udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news परमिला या प्रमिला या ये जिंदादिल शहर- देहरादून !

परमिला या प्रमिला या ये जिंदादिल शहर- देहरादून !

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जेपी मैठाणी
देहरादून। ये शहर बेहद सुंदर है , इंसान भी बेहद सुंदर – यहाँ जहां जीवन की आपा धापी में हम अपने लोगों को अपने साथ नहीं रख पाते वहीँ दूसरी ओर सरस्वती जाग्रति स्वयं सहायता समूह सामाजिक संस्था की अध्यक्ष श्रींती पूजा तोमर और ई रिक्शा चलाने वाली Shelley Kamboj जैसी कुछ जिंदादिल महिलाएं है , जो दूर उत्तरकाशी की प्रमिला – जिसे घर परिवार ने मानसिक स्वास्थ्य ठीक ना होने से सही ढंग से नहीं रखा अब वो Shelley Kamboj के घर परिवार में-सहस्त्रधारा रोड के राजेश्वर नगर फेज -I, में हंसी ख़ुशी रह रही है.

अपनों से दूर – परायों के बीच बेहद अपनापन- सामाजिक ताने बाने का एक विस्तृत फलक है . पहाड़ का एक पूरा गाँव – गाँव में रिश्तेदार और पास पड़ोसी – और जनप्रतिनिधि ये सब ना प्रमिला को भरपेट भोजन दे पाए और ना ही प्यार और स्नेह . प्रमिला के पति की अधिक शराब पीने से मौत हो गयी और शायद एक बेटी की असमय निधन से प्रमिला के जीवन में मानसिक पीड़ा की शुरूआत हुई और आज वो इस स्तर तक पहुँच गयी थी की गाँव में उसको रस्सी से बाँध कर रखा जाता था.

मैंने पूछा बहुत – पर जवाब कम मिले – पर जो जवाब मिले वो ये थे की सास ने बहुत मारा – लकड़ी लाते हुए गिर गयी जिसके निशाँ आज भी दाहिने घुटने पर ताजे से लगते हैं ,पीठ पर घाव हैं सर में काफी परजीवी हैं . पर शेली की हिम्मत देखिये प्लास्टिक के टब में गरम पानी – थोडा ईजी और शैम्पू के घोल में – पुराने ब्रश से प्रमिला के पाँव धो रही है – कृष्ण – सुदामाँ का प्रसंग याद आ गया , प्रमिला मुस्कुरा रही है – बुवा के पास रह रही बेटी- छुटकी को ज्यादा याद कर रही है और ताऊ के पास ब्रह्म खाल में रह रहे बेटे को कम !

 

मैंने कहा मेरा घर पीपलकोटी है बोली बद्रीनाथ के रास्ते में – मैं पाने पिताजी के साथ गयी थे बद्रीनाथ पर अब पिताजी नाराज हैं . गाँव में दो बैल, धान की रोपाई – लबरा छोरी का गीत, कमर ढसका के नाच – सब उड़ेल रही है सारी बातें – नए बिस्तर पर सिरहाने – हैण्ड टोवल छुपा के रखा है – मेरे साथ काफी पीते हुए बहुत सारी बातें हुई – प्रमिला की ! पूरा परिवार तीन चार दिन से सेवा कर रहा है ! इसी शहर में सैकड़ों बुजुर्ग और परिजन बिना सहारे के दर दर भटक रहे हैं, दूसरी ओर प्रमिला के मानों पर उड़ान की दिशा में हैं …

शहर का सूरज – दोस्तों की ऊष्मा और साथ रहने की प्रेरणा के साथ – डूबने को हैं ( कल फिर उगेगा नयी ऊष्मा और उर्जा के साथ ) .मैं घर को लौटा हूँ …Shelley Kamboj के बेटा, बेटी को धन्यवाद देते हुए …सच में देहरादून खूबसूरत और आत्मीय लोगों का शहर है- परमिला को पराया न समझने वाले ….समाज का – सूरज की उष्मा से भरा शहर !!.