल लेंगे तो उनके पांवों में छाले पड जाते है तो वे पहाड में कैसे चढेगे और जाएंगे नहीं तो पहाड के विकास के बारें में योजनाए बनाएंगे कैसे। अधिकारियों की तानाशाही देखिए कि प्रदेश में हिमालयी सुनामी आए इतना लंबा समय हो गया और पीडित आज भी परेशान है और शासन में बैठे अधिकारियों ने सचिवालय में ही आपने लिए पुल बनवा दिया ताकी पैदल चलना प पडे। जनता है तो उसे रहनो दो।