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लोगों को उद्योग के माध्यम से किया जाएगा स्वरोजगार की ओर उन्मुख

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पौड़ी. वन विभाग एवं वैकल्पिक ऊर्जा विभाग द्वारा पिरूल (चीड़ की पत्तियां) अन्य प्रकार के जैर्व इंधनों से विद्युत उत्पादन नीति 2018 पर आयोजित एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला का शुभारंभ विधायक लैंसडोन महंत दिलीप रावत तथा कर्णप्रयाग के विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी तथा शासन के प्रतिनिधि मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह के आतिथ्य में राजकीय इंटर कालेज जयहरीखाल के प्रांगण में शुरू किया गया।
प्रदेश  के मा0 मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अनुपस्थिति  में मुख्य सचिव द्वारा उक्त कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने उपस्थित जन समुदाय को अवगत कराया  कि राज्य सरकार के चौपर में तकनीकि कमी के कारण मुख्यमंत्री जी इस कार्यक्रम में नहीं आ सके। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री की ओर से क्षमा याचना की। और भविष्य में इस क्षेत्र में आने का वादा किया। उन्होंने कहा कि पिरूल नीति के तहत विद्युत उत्पादन का पहला प्लांट जयहरीखाल में ही लगाये जाने की मंशा मुख्यमंत्री जी की रही है।
उन्होंने मुख्यमंत्री की ओर से जनता के आश्वासन दिया कि झारखंड राज्य के नेत्रहाट विद्यालय की तर्ज पर जयहरीखाल इंटर कालेज को भी मॉडल आवासीय विद्यालय के रूप में विकसित किया जाएगा।  उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा यह वर्ष रोजगार वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है तथा प्रदेश में पर्यटन को उद्योग का दर्जा प्राप्त होने से 2020 तक पूरे प्रदेश में लोगों को इस उद्योग के माध्यम से स्वरोजगार की ओर उन्मुख किया जाएगा।
उन्होंने लोगों से उरेडा तथा वन विभाग द्वारा आयोजित इस एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला से जानकारी हासिल कर अपना उद्योग लगाये जाने की वकालत की। मुख्य सचिव द्वारा कार्यक्रम के उपरान्त वन होम स्टे योजना के अन्तर्गत जयहरीखाल गांव में उल्लार गृह आवास का भी उद्धाटन किया। जागरूकता कार्यशाला में सचिव ऊर्जा एवं सचिव मुख्यमंत्री राधिका झा ने बताया कि कार्यशाला के माध्यम से लोगों को पिरूल से विद्युत उत्पादन की तकनीकी जानकारियां दी जाएंगी। उन्होंने बताया पिरूल के माध्यम से बायोफ्यूल, बायोडीजल, ब्रिकेट तथा कोयला बनाने की जानकारियां हासिल की जा सकती हैं। जिनसे स्वरोजगार प्राप्त हो सकेगा।
मुख्य अतिथि दिलीप रावत ने उरेड़ा एवं वन विभाग द्वारा जैर्व इंधनों से विद्युत उत्पादन नीति 2018 पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे क्षेत्र का विकास होने के साथ ही लोगों को स्वरोजगार भी प्राप्त होगा। उन्होंने खैरासैंण, सतमंुडा व सतपुली में मुख्यमंत्री की सोच के अनुरूप झील निर्माण का कार्य  तेजी से चलाया जाएगा और क्षेत्र के लोगों को इस व्यवसाय से रोजगार की ओर आकर्षित कर पलायन को रोकने का कार्य भी किया जा सकेगा।  इस अवसर पर पिरूल, चीड़ की पत्तियों से जैव ईंधनों से विद्युत उत्पादन नीति 2018 के लिए प्रकाशित पुस्तिका का विमोचन किया गया।
कार्यक्रम में जानकारी देते हुए मुख्य परियोजना अधिकारी वैकल्पिक ऊर्जा एके त्यागी ने बताया कि पिरूल की उपलब्धता पहाड़ी क्षेत्रों में काफी मात्रा में है। जिससे छह हजार इकाइयां राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में लगाई जा सकती हैं। उन्होंने बताया कि इन इकाईयों के लिए विशेष रूप से ग्राम पंचायतों, वन पंचायतों, स्वयं सेवी संस्थाओं व संगठनों एवं पंजीकृत फर्मों के माध्यम से उद्योग स्थापित किये जाएंगे। उन्होंने बताया कि वन विभाग और उरेडा विभाग इसके लिए एजेंसी निर्धारित की गई है। बताया गया कि प्रति किलोवाट विद्युत उद्योग स्थापित करने के लिए बैंक अनुदान एमएसएमई पॉलिसी के तहत लाभार्थी को उपलब्ध करायी जाएगी।
उन्होंने बताया कि 15 जनवरी से 15 जून तक चीड़ की पत्तियां गिरती हैं तथा राज्य में कुल 15 लाख मीट्रिक टन चीड़ की पत्तियों से 40 प्रतिशत चीड़ की पत्तियों का एकत्रीकरण कर जैव ईंधनों का विकास किया जा सकता है। इस अवसर पर पिरूल के एकत्रीकरण तथा उपलब्धता का तकनीकी प्रस्तुतिकरण दृश्य एवं श्रव्य के माध्यम से भी प्रदर्शित किया गया। जागरूकता कार्यशाला में  कृषि, उद्यान, डीआरडीए, वन एवं उरेडा विभागों द्वारा स्टाल लगाकर लोगों को विभागीय जानकारियां दी गई।
कार्यशाला में सचिव वित्त अमित नेगी, प्रमुख वन संरक्षक गम्भीर सिंह, भाजपा के जिलाध्यक्ष शैलेंद्र बिष्ट, जिला महामंत्री वीरेंद्र रावत, प्रदेश महामंत्री राजेंद्र अणथ्वाल समेत विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों व भाजपा के पदाधिकारी, जिला प्रशासन की ओर से जिलाधिकारी सुशील कुमार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जेआर जोशी, अपर पुलिस अधीक्षक हरीश वर्मा, पुलिस क्षेत्राधिकारी जेआर वर्मा, एसडीएम कोटद्वार राकेश तिवारी, एसडीएम लैंसडोन कमलेश मेहता समेत विभिन्न विभागों के जिलास्तरीय अधिकारी व क्षेत्रीय जनता उपस्थित रही।