udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news मैली गंगा को देखो नमो गंगा के रखवालों!

मैली गंगा को देखो नमो गंगा के रखवालों!

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देहरादून। गौला ,कोसी,राम गंगा,जैसी नदियां शिवालिक पुत्री है लेकिन ये गंगा सखी भी है, गौला और कोसी बरेली जिले में जाकर राम गंगा में और रामगंगा बदायूं जिले में गंगा में सम्माहित हो जाती है, तो क्या नमो गंगे योजना इन नदियों के लिए नही होनी चाहिए?

 

कुछ अरसा पहले उत्तराखंड के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कई पेपर मिलो और फैक्टरियों को बंद भी करवाया था कि इनका कचरा गंगा में इन्ही नदियों से पहुंच रहा है।

 

यदि ऐसा है तो उत्तराखंड सरकार को गौला रामगंगा और कोसी जैसी नदियों के आसपास कचरे सीवर से बचने की योजना को नमो गंगे योजना का हिस्सा बनना चाहिए।

 

उल्लेखनीय है कि खाली गंगा को साफ करके गंगा साफ नही हो जाने वाली, उत्तराखंड से निकलने वाली हर छोटी बड़ी नदी की पानी की धारा को साफ रखना होगा,

 

हाल ही में वाइल्डलाइफ ऑफ इंडिया की एक रिसर्च में भी ये बात सामने आई है कि अविरल बहने वाली नदियो के किनारे बसे शहर कस्बे गांव भी गंगा के पठार का हिस्सा है, भू गर्भ वैज्ञानिक पदम विभूषण प्रो खडक़ सिंह वाल्दिया कहते है कि दुनिया के सबसे प्रदूषित क्षेत्रो में अब गंगा का पठार जमुना की सभ्यता वाला क्षेत्र शामिल हो गया है

 

जिसकी गैसों से प्रदूषण से हिमालय और शिवालिक में मौसम के बदलाव हो रहे है कहीं तेज गर्मी तो कभी तेज बारिश से बादल फट रहे है। जिस तरह से गौला नदी किनारे कूड़ा डाला जारहा है,सीवर डाला जा रहा है वो गंगा तक पहुंच रहा है,

 

ये बात हम नही डब्लू डब्लू एफ की रिपोर्ट में सामने आया है। बरहाल उत्तराखंड सरकार ये भी योजना बनाये कि हमारी नदियां बारहो महीने साफ सुथरी रहे वो गंदे नालो में तब्दील न हो।