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फूलों की घाटी : कुदरत के खजाने को बारिश ने निखारा

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देहरादून। मानसून में उत्तराखंड की पहचान बारिश, आपदा और कुदरत के कहर से की जाती है। लेकिन आफत के बीच कुदरत के खजाने से एक अच्छी खबर आ रही है कि राज्य में बारिश होने से फूलों की घाटी निखर गई है।

 

बता दें आपदा के बाद से बेजान पड़ी फूलों की घाटी का नजारा कुदरत ने बदल दिया है।यहां का नजारा देखकर कुछ ऐसा लग रहा है कि क्या दिन और क्या रात। मानो ये धरती नहीं कोई स्वर्ग है। हम बात कर रहे हैं विश्व की धरोहर और उत्तराखंड की पहचान फूलों की घाटी की जो इस बारिश में ऐसे निखर कर सामने आई है जिसको देखकर कोई भी इसका दीवाना हो जाए।

 

राज्य के चमोली जिले में बारिश और मुसीबतों के बीच हजारों की तादात में पर्यटक इस खूबसूरत नजारे का दीदार करने के लिए आ रहे हैं। फूलों की घाटी में इस समय तीन सौ से अधिक प्रजाति के फूल खिलें हुए है। घाटी में फूलों की इस दुनिया की खूबसूरती देखते ही बनती है। पर्यटकों को घाटी मे परीलोक जैसा अहसास हो रहा है। हर प्रकृतिप्रेमी का सपना होता है कि जीवन मे एकबार जिंदगी के खूबसूरत लम्हों को फूलों की घाटी में जरूर बिताए।

 

वहीं घाटी प्रकृति प्रेमीयों के लिये स्वर्ग के समान है और हो भी क्यों नहीं क्योंकि यह दुनिया की इकलौती जगह है जहां पांच सौ से अधिक प्रजाति के प्राकृतिक फूल खिलते हैं और साथ ही घाटी दुर्लभ प्रजाति के वन्यजीव जंतु, पशु-पक्षियों व तितलियों का दुर्लभतम संसार है। बता दें घाटी प्रकृतिप्रेमीयों के अलावा वनस्पति शास्त्रियों की भी पहली पसंद रही है।

 

जितनी ये खूबसूरत घाटी है उतना ही खूबसूरत इसका इतिहास भी है। जानकारी के अनुसार घाटी की खोज 1931 मे प्रसिद्ध ब्रिटिश पर्वतारोही फ्रैंक स्मिथ ने की थी। कॉमेट पर्वतारोहण के बाद रास्ता भटककर यहां पहुंचे। यहां फूलों का सौंदर्य देखकर मंत्रमुग्ध हो गए और कुछ दिन घाटी की हसीन वादियों में बिताये। उन्होंने यहां से फूलों के सैंपल लेकर गए और वैली फ्लावर नाम से एक किताब भी लिखी। जिसने पूरी दुनिया मे तहलका मचाया।

 

तभी से घाटी को नई पहचान मिली है। प्रकृति की इस अनमोल खजाने से मारग्रेट लेगी भी प्रभावित थी। चार साल यहां बिताने के बाद इसी प्रकृति में विलिन हो गईं। वहीं पर्यटक अपने साथ फूलों की घाटी के हसीन अनुभवों को साथ ले जा रहे हैं।

 

बता दें जुलाई अगस्त के महीने में फूलों की घाटी में सभी दुर्लभ प्रजाति के फूल खिले रहते हैं। इसी समय से ही यहां पर्यटकों की भारी भीड़ रहती है। 87.5 वर्ग क्षेत्रफल में फैली घाटी की जैवविविधता का खजाना देखकर पर्यटक खुश हो रहे हैं। पुण्पावती नदी की कल-कल, झर-झर झरते झरने, फूलों की घाटी का सौंदर्य पर्यटको को खासा भा रहा है।

 

बारिश और सडक़ों पर पहाड़ आने के कारण भले ही लोग चारधाम ना आ रहे हो, लेकिन फूलों की घाटी में पर्यटकों का तांता लगा हुआ है। प्रतिदिन सैकड़ों पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं। फूलों की घाटी मे अबतक 3500 से अधिक देशी-विदेशी पर्यटक घाटी का दीदार कर चुके हैं और लगातार घाटी मे जमावड़ा लगा हुआ है।

 

जापान का राष्ट्रीय फूल ब्लू पॉपी के खिलते ही जापान सहित एशियाई देशों के पर्यटक आ रहे हैं। राज्य का पुष्प ब्रह्म कमल भी भारी मात्रा मे खिल गए हैं। दुर्लभ प्रजाति के पशु-पक्षी, उड़ान भरतीं तितलियां भी अनोखी छटा बिखेर रही हैं। इस नजारे से पर्यटकों के मुंह से इस खूबसूरती के लिए कोई शब्द ही नहीं निकल रहे हैं।