udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news कप्तान बने सुलतान: पाकिस्तान के नए 'कैप्टन' इमरान !

कप्तान बने सुलतान: पाकिस्तान के नए ‘कैप्टन’ इमरान !

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नई दिल्ली:कप्तान बने सुलतान: पाकिस्तान के नए ‘कैप्टन’ इमरान ! पाकिस्तान में नैशनल एसेंबली के चुनाव में नवाज शरीफ की पीएमएल-एन और बेनजीर भुट्टो के पति आसिफ जरदारी की पीपीपी को पस्त कर इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है।

पाकिस्तान को लेकर भारत के सामने यह सवाल रहा है कि वहां किससे बात की जाए? इमरान की संभावित ताजपोशी से कुछ वक्त के लिए यह मसला हल हो सकता है। इससे दोनों देशों के बीच प्रभावी बातचीत की राह बन सकती है। यह नहीं भूलना चाहिए कि मुंबई पर टेरर अटैक वाली रात पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी भारत में ही थे।

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बाद में खुलासा किया था कि उन्हें कुरैशी को एक मीडिया बातचीत से किनारे कर जल्द से जल्द देश से निकल जाने को कहना पड़ा था। यह और बात है कि उस घटना से शायद कुरैशी ने भी कुछ सबक सीखा और पाकिस्तान पीपल्स पार्टी छोड़कर इमरान की पीटीआई में चले गए। कुरैशी की तरह भारत ने भी सबक लिया कि उसकी बातचीत पाकिस्तान की ऐसी सरकार से हो रही है, जिसकी आवाज पाकिस्तान आर्मी के हेडक्वॉर्टर रावलपिंडी में नहीं सुनी जाती है।

यह पैटर्न लगातार बना रहा। पिछले चुनाव में धमाकेदार जीत के साथ नवाज शरीफ सत्ता में आए थे। माना गया था कि वह अब सियासी दमखम दिखाएंगे और सेना को पीछे धकेलेंगे। वह सेना की सलाह को दरकिनार कर पीएम नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में आए थे। मोदी ने इस रुख का जवाब 2015 में नवाज परिवार के एक शादी समारोह में अचानक लाहौर पहुंचकर दिया था।उम्मीद बंधी थी कि आतंकवाद पर बातचीत में प्रगति होगी।

इसके बजाय दो हफ्तों में ही जनवरी 2016 में पठानकोट एयरबेस पर टेरर अटैक हुआ और बातचीत की संभावना खत्म कर दी गई। भारत ने फिर भी पठानकोट अटैक की संयुक्त जांच पर राजी होकर कोशिश जारी रखी और शरीफ सरकार के आग्रह पर पाकिस्तान के जांच दल को बेस का दौरा भी कराया, लेकिन कुछ ही महीनों बाद पाकिस्तानी आतंकवादियों ने उरी में हमला किया, जिसमें 17 सैनिक शहीद हो गए।

भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक से जवाब दिया। शरीफ सेना से फिर हार गए। उससे पहले उनके आर्मी चीफ परवेज मुशर्रफ ने तब करगिल हमले की साजिश रची थी, जब शरीफ लाहौर में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से गले मिल रहे थे। मुशर्रफ ने फिर शरीफ का तख्ता पलट दिया। इस बार इमरान ने चुनाव के जरिए ऐसा किया।

मुशर्रफ काल में इमेज पर आई आंच से निपटने के लिए पाक आर्मी ने बड़ी कोशिश की है। उसके चेस बोर्ड पर इमरान एक अहम मूव हैं। इमरान से सेना को सहूलियत होगी और वह देश के शासन की राजनीति से खुद को कुछ दूर रख सकेगी। इस तरह इमरान से यह जानते हुए बातचीत की जा सकती है कि उनके शासन में पाकिस्तान की इंडिया पॉलिसी इस्लामाबाद के जरिए रावलपिंडी से नियंत्रित होगी।