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 नेशनल हाइवे पर बने 23 पुल और सुरंग 100 साल पुराने

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नई दिल्ली। अगर आप राष्ट्रीय राजमार्ग पर बने पुल या सुरंग के नजदीक रहते हैं, तो सावधान हो जाइए। राष्ट्रीय राजमार्गों पर बने 23 पुल और सुरंग 100 साल से भी पुराने हैं। इनमें से 17 को नवीनीकरण या बड़े रखरखाव की आवश्यकता है।

 

देश के 123 अन्य पुलों को तत्काल ध्यान देने की जरूरत है और 6,000 संरचनात्मक रूप से ठीक नहीं हैं। केंद्रीय सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के तहत बनी भारतीय पुल प्रबंधन प्रणाली (आईबीएम) परियोजना द्वारा किए गए विश्लेषण में ये चौंकाने वाले निष्कर्ष सामने आए हैं।

 

भारत के पुलों और सुरंगों की जांच के लिए ये पहला सर्वेक्षण ‘पुलों का स्वास्थ्य’, पिछले वर्ष शुरू किया गया था। हाल ही में सर्वेक्षण के नतीजे सामने आए हैं। एक सदी से पुरानी संरचनाओं में गुजरात के भरूच में नर्मदा पुल शामिल है। इसके अलावा दो मध्य प्रदेश के टिकमगढ़ में और एक-एक कर्नाटक के गुलबर्गा और महाराष्ट्र के कोल्हापुर व पिम्री चिंचवड में हैं।

 

इन सभी को फिर से बनाने या प्रमुख रखरखाव की आवश्यकता है। अध्ययन के बाद मंत्रालय ने पाया है कि भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर पुलिया, छोटे व प्रमुख पुलों और फ्लाईओवर सहित लगभग 1.6 लाख संरचनाएं हैं। प्रत्येक संरचना को अब इस परियोजना के तहत एक पहचान संख्या देने का काम चल रहा है।

 

सूत्रों ने बताया कि राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंत्रालय, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और राज्य सार्वजनिक विभागों (जो राष्ट्रीय राजमार्गों का प्रबंधन करते हैं) से तात्कालिक ध्यान देने की आवश्यकता वाली संरचनाओं पर तत्काल मरम्मत या पुनर्वास कार्य करने के लिए कहा है।

 

वहीं एक मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘मंत्रीजी ने कहा कि अगर पुल की मरम्मत या मजबूत करने की लागत पुल बनाने की लागत से 30 फीसद से अधिक है, तो पुल फिर पुल का निर्माण किया जाए। गौरतलब है कि हाइवे मिनिस्ट्री ने 2016 में आईबीएमएस की शुरुआत तब की थी, जब उन्हें पता चला कि देशों में पुलों की कोई केंद्रीय सूची है ही नहीं। इसलिए पुलों की मरम्मत और रखरखाव के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।