udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news खड़ी चढ़ाई चढक़र पहुंचे पैतृक गांव जनरल रावत

खड़ी चढ़ाई चढक़र पहुंचे पैतृक गांव जनरल रावत

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कोटद्वार। थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत अपने पैतृक गांव विरमोली के उपग्राम सैंण पहुंचे। उनके गांव अभी सडक़ मार्ग से नहीं जुड़ पाया है। जनरल रावत पैदल खड़ी चढ़ाई चढक़र अपने पैतृक घर पहुंचे।

 

हालांकि वह हेलीकॉप्टर से भी गांव पहुंच सकते थे, लेकिन वह लैंसडौन में हेलीकॉप्टर से उतरकर पहले कार और फिर पैदल गांव तक पहुंचे। जनरल रावत ने करीब ढाई घंटे परिजनों संग बिताए। उन्होंने गांव के लोगों का हाल-चाल भी जाना। सैणा गांव पौड़ी जिले के द्वारीखाल विकासखंड में पड़ता है।

 

थल सेना अध्यक्ष बनने के बाद रविवार को पहली बार गांव पहुंचे जनरल बिपिन रावत के कार्यक्रम को अत्यंत गोपनीय रखा गया था। पूरे क्षेत्र में सेना पुलिस, इंटेलीजेंस, सिविल पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी तैनात थे।

 

सेना के हेलीकॉप्टर से जनरल रावत रविवार दिन में करीब 12 बजे लैंसडौन सेना मुख्यालय पहुंचे। थोड़ी देर विश्राम के बाद वह अपनी पत्नी मधुलिका रावत के साथ कार से विरमोली पहुंचे। इसके बाद गांव तक पहुंचने के लिए उन्हें करीब एक किमी खड़ी चढ़ाई चढऩी पड़ी।

 

उनकी गांव पहुंचने की सूचना पर लोग बड़ी संख्या में उमड़ पड़े। गांव पहुंचते ही ग्रामीणों और परिजनों ने उनका स्वागत किया। यहां उनके स्वागत के लिए उनके चाचा भरत सिंह रावत और हरिनंदन सिंह समेत पूरा गांव उमड़ पड़ा।

 

उन्होंने गांव को सडक़ से जोडऩे और अन्य समस्याओं के बारे में शासन-प्रशासन से बात करने का भरोसा दिलाया। जनरल रावत काफी देर तक गांव में पैदल घूमे और बचपन की यादें ताजा कीं। वे ग्रामीणों से मिले और उनकी कुशलक्षेम पूछी। इस दौरान सेना की ओर से सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे।

 

उनके चाचा भरत सिंह व हरिनंदन सिंह ने बताया कि जंगली जानवर फसलों को नष्ट कर देते हैं, जिससे लोगों ने खेती करनी छोड़ दी है। यही नहीं, धीरे-धीरे लोग गांव से भी रुखसत हो रहे हैं। इस पर जनरल रावत ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने के लिए रोजगार देने वाली योजनाओं को गांवों में लाना होगा।