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प्रभुकृपा शोर्टकट में ! शिव शांत हैं और बाहर नन्दी मुस्कुरा रहे !

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सफरनामाः पंचकेदार ट्रांसफोर्मेशन जर्नी के प्रथम दिन

जेपी मैठाणी

पंचकेदार ट्रांसफोर्मेशन जर्नी के प्रथम दिन 19 मई 2018 – ऋषिकेश से सभी यात्री या एडवेंचर प्रेमी रात – तक गौरी कुण्ड और अगली सुबह – गौरीकुंड से – जंगल चट्टी, रामबाड़ा – जिसका अब सिर्फ नाम बाकी है. पुराने निशानों की जगह चट्टानें हैं बस, छोटी लिंचौली, बड़ी लिंचौली, रूद्र पॉइंट होते हुए प्रथम केदार – केदारनाथ पहुंचे. गौरीकुंड का पिन कोड 246471 है और गौरीकुंड का पोस्ट ऑफिस इस घाटी का अंतिम पोस्ट ऑफिस भी है शायद . इस क्षेत्र में या पूरी घाटी में पुराने दुकानदार या आस पास के गांवों के लोग जो आपदा में सब कुछ लुटा चुके हैं या थे पुनः अब अपना नया संसार जुटाने या खड़ा करने में लगे थे.

केदारनाथ में रात को गढ़वाल मण्डल विकास निगम के टेंट कॉलोनी- BC केदारनाथ में रुके. सारे रास्ते खच्चरों से बचते हुए- दुर्गन्ध काफी थी शायद घोड़े ,खच्चर की लीद की.गढ़वाल मण्डल विकास निगम के टेंट कॉलोनी के सभी टॉयलेट गंदे बेकार – बिना पानी और लॉक के हैं. बिल नंबर- 24889, टेंट नंबर-2,TIN नंबर- 05001060429.गरम पानी के लिए बात की तो कर्मचारी ने घूर कर देखा मानो अपराध कर दिया हो.

एक बात अच्छी थी हर दो किलोमीटर पर – दवा की व्यवस्था, सेक्टर अधिकारी , पुलिस की व्यवस्था थी, साफ़ सफाई का जिम्मा सुलभ को दिया गया है सारा कूड़ा इकट्ठा कर गाड गधेरे में फेंका जा रहा था खुले आम. जो भी टॉयलेट थे वो नीले तिरपाल के थे – जिप या लॉक व्यवस्था बेकार थी, महिलाओं के लिए परेशानी पैदा कर रहे थे. रास्ता अभी भी बन रहा है लोहे के तार से उखड़ी हुई रेलिंग बाँधी जा रही थी. बीच बीच में रेलिंग के खंभे अभी भी लगाये जा रहे हैं स्ट्रीट लाइट की कोई व्यवस्था नहीं थी.

आपदा के निशान डरा रहे थे पुराण समय याद कर रूह काँप रही थी किसी – किसी समय. यात्रियों के लिए बायोमैट्रिक और प्रीपेड खच्चर – घोड़े – डंडी की व्यवस्था भी ठीक थी . लेकिन टेलीफोन नेटवर्क सही या काम ही नहीं कर रहा था . रामबाड़ा और आगे एक दो जगह फ्री वाई फाई की व्यवस्था थी .19 मई रात को गौरीकुंड में एक ठेकेदार NIM के नाम पर पुलिस वाले को सामान को उतारने के नाम पर धमका रहा था.

इससे पहले सोनप्रयाग में हमारी गाडी को रोक दिया – बोला आगे सिर्फ फ्लीट ही जायेगी एक तरह की नयी मुसीबत. इंस्पेक्टर नेगी को चिट्ठी दिखाई – पुलिस के सिपाही ने हुकुम बजाया ड्राईवर का लाइसेंस यही जमा होगा और ये डेढ़ घंटे में वापस यही आएगा . सारे रास्ते घोड़े – खच्चर दौड़ रहे थे – सड़क बेहद संकरी हो गयी है इस बीच यात्री अपने साथियों के लिए चिल्ला रहे हैं ,नीचे रात के धुप्प अँधेरे में मन्दाकिनी डरा रही है .

उर्जा प्रदेश के विधायक और क्षेत्र की बिजली गुल है . गौरीकुंड में किराये के कमरों की लूट है- 10 फीट चौड़ा और 14 फीट लम्बा 5 बैड का कमरा 2500 रुपये में मिला पर एक टुकड़ा बिल या परचा ही नहीं मिला कहने पर भी. जुगनू सा सड़ा टोर्च 140 रुपये में बेचा जा रहा है.खाने की थाली 120 रुपये की है – शायद यही एक आमदनी का जरिया है इसलिए इतना महंगा हो . गौरी कुंड वाली जगह में सिर्फ गड्ढा खुदा हुआ है .

रात के 9 बजे भी नदी में JCB काम कर रहा है ये दृश्य डरावना है . अगली सुबह यानी 20 मई रविवार नदी के किनारे एक पुलिस वाला हर किसी पर चिल्ला रहा है लाठी भांजने की कोशिश कर रहा है बेमतलब . पैदल यात्रा के पहले दिन सुबह देखते हैं नदी के किनारे यात्रियों की भीड़ लगी है मंदिर के आगे हमने अगली सुबह फोटो ली ग्रुप की – बोर्ड में गलती है या सूचना गलत लिखी है ये पर्यटन विभाग का बोर्ड है – पंचकेदार के बारे में लिखते हुए रूद्रनाथ का वर्णन छोड़ दिया गया है . पता नहीं किस यन्त्र से उंचाई नापी गयी है. गौरीकुण्ड के गर्म कुंड की छत अभी भी उखड़ी हुई है . स्नानागार की व्यवस्था नहीं है. लघुशंका गृह का सीधा मन्दाकिनी से संपर्क है .

यहाँ गौरीकुंड में केदारनाथ जाने का प्रवेशद्वार बेहद संकरा है दोनों तरफ होटल और ढाबे हैं बीच में मुश्किल से 4 फीट का रास्ता होगा- ये केदारनाथ का प्रवेशद्वार है. मन्दाकिनी के दाहिनी और केदारनाथ की ओर जाते हुए हमारे दायीं ओर से एक और रास्ता गौरीकुंड के गौरीमाई मंदिर की ओर जा रहा है और थोडा आगे ही शायद गौरीकुण्ड का गर्म पानी का कुण्ड रहा होगा – जिसके निशान बाकी हैं. जंगलचट्टी के पास एक छोटा हेलीपैड बना है आगे भीम बलि है.

रिंगाल और बांज, बुरांस के पेड़ साथ चल रहे हैं .रास्ते में नाश्ता किया गया – भानियावाला के एक फार्मासिस्ट मिले चिकित्सा सुविधा पॉइंट पर, डॉक्टर यहाँ भी नहीं है वैसे ही सारे प्रदेश में डॉक्टर नहीं हैं फिर यहाँ पर आशा करना बेकार है . फिर हम आगे बढ़ गए रामबाड़ा की ओर- शाम को केदारनाथ पहुंचे – मंदिर जाने के रास्ते पर अलवर राजस्थान के लंगर में हलवा खाया और फ्री की चाय पी. एक तरफ होटलों की लूट है दूसरी ओर फ्री के लंगर.

लंगर वाले एक-एक प्लास्टिक की प्लेट को इकट्ठा करके कूड़ेदान में डाल रहे थे दूसरी ओर सुलभ जिसको शायद ये ठेका दिया गया था उसके सफाई कर्मी या पर्यावरणमित्र पेट बोतल, पॉलिथीन ,बरसाती आदि और कचरा इकट्ठा करके नदी में और गधेरों में डाल रहे थे .अब सुधिजन कहेंगे आपने रोका क्यूँ नहीं वो इसलिए नहीं क्यूंकि यहाँ ऑक्सीजन कम है हमारा प्रोग्राम पहले से तय है 10 दिन की पैदल यात्रा है – लड़ने झगड़ने में फंस गए तो पूरा ग्रुप फंस जायेगा !

अँधेरा घिर आया है केदारनाथ मंदिर की रोशनी सुंदर है थकान मिट गयी इससे पहले – सिक्स्थ सिग्मा हाई एलटीट्युड मेडिकल सर्विस (Six Sigma Healthcare ) की शानदार टीम से मिले जो इस यात्रा मार्ग में सभी को दवा और इलाज फ्री में दे रहे हैं . भीम जी बताते हैं ये शानदार सेवा है . डॉक्टर प्रदीप भारद्वाज एवं डॉक्टर अनीता भारद्वाज चिकित्सक और उनकी टीम से मिले ये गजब के लोग हैं

इतनी कठिन यात्रा में मुस्कुराते हुए सभी आने वाले मरीजों का इलाज करने का प्रयास कर रहे हैं. आगे NIM की टीम से मिले – उन्होंने केदारनाथ से वाया खाम – मनणी के रास्ते – मध्यमहेश्वर जाने को बेहद खतरनाक बताया – फिर हमारी टीम के कुछ साथी पूरी तैय्यारी के साथ नहीं आये थे- और एक गाइड किया था जो सिर्फ अपनी ध्याड़ी के जुगाड़ में था उसे ये पता ही नहीं था की उस रास्ते पर 3-4 फीट बर्फ है. उन्होंने ये भी बताया बिना उपकरणों के वहाँ के रास्ते जाना बेहद खतरनाक है .

NIM के बिष्ट जी ने केदारनाथ के दर्शन कराये – मंदिर के भीतर धक्का मुक्की – पंडों के चिल्लाने की आवाज. रावल के आगमन के साथ सभी दक्षिणा की जुगत में व्यस्त हैं . एक पंडा हमारे साथी तमिलनाडु के विजयुडू के दुसरे राउंड की बात पर ऐसे चिल्ला रहा था मानो उसकी जमापूंजी चुरा रहे हों – जबकि ये सिर्फ एक आदमी के एक चक्कर और लगाने की बात थी , धर्म की आस्था और मन की चोट यहाँ फिर उभर आयी बेहद गन्दा व्यवहार मंदिर के गर्भगृह में. शिव की पिंडी अन्दर चमक दमक रही है – धक्का मुक्की चल रही है .

शिव शांत हैं शायद और बाहर के बड़े नन्दी उनकी तरफ देख मुस्कुरा रहे हैं – और मानो कह रहे हों – हे शिव- हे प्रभु – भक्तों की नहीं – ईमानदार पंडों और भावना समझने वाले पुजारियों की कमी है इस घाटी में. मंदिर के पीछे वाले भाग में गांधीसरोवर या चौराबाड़ी ताल से बहकर आयी बड़ी शिला पूजी जा रही है – औघड बाबा और अन्य पुजारी वहाँ पूजा कर रहे हैं. मैं बाहर आकर मंदिर की तरफ मुंह करके दाहिनी ओर मंदिर के फर्श पर शाष्टांग प्रणाम करता हूँ मेरे पास झट से विजयुडू जी और रंजन के साथ साथ शायद कमलेश जी भी धरामष्तक हो जाते हैं भावनाओं का थोडा प्रवाह है

पिछले ३ साल से मैंने जान्हवी आरव और पत्नी ने जो सिक्के गुल्लक में जोड़े थे वो साथ ले आया था उसको मंदिर के अग्रभाग की छत पर बिखेर देता हूँ जो बचे वो बाबाओं को बाँट दिए .इस बार अलग सा प्रसाद मंदिर समिति द्वारा बांटा जा रहा है पर्ची कट रही है दान की . बाकी मंदिर समिति की कोई सेवा कही नहीं दिखी सारे रास्ते में किसी जनसुविधा या भोजन के नाम पर मंदिर समित की कोई व्यवस्था नहीं थी अगर होगी तो बताई नहीं गयी या उसका प्रचार प्रसार नहीं है. या प्रचार से परहेज रखा गया है .

मंदिर के सामने अतिक्रमण बहुत कम हो गया है जो बेहद सुखद है , उध्दव कुंड उजाड़ है अभी तक नहीं बनाया गया है. स्थानीय लोग बताते हैं टॉयलेट, लाइट, मोबाइल कनेक्टिविटी की बहुत समस्या है.

मंदिर के सामने – प्लास्टिक के गमलों में देहरादून से लाये गए वैरीगैटेड पौधे और कमेलिया के पौधे सजाये गए हैं जो यहाँ जिन्दा रह ही नहीं सकते – इससे बढ़िया देवदार , बांज , भोजपत्र, बुरांस के पौधे लगा देते पर छोडो – ये लेजर शो और VIP मैनेजमेंट का दौर है. थोड़ी देर में 3 घंटे के बाद ही UREDA या सोलर लाइट की जगमगाती रोशनी – नेपथ्य में गायब हो गयी . लोगों की मोबाइल की फ़्लैश चमकने लगी . लाउड स्पीकर भटके भूले यात्रियों की घोषणा कर रहा है.

उत्तराखंड पुलिस का शानदार रूप दिखा लगा जैसे वो शांत हों शिव भूमि में – लेकिन मुश्तैदी से तैनात . ऊपर धार में शिव के भैरव हैं अलग अलग पताकाओं के बीच और बदल ऊपर लटक झटक रहे हैं चाँद मुस्कुरा रहा है बर्फीली पहाड़ियां लुकाछुपी जारी रखे हुए है ! हम प्रसाद लेकर – बड़े नंदी को छूकर वापस लौट रहे हैं फ्री के लंगर में .

GMVN के टेंट में आये झट से सो गए फिर मैंने देखा आधी रात में सब अलट- पलट कर रहे हैं – रंजन , कमलेश जी , कुंवर सिंह , अतुल नेगी और विजयुडू अगली सुबह कह रहे हैं रात नींद नहीं आयी अजीब सा माहौल है सब बैचैन हैं केदार की फिजा में हजारों लोग जो असमय काल के ग्रास हो गए क्या वो अशांति में हैं – पर शिव तो मुस्कुरा रहे थे ऐसा लगा कह रहे हों तुम बहुत बौने हो . सुबह 6 बजे से हेलिकोप्टर का शोर पैसे छापने लगा है शैलेन्द्र के शब्दों में – भाईसाब इसे कहते हैं पैसे छापना और धर्म की आस्था का खेल- जहां कोई कष्ट नहीं लेना चाहता है बल्कि प्रभुकृपा शोर्टकट में लेना चाहता है !

अब अगली सुबह कालीमठ रवाना……..जारी है – कथा भाग दो में.

पंचकेदार ट्रांसफोर्मेशन जर्नी के प्रथम दिन 19 मई 2018 – ऋषिकेश से सभी यात्री या एडवेंचर प्रेमी रात – तक गौरी कुण्ड और अगली सुबह – गौरीकुंड से – जंगल चट्टी,

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