udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news मुद्रा संकट: सबसे अमीर देश में नोट गिनकर नहीं तोलकर लेते हैं दुकानदार !

मुद्रा संकट: सबसे अमीर देश में नोट गिनकर नहीं तोलकर लेते हैं दुकानदार !

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वेनेजुएला: मुद्रा संकट: सबसे अमीर देश में नोट गिनकर नहीं तोलकर लेते हैं दुकानदार ! वेनेजुएला में तेल के कई भंडार मौजूद थे और यह अमीर देश में शुमार होता था, लेकिन फिर तेल के दामों में उतार चढ़ाव, मुद्रा संकट और सरकार की गलत नीतियों ने ने इस देश को मुश्किल में धकेल दिया.

एक बर्गर की कीमत 50 लाख! यहां नोट गिनकर नहीं तौलकर लेते हैं दुकानदार वेनेजुएला में तेल के कई भंडार मौजूद थे और यह अमीर देश में शुमार होता था, लेकिन फिर तेल के दामों में उतार चढ़ाव, मुद्रा संकट और सरकार की गलत नीतियों ने ने इस देश को मुश्किल में धकेल दिया.

कभी आपने सोचा है कि आपको किसी दुकान से समान खरीदने के बदले नोटों को गिनकर देने की बजाय तोलकर देना पड़े तो… आजकल कुछ ऐसा ही अमेरिकी महाद्वीप के एक देश वेनेजुएला में हो रहा है. अब सवाल उठता है कि इस देश में क्यों ऐसा किया जा रहा है.

 

दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में लोग इन दिनों महंगाई की मार से परेशान हैं. वेनेजुएला में महंगाई दर 10 लाख फीसदी तक बढ़ चुकी है, जिस कारण वहां रोजमर्रा की चीज़ों के दाम कई गुना बढ़ गए हैं. कभी दक्षिण अमेरिका के सबसे अमीर देशों में से एक रहे वेनेजुएला की इस हालत के पीछे गलत सामाजिक प्रयोग जिम्मेदार रहे हैं.

 

इस देश की अर्थव्यवस्था अब इतने बुरे दौर में पहुंच चुकी है कि हर दिन पांच हजार लोग दूसरे देशों की तरफ पलायन कर रहे हैं. यहां के पेशेवर अब अस्पताल और विश्वविद्यालयों को छोड़कर जा रहे हैं. स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेनुजुएला में वकालत की पढ़ाई कर चुके लोग अब मजदूर या सेक्स वर्कर के तौर पर काम करने के लिए मजबूर हैं. वहीं बताया जा रहा है कि ब्यूरोक्रेट स्तर के अधिकारी घरों में काम कर रहे हैं.

 

वेनेजुएला संकट की वजह से त्रिनिदाद और टोबैगो के सामने भी परेशानी खड़ी हो गई है, क्योंकि सबसे अधिक शरणार्थी इन्हीं दो देशों में शरण लेने के लिए पहुंच रहे हैं. हालांकि इन दोनों देशों की स्थिति भी ऐसी नहीं कि ये वेनेजुएला के लोगों को अपने देश में शरण दे सकें. इस वजह से सीमा पर मानव तस्करी की शुरुआत भी हो चुकी है.

 

बता दें कि 1950 से 1980 के दशक तक वेनेजुएला आर्थिक रूप से सशक्त देश था. यहां तेल के कई भंडार मौजूद थे और यह इटली व स्पेन जैसे देशों के प्रवासियों के लिए प्रकाशस्तम्भ के समान था, लेकिन फिर तेल के दामों में उतार चढ़ाव, मुद्रा संकट और सरकार की गलत नीतियों ने ने इस देश को मुश्किल में धकेल दिया.

 

1999 में ह्यगो शावेज देश के राष्ट्रपति बने, जिनकी समाजवाद की नीति ने कई व्यवसायों को तबाह कर दिया. कुछ व्यवसायों को राष्ट्रीयकृत कर दिया गया. राज्य द्वारा संचालित तेल उद्योग से हजारों श्रमिकों को हटा दिया गया, जिन्हें राजनीतिक समर्थकों द्वारा प्रतिस्थापित किया गया था जिन्हें कोई तकनीकी अनुभव नहीं था.

 

2013 में पहले बस ड्राइवर और फिर यूनियन लीडर निकोलस मादुरो देश के राष्ट्रपति बने, जिनके आने के बाद देश की अर्थव्यस्था की हालत और खराब हो गई. अमेरिका और यूरोप के कई देशों ने वेनेजुएला से तेल खरीदने पर प्रतिबंध लगा रखा है, जिस कारण वहां की तेल बिक्री न के बराबर हो गई है. राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के अनुसार वेनेजुएला पर लगे प्रतिबंधों की वजह से ही देश की अर्थव्यस्था की हालत खराब हुई है.