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मुख्यमंत्री जी जनता तड़प रही है, कुछ करिये !

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108 आपातकालीन सेवा सुचारू करने के लिए जन अधिकार मंच ने मुख्यमंत्री को भेजा पत्र

रुद्रप्रयाग: मुख्यमंत्री जी जनता तड़प रही है, कुछ करिये !108 आपातकालीन सेवा सुचारू करने के लिए जन अधिकार मंच ने मुख्यमंत्री को भेजा पत्र . प्रदेश में इस सेवा के क्या हाल है आप सभी जानते हैं। ऐसे की पहले कुछ केसों पर नजर दौढ़ाते हैं।

केस : 1 108 आपातकालीन सेवा में ऑक्सीजन न होने से पौड़ी जिले के रिखणीखाल ब्लॉक अन्तर्गत सुंद्रोली गांव के प्रधान हुकुम सिंह रावत (55) वर्ष की मौत हो गई थी।

केस : 2 नौगांव में प्रसव पीड़िता दर्द से तड़पती रही, इसके बावजूद 108 आपातकालीन सेवा नहीं पहुंची। तीमारदार प्रसूता को प्राइवेट वाहन में अस्पताल ले गये। जहां डॉक्टरों ने बताया कि पीड़िता को अस्पताल पहुंचाने में थोड़ी भी देर होती तो उसकी जान चली जाती।

108 आपातकालीन सेवा के बंदी के कगार पर पहुंचने से हर रोज इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं। स्थिति यह हो गई है कि मरीजों और घायलों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है।
जिससे उनकी जान पर बन आ रही है। इस संबंध में जन अधिकार मंच ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है।

आगामी सात सितम्बर तक 108 को मिला छह माह का एक्सटेंशन पूरा होने जा रहा है। जिसके बाद संचालन कंपनी जीवीके ईएमआरआई ने आगे काम करने से हाथ खड़े कर दिये हैं। ऐसे में अगले माह 108 के पहिये थम सकते हैं। प्रदेश में 2008 में 108 सेवा का संचालन शुरू किया गया था।

उस समय प्रदेश सरकार ने दस साल के लिए जीवीके ईएमआरआई से करार किया था। इस सेवा से प्रदेशवासियों को खासी सहूलियत मिली। खासतौर पर पर्वतीय क्षेत्रों में प्रसव आदि में यह सेवा अहम भूमिका निभाती है। वर्तमान में 108 सेवा के पास 139 एम्बुलेंस हैँ, जबकि 95 खुशियों की सवारी है।

इसी वर्ष 8 मार्च को जीवीके ईएमआरई का सरकार के साथ दस साल का करार खत्म हो गया था, जिसके बाद सरकार ने कंपनी को छह माह का एक्सटेंशन दिया था। इस बीच कंपनी ने स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र भेजकर अवगत कराया है कि आगे इस सेवा का संचालन नहीं कर पायेंगे।

इसका कारण बार-बार बजट को लेकर हो रही दिक्कत माना जा रहा है। 108 के रखरखाव, ईंधन और संचालन के लिए सालाना 22 करोड़ का बजट तय है। पैसा न मिलने से ईंधर, गाड़ियों का रख-रखाव और कर्मचारियों का वेतन नहीं मिल पा रहा है।

रुद्रप्रयाग जिले में मुख्य रूप से चार लोकेशनों रुद्रप्रयाग, जखोली, अगस्त्यमुनि और गुप्तकाशी में 108 आपातकालीन सेवा संचालित की जाती है। इसके अलावा यात्राकाल में तीन अन्य लोकेशन बसुकेदार, फाटा व सोनप्रयाग में 108 एम्बुलेंस सेवा का संचालन किया जाता है।

जननी सुरक्षा योजना अन्तर्गत जच्चा-बच्चा को सुरक्षित घर तक छोड़ने के लिये जिले में पांच खुशियों की सवारी हैं, जिनमें रुद्रप्रयाग में दो, जखोली, अगस्त्यमुनि और फाटा में एक-एक वाहन संचालित किया जा रहा है। 108 सेवा और खुशियों की सवारी की अत्यंत खराब है। तकनीकी खराबी और अन्य कारणों के कारण 108 सेवा बंद पड़ी है।

खुशियों की सवारी वाहन भी टायर न होने और अन्य खराबी आने के कारण बंदी की कगार पर पहुंच गई हैं। स्टॉफ की कमी के चलते कर्मचारी एक ही शिफ्ट में काम कर रहे हैं। अब जबकि आपदा के कार्यों के लिए भी 108 सेवा को अधिकृत किया गया है और उसे काफी प्रचारित भी किया गया है, इस सेवा के ठप हो जाने से पूरा तंत्र ही डगमगा गया है।

मोहित डिमरी जी की वाल से साभार