udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news महाघोटालाः 150 कुंटल चावल  लेकर रुद्रपुर से ऋषिकेश आया  थ्री-व्हीलर !

महाघोटालाः 150 कुंटल चावल  लेकर रुद्रपुर से ऋषिकेश आया  थ्री-व्हीलर !

Spread the love

मैदानी सोच वाले अफसर देहरादून में एसी के कमरों में बैठकर पहाडी प्रदेश के उत्थान के लिए योजना बना रहे योजना और कर रहे है महाघोटाले!

उत्तराखंड में  खाद्य आपूर्ति विभाग में सस्ता खाद्यान्न में गड़बड़ी: 600 करोड़ रुपए से ज्यादा का सरकार को लगाया गया चूना ,नपेंगे कई अफसर!

उदय दिनमान डेस्कः महाघोटालाः 150 कुंटल चावल  लेकर रुद्रपुर से ऋषिकेश आया  थ्री-व्हीलर ! जी हां आपको याद होगा कि बिहार में ऐसा ही कुछ हुआ था सालों पहले और उत्तराखंड में भी इसकी शुरूआत हिमालयी सुनामी के बाद शुरू हो गया था। उत्तराखंड देवभूमि है और यहां कुछ भी हो सकता है। यहां सत्ता और अफसरों की ऐसी साठ-गांठ रहती है कि वह कुछ भी कर सकते हैं। सचिवालय में पत्रकारों को रोक सकते है ताकी किसी घोटाले की खबर न लग पाये और अफसर चाहे तो किसी को भी अपनी उगली पर घुमा सकते हैं। देश में भ्रष्टाचार मुक्त सरकार की बात हो रही है और प्रदेश में भी उसी दल की सरकार है और ऐसा महाघोटाला आप खुद ही सोचिए क्या होगा देवभूमि उत्तराखंड का।

 

 

उत्तराखंड में यह कोई पहला मामला नहीं है मैदानी सोच रखने वाले अफसरों की बदौलत आज तक पहाड उपेक्षित है। देहरादून में एसी के कमरों में बैठकर पहाडी प्रदेश के उत्थान के लिए योजना बन रही है वह भी मैदानी सोच वाले अफसरों द्वारा। पहाड के प्रति सोच और पहाड के दर्द को दिल में दबाए अफसरों को तो पूछा ही नहीं जाता। सत्ता के लोग हो या अफसर जनता की सेवा की शपथ लेने वाले जनता को दुत्कारते हैं और कहते हैं कि वह जनसेवक हैं। आप खुद ही सोचिए ऐसे प्रदेश में महाघोटाले नहीं होंगे तो और क्या होंगे।

 

 

चलिए आपको बताते हैं असली कहानी। उत्तराखंड में  खाद्य आपूर्ति विभाग में 600 करोड़ के घोटाले के सामने आने के बाद से उत्तराखंड में राजनीतिक सरगर्मियां बेहद तेज हैं। हालांकि, इस घोटाले से जुड़े एक अधिकारी आरएफसी कुमाऊं विष्णु सिंह धनिक पर तत्काल एक्शन लेते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उनका सेवा विस्तार रोक दिया है जबकि कई और अधिकारियों और कर्मचारियों पर जल्द ही गाज गिर सकती है।

 

दरअसल, ये मामला उत्तराखंड के कुमाऊं से जुड़ा है। यहां 600 करोड़ रुपए से ज्यादा का सरकार को चूना लगाया गया है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से पहाड़ में भेजे जाने वाले सस्ता खाद्यान्न में गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर मुख्यमंत्री ने बीती 2 अगस्त को मामले में एसआइटी जांच के निर्देश दिए थे। इस पर 4 अगस्त को योजना के तहत चावल मिलर्स से खरीदे गए चावल वितरण में हुई अनियमितताएं की जांच के लिए जिलाधिकारी उधमसिंह नगर की अध्यक्षता में एसआइटी गठित की गई थी।

 

बड़ा खुलासा करते हुए एसआइटी जांच में सामने आया है कि अनाज की खरीद फरोख्त से लेकर उसको लाने और ले जाने में भी भारी गड़बड़ी तो की ही गई साथ ही कर्मचारियों की मिलीभगत से यह अनाज ठीक से लोगों तक पहुंचा ही नहीं। एसआइटी में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) जगदीश चंद्र कांडपाल, अपर पुलिस अधीक्षक रुद्रपुर देवेंद्र पींचा, एसडीएम काशीपुर विनीत तोमर व प्रभारी अधिकारी संयुक्त कार्यालय कलेक्ट्रेट काशीपुर युक्ता मिश्र को शामिल किया गया था।

 

पांच बिंदुओं पर की गई जांच
चावल मिलर्स से खरीदे गए चावल के वितरण में विभागीय व सरकारी अधिकारियों/कर्मचारियों कितने शामिल हैं। चावल के वितरण में अधिकारी/कर्मचारियों और चावल मिलर्स स्तर से सभी नियमों का पालन हुआ या नहीं। मामले में पुलिस विभाग की संलिप्तता थी या नहीं। सरकार को हुए राजस्व नुकसान का विवरण और दोषी अधिकारी/कार्मिक का विवरण।भविष्य में इस तरह की घटना न हो, इसके संबंध में सुझाव।

 

कई दस्तावेजों का हुआ परीक्षण
जांच के दौरान बाजपुर, काशीपुर, रुद्रपुर, किच्छा के राज्य भंडारण निगम के कार्यालय व गोदाम, वरिष्ठ विपणन अधिकारियों, चावल मिल कार्यालयों, मंडी सचिवों, सहायक निबंधक सहकारी समिति, आरएफसी कार्यालय के विभिन्न अधिकारियों, कर्मचारियों तथा किसान संगठनों के प्रतिनिधियों, राइस मिलर्स के प्रतिनिधियों, धान चावल वितरण में प्रयुक्त वाहन स्वामियों, चालको से पूछताछ से संबंधित बिंदुओं पर गहन चर्चा कर जानकारी हासिल की गई। इन लोगों के बयान दर्ज किए गए। साथ ही उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों का परीक्षण भी किया गया।

 

अनाज के कई बोरे मिले गायब
एसआइटी ने इस मामले में जो चौंकाने वाले खुलासे किए हैं उसमें कहा गया है कि रुद्रपुर में अनाज के कई बोरे गायब मिले हैं। इतना ही नहीं जांच में ऐसा भी सामने आया है कि 3680 बोरों में टैग ही गलत लगे थे। साथ ही कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से धान की नीलामी या खुली नीलामी से जो बोली लगाई गई उसमे भी गड़बड़झाला हुआ।

 

काश्तकारों के नाम पर आढ़ती से खरीदा गया अनाज
एसआइटी ने अपनी जांच में पाया कि दाल की बड़ी मात्रा जो चावल मिल द्वारा सीधे काश्तकारों से खरीदी जाती है, उसको कच्चा आढ़ती के माध्यम से खरीद दिखाकर बड़ा घपला किया गया है। इतना ही नहीं धान मंडी में नीलामी के लिए भी नहीं भेजा गया।

 

आखिरकार ये पूरा घोटाला है क्या-
राज्य सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के हिसाब से राज्य खाद्य सुरक्षा योजना में 3 लाख 7692 कुंतल चावल 2310 रुपए कुंतल के हिसाब से खरीदा गया। दो साल में 71 करोड़ 7 लाख 68 हजार 520 रुपये का घपला हुआ।

 

धान खरीदने के लिए 60 रुपए प्रति बोरी की दर से 3,69,23,040 रुपए का हर साल सरकार को चूना लगाया गया है। इस मामले में ट्रांसपोर्ट को लेकर भी भारी अनियमितताएं देखी गईं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 3,07692 कुंतल चावल के वितरण में ट्रांसपोर्ट शुल्क मात्र 50 रुपये प्रति कुंतल माना जाए तो इस हिसाब से 1,53,84,600 रुपए का घपला हुआ है।

 

उत्तराखंड में हुए इस 600 करोड़ रुपए के अनाज घोटाले को लेकर एसआइटी ने सरकार को लगभग 19 देशों की अपनी रिपोर्ट दी है जिसमें कई और चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

 

एसआइटी की रिपोर्ट में सामने आया है कि रुद्रपुर से करीब 150 च्ंिटल चावल ऋषिकेश भेजा गया था। जिस वाहन में इसको भेजा गया था वो किसी बड़े वाहन का नंबर नहीं बल्कि थ्री व्हीलर का नंबर है यानी सरकारी महकमे ने ऐसा कमाल कर दिया कि 150 कुंटल चावल रुद्रपुर से ऋषिकेश यानी 225 किलोमीटर की दूरी को थ्री-व्हीलर से लाया गया है।

 

नपेंगे कई और बड़े अधिकारी
बताया जा रहा है कि एसआइटी और सरकार के निशाने पर अब कई और बड़े अधिकारी भी आ गए हैं। सरकार बहुत जल्द इस मामले में कई और अधिकारियों को भी आड़े हाथों ले सकती है। एसआइटी जांच में बड़े पैमाने पर धांधली की पुष्टि के बाद अब वरिष्ठ विपणन अधिकारी, विपणन अधिकारी और राज्य भंडार निगम के गोदाम प्रभारियों पर गाज गिर सकती है। वहीं मंडी में पिछले साल धान खरीद में बड़ा खेल पकड़े जाने के बाद मंडी सचिव और विपणन निरीक्षक भी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं।