udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news कानपुर में विदेशी खिलाडिय़ों के लिए भी नहीं उठता है पिच का घूंघट

कानपुर में विदेशी खिलाडिय़ों के लिए भी नहीं उठता है पिच का घूंघट

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कानपुर। न्यू जीलैंड के खिलाफ जारी 3 मैचों की वनडे सीरीज में एक पिच क्यूरेटर के स्टिंग ऑपरेशन में फंसने के बाद क्रिकेट जगत एक बार फिर सख्ते में हैं। भारत और न्यू जीलैंड के बीच  दूसरा वनडे पुणे में खेला गया था। इस मैच से ठीक पहले एक निजी चैनल ने पिच से छेड़छाड़ से जुड़ा एक स्टिंग किया। इस स्टिंग ऑपरेशन में पिच क्यूरेटर पांडुरंग सलगांवकर पिच से छेड़छाड़ की बात कर रहे थे।

 

इस स्टिंग के बाद अब कानपुर में होने वाले तीसरे वनडे के लिए यूपीसीए अधिक चौकन्ना हो गया है। पिच के आसपास किसी भी शख्स को मंडराने नहीं दिया जा रहा है। मैच से पहल ग्राउंड के एंट्री पॉइंट्स पर इतनी सख्ती है कि अब वहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता है। इसके अलावा क्यूरेटर्स की टीम मीडिया से भी बच रही है। हालांकि यूपीसीए के पिच क्यूरेटर शिवकुमार पिचके नियमों को लेकर पहले भी सख्त रहे हैं।

 

2000 के दशक में यहां पाकिस्तान की टीम 2 बार यहां मैच खेलने के लिए आई थी। दोनों बार पाकिस्तानी खिलाड़ी मैच से पहले पिच के दर्शन नहीं कर पाए थे। पहली दफा शोएब मलिक यहां सैयद किरमानी और कानपुर के सीनियर पुलिस ऑफिसर्स के साथ ग्राउंड पर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने पिच क्यूरेटर शिवकुमार से पिच का कवर हटाने को कहा था। इस पर शिवकुमार ने उन्हें पिच दिखाने से साफ इनकार कर दिया। शोएब के बाद किरमानी ने भी घूंघट उठाने को कहा, उन्हें भी जवाब न में ही मिला।

 

इसके बाद 2005 में भी वनडे सीरीज के दौरान पाकिस्तानी ऑलराउंडर शाहिद आफरीदी ने ग्राउंड स्टाफ के लिए हल्के शब्दों का इस्तेमाल कर पिच दिखाने को कहा। क्यूरेटर शिव कुमार इससे भडक़ गए और उन्होंने गुस्सा जताते हुए विकेट दिखाने से इनकार कर दिया था।