udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news कब्र खोदकर बेटियों को पाल रही है महिला

कब्र खोदकर बेटियों को पाल रही है महिला

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बेंगलुरु । कब्र खोदने की अपनी नौकरी के पहले दिन ही चनम्मा, लाश देख डरकर भाग गई थी लेकिन वह फिर वापस आईं, अपनी बच्चियों की खातिर। आज उन्हें ये नौकरी करते हुए 13 साल हो गए हैं और इस बीच वह 5 हजार लाशों को दफना चुकी हैं।

 
श्रीरामपुरा में हनुमन्तपुरा हिंदू ब्यूरियल ग्राउंड में एक कब्र खोदने वाली और लाशें दफनाने वाली 43 वर्षीय चनम्मा ने ऐसा पेशा अपनाया है जहां महिलाएं बहुत कम देखने को मिलती हैं।चनम्मा अंग्रेजी कन्नड़ और हिंदी समेत 5 भाषाओं में बात कर सकती है। चनम्मा को यह जानकर खुशी के साथ आश्चर्य भी हुआ कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस जैसा भी कोई दिन होता है।

 

वह कहती हैं कि उनके लिए खुशी का पल वह होगा जब वह अपनी चौथी बैटी को सेटल्ड देखेंगी और उसकी शादी करा लेंगी। चनम्मा का कहना है कि वह इस पेशे में सिर्फ अपनी बेटियों को पालने के लिए आई थीं। पति की मौत के बाद चनम्मा ने यह नौकरी करने का फैसला अपनाया।चनम्मा ने 1987 में गणेश से शादी की थी, जो कि लाशों को दफनाने का ही काम करते थे। 2000 में पति की मौत के बाद उनकी दुनिया ही बदल गई और घर चलाना मुश्किल हो गया। बीबीएमपी आयुक्त से नौकरी का आवेदन करने पर उन्हे 12 दिसंबर 2003 में नौकरी पर रख लिया गया।

 
चनम्मा ने बताया, मैं पहली बार लाश को देखकर डर गई और चीखते हुए भाग गई। लेकिन फिर दूसरा कोई विकल्प न होने की वजह से मजबूरी में यह काम करना पड़ा। मैं कई दिनों तक भूखा नहीं सो सकती थी।चिनम्मा ने बताया कि वह पिछले 13 वर्ष से यह काम कर रही हैं और अब यह काम छोडऩा नहीं चाहतीं। वह इसे अब काम या नौकरी नहीं बल्कि सेवा के तौर पर देखती हैं।