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मुख्य सचिव ने की ऑल वेदर रोड की प्रगति की समीक्षा

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देहरादून। भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ऑल वेदर रोड की प्रगति की समीक्षा बैठक सचिवालय में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई। मुख्य सचिव ने चारधाम हेतु स्वीकृत लागत लगभग 11,700 करोड़ के सात पैकेजों यथा ऋषिकेश-रूद्रप्रयाग 140 किमी., रूद्रप्रयाग-माणा 160 किमी, ऋषिकेश-धरासू 144 किमी., धरासू-गंगोत्री 124 किमी., धरासू-यमुनोत्री 95 किमी., रूद्रप्रयाग-गौरीकुण्ड 76 किमी., टनकपुर-पिथौरागढ़ 150 किमी. की पैकेजवार सम्बन्धित जिले के जिलाधिकारियों से वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से समीक्षा की।

 

मुख्य सचिव द्वारा सडक खुदान से निकलने वाले मलबे को सुनियोजित ढ़ंग से नियमानुसार निस्तारण करने के निर्देश दिए गये और कार्यदायी संस्थाओं को निर्देशित किया गया, कि किसी भी दशा में मलबा नदी क्षेत्र में न डाला जाये। उन्होंने निविदा में दी गयी शर्तो के अनुसार मग डिस्पोजल चिन्हित डंपिंग जोन में करने के निर्देश कार्यदायी संस्थाओं को दिये तथा इस पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश जिलाधिकारियों को दिये।

 

उन्होंने परियोजना का कार्य कर रही एजेन्सियों एनएच लो.नि.वि., सीमा सडक़ संगठन, एनएचआई डीसीएल एवं सडक़ एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा संचालित किये जा रहे स्वीकृत 37 परियोजना कार्यों, जिनमें 22 कार्यों में कार्य प्रगति पर है, को युद्ध स्तर पर पूरा करने के निर्देश सम्बन्धित प्रतिनिधि अधिकारियों को दिये। उन्होंने ऑल वेदर रोड में अवशेष कार्यों की स्वीकृति के लिये शीघ्र तिथि निर्धारण के निर्देश दिये।

 

समीक्षा के दौरान अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने बताया, कि परियोजना में 80 प्रतिशत भूमि हस्तान्तरण एवं 81 प्रतिशत वन भूमि हस्तान्तरण की कार्यवाही पूर्ण कर ली गयी है। उल्लेखनीय है कि उक्त 889 किमी. की इस महत्वाकांक्षी चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना में 632 किमी. के कार्यों की स्वीकृतियां प्राप्त हो गयी है। समीक्षा में परियोजना में शामिल 94 किमी. सडक़ मार्ग जो भागीरथी सेन्सटिव जोन में है, पर आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश वन विभाग को दिये गये।

 

मुख्य सचिव श्री सिंह ने बैठक में कार्यदायी संस्थाओं से यूटिलिटि शिफ्टिंग में आ रही परेशानियों के सम्बन्ध में विस्तार से चर्चा की तथा इस कार्य हेतु सम्बन्धित विभाग यथा उत्तराखण्ड पॉवर कॉरपोरेशन, पेयजल विभाग आदि को युद्ध स्तर पर यूटिलिटि शिफ्टिंग कार्य पूरा करने के निर्देश दिये ताकि चारधाम यात्रा में यात्रियों/पर्यटकों को यातयात, पेयजल आपूर्ति, विद्युत आपूर्ति में असुविधा का सामना न करना पडे।

 

उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने इस परियोजना से जुडे 13 पैकेज और स्वीकृत कर दिये हैं, जिन में टेंडर की कार्यवाही गतिमान है। उन्होंने अवगत कराया कि ईको सेंसटिव जोन से सम्बन्धित मामलों में मॉनिटिरिंग कमेटी का गठन कर दिया गया है। उन्होंने परियोजना का कार्य कर रही सम्बन्धित कार्यदायी संस्थाओं को निर्देश दिये कि प्रभावित प्रकरणों को मॉनीटिरिंग कमेटी के समक्ष लाया जाये।

 

विद्युत लाईन शिफ्टिंग की समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव द्वारा परियोजना में चिन्हित अवशेष विद्युत लाईन तथा विद्युत पोल शिफ्टिंग कार्य 20 अप्रैल तक करने के निर्देश दिये है। समीक्षा के दौरान पॉवर कॉरपोरेशन के अधिकारी द्वारा अवगत कराया गया, कि एनएच 125 परियोजना में चिन्हित समस्त पोल का प्रतिस्थापन किया जा चुका है, जबकि एनएच 94 परियोजना में आगामी सप्ताह में अवशेष 19 पोलों को प्रतिस्थापित कर दिया जायेगा तथा एनएच 58 में 1146 चिन्हित पोलों में से 814 विद्युत पोल प्रतिस्थपित किये जा चुके हैं, अवशेष में कार्य युद्ध स्तर पर पूरा कर लिया जायेगा।

 

पेयजल की समीक्षा के दौरान जल संस्थान के महाप्रबंधक इंजीनियर एस.के. शर्मा द्वारा बताया गया कि परियोजना के निर्माण से प्रभावित 24 पेयजल योजनाओं में साइट की आवश्यकतानुसार पेयजल के सुचारू रूप से चलाने हेतु अस्थाई पेयजल लाईन की व्यवस्था की गयी है। इस अवसर पर तकनीकी सलाहकार इंजीनीयर लो.नी.वि. आर.पी.भट्ट, प्रभारी सचिव राजस्व विनोद रतूडी, एमडी पेयजल निगम भजन सिंह, अपर सचिव पेयजल अर्जुन सिंह, मुख्य अभियंता यूपीसीएल एम.एल.प्रसाद, मुख्य अभियन्ता(रा.मा.) हरिओम शर्मा, अनुसचिव लो.नि.वि. डी.के.पुनेठा, अनुभाग अधिकारी एस.डी. बेलवाल तथा सीमा सडक संगठन के अधिकारी सहित सम्बन्धित अधिकारी उपस्थित थे।