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राज्यों के सहयोग से साकार होगा न्यूू इंडिया का सपना : प्रधानमंत्री

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पर सहमति ‘एक देश, एक आकांक्षा, एक प्रतिबद्धता’ की भावना को दर्शाती है। एक आधिकारिक बयान में मोदी के हवाले से कहा गया है, कि जीएसटी पर सहमति इतिहास में सहकारिता संघवाद का उदाहरण है। जीएसटी एक राष्ट्र, एक आकांक्षा, एक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। नीति आयोग संचालन परिषद की तीसरी बैठक के उद्घाटन भाषण में मोदी ने कहा कि जीएसटी संघीय ढांचे की ताकत को दिखाता है।

 

मोदी ने जीएसटी को लेकर एक मंच पर आने के लिए सभी मुख्यमंत्रियों को श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्रियों ने इसमें अपने वैचारिक और राजनीतिक मतभेदों को अलग रखा। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 13 अप्रैल को जीएसटी पर चार महत्वपूर्ण कानूनों को मंजूरी दी है। सरकार का इरादा इस नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को एक जुलाई से लागू करने का है। विपक्ष शासित राज्यों में से पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई. के. पलानीसामी बैठक में शामिल हुए।

 

 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, हरियाणा सीएम मनोहर लाल खट्टर, जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक भी मौजूद रहे। इनके अलावा केंद्रीय मंत्रियों में नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह, सुरेश प्रभु, प्रकाश जावडेकर, राव इंद्रजीत सिंह तथा स्मृति ईरानी बैठक में शामिल हुए।बैठक को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि देश में बदलाव के लिए नीति आयोग नए तरीके से काम कर रहा है। पीएम ने कहा कि नीति आयोग सरकारी इनपुट्स पर आधारित नहीं है। साथ ही जीएसटी पर चर्चा करते हुए कहा कि आम सहमति से एक ऐसा कानून बनाया गया जो इतिहास रचेगा।

 

 

नीति आयोग के वाइस चेयरमैन अरविंद पनगडिया तेजी से बदलते भारत के रोडमैप पर एक प्रेजेंटेशन भी दिया। बता दें कि सरकार ने पंचवर्षीय योजनाओं को खत्म कर दिया है। ऐसे में इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक अब तीन वर्षीय योजना लागू की जाएगी। साथ ही किसानों की दोगुनी आय पर भी विचार किया जाएगी। हालांकि ये अभी भी साफ नहीं है कि गरीबी पर टास्क फोर्स लाया जाएगा। इसस पहले साल 2015 में नीति आयोग की बैठक हुई थी।

 
ममता-केजरीवाल नहीं हुए शामिल
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आज यहां शुरू हुई नीति आयोग संचालन परिषद की बैठक में शामिल नहीं हुए। परिषद की तीसरी बैठक राष्ट्रपति भवन में चल रही है। बैठक का मुख्य एजेंडा देश की आर्थिक वद्धि को प्रोत्साहन के लिए 15 साल के दष्टि दस्तावेज पर विचार करना है। एक सूत्र ने कहा कि ममता और केजरीवाल बैठक में शामिल होने के लिए राष्ट्रपति भवन नहीं आए हैं। सूत्र ने कहा कि बैठक में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया शामिल हुए हैं। सूत्र ने कहा कि बड़ी संख्या में मुख्यमंत्री इस बैठक में इसलिए शामिल हुए हैं क्योंकि प्रधामंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनके आधिकारिक प्रतिनिधियों को विचार विमर्श के लिए बैठक में शामिल होने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।

 
मुफ्ती और योगी भी रहेंगे मौजूद
जम्मू कश्मीर के बिगड़ते हालातों पर चर्चा की जाएगी। दिल्ली में वो प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार के दूसरे वरिष्ठ मंत्रियों से भी मुलाकात करेंगी। पीडीपी-बीजेपी गठबंधन में चल रहे मतभेदों पर चर्चा होगी। महबूबा मुफ्ती केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से भी मुलाकात करेंगी। काउंसिल की पहली बैठक 8 फरवरी 2015 में हुई थी। दूसरी बैठक 15 जुलाई को हुई थी। नीति आयोग को साल 2030 तक तेज आर्थिक विकास के लिए दस्तावेज तैयार करने को भी कहा गया है।