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फिक्स डिपॉजिट: सुरक्षा, सहूलियत सेविंग का लाभ

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नई दिल्ली। आर्थिक रफ्तार में सुधार के बीच बढ़ते कर्ज की मांग और म्यूचुअल फंड्स व बॉन्ड यील्ड से मिल रही कड़ी टक्कर के चलते बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने अपने फिक्स डिपॉजिट (एफडी) पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी शुरू कर दी है। साथ ही उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए बैंकों ने एफडी पर कुछ सहूलियतें देनी भी शुरू की हैं।

जैसे एसबीआई ने अपने निवेशकों को बिना एफडी तोड़े पैसे निकालने का विकल्प दिया है। ऐसे में अब एफडी में पैसे लगाना सुरक्षित निवेश के साथ सहूलियत और बेहतर सेविंग के तिहरे लाभ का मौका दिलाता है। पेश है हिन्दुस्तान टीम की रिपोर्ट। जीएसटी और नोटबंदी जैसे बड़े आर्थिक सुधारों के बाद पिछले कुछ समय से अर्थव्यवस्था की रफ्तार मंद पड़ी थी।

 

रिजर्व बैंक के आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2017-18 में बैंकों का कुल जमा केवल 6.7 प्रतिशत बढ़ा है, जो 1963 के बाद यानी पिछले पचपन सालों में सबसे कम बढ़ोतरी है। जबकि मार्च 2017 के मुकाबले मार्च 2018 में म्यूचुअल फंड्स का एसेट (या एयूएम) 22 प्रतिशत बढ़ा है। साफ है लोगों ने बेहतर रिटर्न की उम्मीद में एफडी का दामन छोडक़र म्यूचुअल फंड का रुख किया।

 

लेकिन अर्थव्यवस्था में सुधार के साथ ही बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिल रहे कम ब्याज दरों का दौर भी खत्म हो रहा है। एफडी पर मिल रही मौजूदा ब्याज दरें पिछले दो-तीन सालों में सबसे ऊंचे स्तर पर हैं। फिक्स डिपॉजिट में निवेश की गई राशि पर बिना किसी जोखिम के बैंक आपको ब्याज के रूप में एक निश्चित रिटर्न देते हैं।

 

इसके अलावा आपने जितनी अवधि के लिए पैसों का निवेश किया है, उसके बीच बाजार या बैंक की हालात कैसी भी हो आपके ब्याज रिटर्न पर कोई असर नहीं पड़ेगा। एफडी चाहे सरकारी बैंक में हो या निजी अथवा विदेशी बैंक में, यहां जमा धन पूरी तरह सुरक्षित होता है। अगर बैंक दिवालिया भी हो जाता है तो डिपॉजिट इन्शयोरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन के तहत एक लाख रुपये तक की राशि वापस मिल जाती है।.