udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news प्रभु की भक्ति से कोई मतलब !

प्रभु की भक्ति से कोई मतलब !

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आज का इंसान आध्यात्मिकता के तरफ भी अपने सांसारिक कार्यो की पूर्ति के लिए भागता है , प्रभु की भक्ति से कोई मतलब नही , इसलिए गुरु भी बनाने लग गए , कर्जा हो जाये , व्यापार ना चले , प्यार छोड़कर भाग जाये , शत्रु बन जाये तो तुरंत गुरु जी के पास भाग लो की गुरु जी कर्जा हो गया , गुरु जी व्यापार नहीं चल रहा , गुरु जिससे मै प्यार करता था वो छोड़कर चली गयी कैसे वापस पाउ, ऐसे ऐसे कार्य गुरु जी के पास लेकर आते है , गुरु मार्गदर्शन , मन की शांति , मोक्ष के लिए होता है , सांसारिक कार्यो की सिद्धि के लिए नहीं , लोगो के मानसिकता हो गयी है की बस अपने सांसारिक कार्य बन जाये बाकि ज्ञान , मोक्ष प्रभु इसने कोई मतलब नहीं , क्या जो समस्या सभी के सांसारिक जीवन में आती है वो अपने कर्मो के कारण ही आती तो भय क्यों , जब गलत कार्य करते समय भय नहीं लगता की इसका फल मुझे भोगना पड़ेगा तो बाद में जब फल मिलता है तो पता नहीं किस किस के पैर पकड़ते फिरते है , किसी के पास ऐसा कोई तंत्र मंत्र नहीं है जिससे कर्मो के फल बदल जाये , कर्मो के फल तो सयम भगवान को भी भोगने पड़ते है तो हम इंसान क्या है ! लेकिन ये छोटी सी बात इंसान को समझ नहीं आती और यहां वहा लुटता फिरता है ,आप सभी ने देखा होगा आजकल पोस्टर छपे रहते है २४ घंटो में काम गारंटी के साथ तो कोई उनसे पूछे जब आप इतने ही समर्थ है की सभी काम २४ घंटो में कर देते है तो पहले अपने ही कार्य पूर्ण क्यों नहीं करते ! साधना मार्ग है सयम को जानना , जिसे हम ईश्वर कहते है उनका अनुभव करना , ये सांसारिक कार्यो के लिए साधना मार्ग नहीं है और न ही कोई चमत्कार होता है इसमें , ये तो श्रद्धा समर्पण का मार्ग है अपने इष्ट के प्रति ! इस मार्ग पर गुरु मार्गदर्शन करते है ये गुरु का कार्य है, संसारिक कार्यो की पूर्ति करे गुरु, ये उनका कार्य नहीं है !

गुरु

आज का इंसान आध्यात्मिकता के तरफ भी अपने सांसारिक कार्यो की पूर्ति के लिए भागता है , प्रभु की भक्ति से कोई मतलब नही , इसलिए गुरु भी बनाने लग गए , कर्जा हो जाये , व्यापार ना चले , प्यार छोड़कर भाग जाये , शत्रु बन जाये तो तुरंत गुरु जी के पास भाग लो की गुरु जी कर्जा हो गया , गुरु जी व्यापार नहीं चल रहा , गुरु जिससे मै प्यार करता था वो छोड़कर चली गयी कैसे वापस पाउ, ऐसे ऐसे कार्य गुरु जी के पास लेकर आते है , गुरु मार्गदर्शन , मन की शांति , मोक्ष के लिए होता है , सांसारिक कार्यो की सिद्धि के लिए नहीं , लोगो के मानसिकता हो गयी है की बस अपने सांसारिक कार्य बन जाये बाकि ज्ञान , मोक्ष प्रभु इसने कोई मतलब नहीं , क्या जो समस्या सभी के सांसारिक जीवन में आती है वो अपने कर्मो के कारण ही आती तो भय क्यों , जब गलत कार्य करते समय भय नहीं लगता की इसका फल मुझे भोगना पड़ेगा तो बाद में जब फल मिलता है तो पता नहीं किस किस के पैर पकड़ते फिरते है , किसी के पास ऐसा कोई तंत्र मंत्र नहीं है जिससे कर्मो के फल बदल जाये , कर्मो के फल तो सयम भगवान को भी भोगने पड़ते है तो हम इंसान क्या है ! लेकिन ये छोटी सी बात इंसान को समझ नहीं आती और यहां वहा लुटता फिरता है ,आप सभी ने देखा होगा आजकल पोस्टर छपे रहते है २४ घंटो में काम गारंटी के साथ तो कोई उनसे पूछे जब आप इतने ही समर्थ है की सभी काम २४ घंटो में कर देते है तो पहले अपने ही कार्य पूर्ण क्यों नहीं करते ! साधना मार्ग है सयम को जानना , जिसे हम ईश्वर कहते है उनका अनुभव करना , ये सांसारिक कार्यो के लिए साधना मार्ग नहीं है और न ही कोई चमत्कार होता है इसमें , ये तो श्रद्धा समर्पण का मार्ग है अपने इष्ट के प्रति ! इस मार्ग पर गुरु मार्गदर्शन करते है ये गुरु का कार्य है, संसारिक कार्यो की पूर्ति करे गुरु, ये उनका कार्य नहीं है !

Posted by अघोर तंत्र रहस्य on Friday, 20 July 2018