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पंजाब नैशनल बैंक: क्रेडिट और डेबिट कार्ड यूजर्स का डेटा लीक !

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मुंबई । पंजाब नैशनल बैंक ने अपनी आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर में किसी भी तरह के डेटा लीक से इनकार किया है। विदेशी अखबार में छपी एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पीएनबी के 10 हजार क्रेडिट और डेबिट कार्ड यूजर्स का डेटा लीक हुआ है। पीएनबी ने 11,300 करोड़ रुपये के नीरव मोदी घोटाले की जांच के लिए प्राइसवॉटरहाउसकूपर्स को सौंपने की खबरों को भी खारिज किया है।

 

स्टॉक एक्सचेंज को जारी बयान में बैंक ने 10 हजार क्रेडिट और डेबिट कार्डहोल्डर्स की डिटेल्स ऑनलाइन लीक होने वाली खबरों को खारिज किया। बैंक ने कहा, बैंक की इन्फ्रास्ट्रक्चर सिक्यॉरिटी काफी मजबूत है और बैंक ने सभी जरूरी तकनीकी कदम उठा कर कस्टमर के डेटा को सुरक्षित किया हुआ है। गुरुवार को कुछ रिपोर्ट्स में इन्फॉर्मेशन सिक्यॉरिटी फर्म क्लाउडसेक के हवाले से दावा किया गया था कि क्रेडिट और डेबिट कार्ड यूजर्स का डेटा ऑनलाइन लीक हुआ है।

 

न्यूज वेबसाइट एशिया टाइम्स ने चीफ टेक्निकल ऑफिसर राहुल शशि के हवाले से लिखा था, हमारा एक क्रॉलर डार्क वेब में लगा हुआ है। ये इंटरनेट की वह साइटें हैं जो गूगल और अन्य बड़े सर्च इंजन में नहीं मिलेंगी। ये साइटें गैर-कानूनी रूप से संवेदनशील डेटा खरीदने और बेचने का काम करती हैं।

 

राहुल ने बताया कि क्रॉलर ऐसा डेटा पहचान लेता और इसे एक ऐसे सॉफ्टवेयर को भेजता है जो संदेहजनक डेटा अलग करता है। बता दें कि क्रॉलर एक विशेष तरह से डिजाइन्ड प्रोग्राम होता है जिसका काम डेटा और इन्फॉर्मेशन रीड कर ब्राउजर में इंडेक्स करना होता है।

 

डार्क वेब का इस्तेमाल वर्ल्ड वाइड वेब के उस पार्ट के लिए होता है जिसे केवल स्पेशल सॉफ्टवेयर के जरिए ही एक्सेस किया जा सकता है और इसमें यूजर्स की न तो पहचान जाहिर होती है न ही लोकेशन। यह वह डोमेन है जो गैर-कानूनी ऑनलाइन कामों के लिए यूज होता है। डार्क वेब में बिक रहे डेटा में कार्डहोल्डर्स के नाम, एक्सपायरी डेट, फोन नंबर्स और सीवीवी शामिल है।

 

पीएनबी ने नीरव मोदी घोटाले में ऑडिटर प्राइसवाटरहाउसकूपर्स को जांच सौंपने से इनकार करते हुए कहा कि उसने फरेंसिक ऑडिट की प्रक्रिया शुरू कर दी है और बड़ी ऑडिट फर्म्स से संविदाएं मंगवाई गई हैं। ये फर्म्स नीरव मोदी के खातों का ऑडिट करेंगी।