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कंपनियों को नोटिस, जीएसटी से पहले और बाद के दाम बताओ

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नई दिल्ली। जीएसटी लागू होने के बाद कई कन्ज्यूमर ड्यूरेबल, एफएमसीजी, मोबाइल हैंडसेट कंपनियों और कुछ फूड चेंस को लोकल टैक्स अथॉरिटीज ने नोटिस भेजे हैं। इन कंपनियों से जीएसटी से पहले और बाद के इनवॉइस की डिटेल्स मांगी गई हैं। बताया जा रहा है कि टैक्स विभाग ने कीमतों पर नजर रखने के लिए ऐसा किया है।

 

तमिलनाडु में एक कंपनी को वहां की टैक्स अथॉरिटीज की ओर से भेजे गए नोटिस में कहा गया, जीएसटी के तहत मार्केट प्राइसेज की स्टडी के लिए आपसे अनुरोध है कि आप अपनी टॉप कमोडिटी की सेलिंग प्राइस को प्रासंगिक फॉर्मेट में भेजें। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी में भी कंपनियों को ऐसे ही अनुरोध प्राप्त हुए हैं।

 

मामले की जानकारी रखने वाले एक शख्स ने बताया कि कुछ राज्यों में कंपनियों से फोन कॉल्स के जरिए भी यही बात कही गई है। दरअसल कुछ देशों में जीएसटी लागू होने के बाद महंगाई बढ़ी थी और सरकार ऐसी स्थिति से बचना चाहती है। मलेशिया और ऑस्ट्रेलिया ने एक मैकेनिज्म बनाया था कि जीएसटी लागू होने के बाद कीमतों में उछाल न आए।

 

भारत ने दो तरीके अपनाए हैं। एक तो कई रेट वाला जीएसटी स्ट्रक्चर बनाया गया है और दूसरा तरीका ऐंटी-प्रॉफिटियरिंग बॉडी बनाई गई है। अधिकतर वस्तुओं को जीएसटी से पहले उन पर लगने वाले टैक्स स्ट्रक्चर के पास के स्लैब या उससे निचले स्लैब में रखा गया है ताकि नई टैक्स व्यवस्था के तहत कीमतें न उछलें। इंडस्ट्री को डर है कि नोटिस भेजने की बात ऐंटी-प्रॉफिटियरिंग फ्रेमवर्क को लागू करने की शुरुआत हो सकती है।

 

सरकार ने अब तक कहा है कि ऐंटी-प्रॉफिटियरिंग का प्रावधान का मकसद यह है कि कोई मुनाफाखोरी न करे। सरकार को उम्मीद है कि इंडस्ट्री जीएसटी के तहत दाम घटने का फायदा कन्ज्यूमर्स को देगी और कीमतें नहीं बढ़ाएगी। इस प्रावधान के मुताबिक, अगर कोई कारोबारी इकाई जीएसटी के तहत टैक्स कम लगने का फायदा कन्ज्यूमर्स को नहीं देगी तो उस पर कई जुर्माने लग सकते हैं और लाइसेंस भी कैंसल हो सकता है।

 

ताजा घटनाक्रम से एक्सपर्ट्स भी खुश नहीं हैं। पीडब्ल्यूसी के लीडर (इनडायरेक्ट टैक्सेज) प्रतीक जैन ने कहा, अथॉरिटीज की ओर से इस तरह की औचक जांच नोटिफाई किए गए रूल्स के मुताबिक नहीं है। इसके चलते कंपनियों को बेमतलब के पेपरवर्क में उलझना होगा, जबकि अभी वे नए टैक्स सिस्टम के साथ तालमेल बैठाने में जुटी हैं। जीएसटी काउंसिल को इस पर ध्यान देना चाहिए और इस संबंध में उचित दिशानिर्देश जारी करना चाहिए।