udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news कहीं फिर तांडव न कर दें भगवान शिव !

कहीं फिर तांडव न कर दें भगवान शिव !

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 आराध्य के सामने अर्चक को जलाया ।

Kranti Bhatt
भगवान शिव के कैलाश ” श्री केदारनाथ ” में अति उत्साह हो रहा है वह ठीक नहीं ।” विजया दशमी के अवसर पर केदारनाथ में रावण का विशाल पुतला फूंकना यह भगवान शिव को क्रोधित करने की धृष्टता के समान साबित हो सकता है दुनिया में रावण जैसा शिव का परम भक्त कोई न हुआ न हो सकता है ।और न होगा ।

भगवान को प्रसन्न करने के लिए जिस महा प्रतापी रावण ने अपने सिर काट पर उनके चरणों में डाल दिये । शिव की अर्चना . भक्ति आस्था .स्वार्थ या कुछ चाहने के लिए नहीं बल्कि ” निस्वार्थ अर्चक ” के रूप करने वाला रावण जो भगवान शिव का सबसे बडा प्रिय भक्त था उसी रावण को शिव को सामने ही उनके कैलाश में जला डाला ।यह क्या किया ! अति उत्साह में कैलाश में उत्सव नुमा आयोजन भारी पड सकते हैं ।

शान्त चित . विश्व कल्याण में साधना रत्त कैलाश केदारनाथ में बैठे भगवान की साधना भंग करने की घृष्ठता के समान एक के बाद एक भंयकर कोलाहल करने वाले आयोजन हो रहे हैं यहां। यह सही संकेत नहीं ।शिव जितने भोले हैं उतने ही महा भयंकर भी ।उनके प्रिय को उन्हीं के सामने जला डाला ! भक्त और भगवान में पिता और संतान का सा रिश्ता होता है ।पिता के सामने पुत्र को जलाना भला कौन पिता सह पायेगा


केदारनाथ शान्त हिमालय है यह साधना और भक्ति व दर्शन की भूमि है ।भक्ति के प्रदर्शन . आयोजन . उत्सव की भूमि नहीं। यहाँ अधिक ऊंचे स्वर में आवाज करना भी वर्जित है । मौन रह कर या शान्त चित अथवा जय बाबा केदार का उच्चारण करते न जाने कब से यहाँ भक्त आ रहे हैं रह रहे हैं पर कुछ दिनों से…….


केदारनाथ में 2013 में हुई त्रासदी सिर्फ प्राकृतिक घटना नहीं मानवीय अपराधों और कृत्यों का परिणाम था ।फिर हो रहा है ।शिव पुराण में भगवान शिव ने स्वंय भगवान की वाणी है कि मेरे कैलाश में आकाश मार्ग न आना ।हम सब आस्था वान लोग हैं । शिव को शान्त रहने दें।भक्ति करें पर भक्ति के नाम पर प्रदर्शन करेंगे तो शिव का एक तांडव अभी देखा अगर सबक नहीं लिया तो महातांडव भी दूर नहीं ं। इस पवित्र कैलाश को शान्त रहने दें परम्पराओं मान्यताओं से छेडछाड नहीं करें तो अच्छा ।वरना ……

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