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राज्य में नीम-हकीम बढ़ा रहे हेपेटाइटिस से स्वास्थ्य संंबंधी बोझ

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देहरादून। देखा जाए तो उत्तराखंड रेड अलर्ट लाइन पर है क्योंकि वहां अपंजीत मेडिकल चिकित्सक और नीम-हकीमों की बाढ़ आई हुई जो हिपेटाइटिस की बीमारी फैलाने के खतरे को बढ़ा रही है। वायरल हिपेटाइटिस, हिपेटाइटिस वायरस बी या सी में से एक के संक्रमण के कारण होता है, जो कि भारत में एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है।

 

वायरल हिपेटाइटिस के खिलाफ अभियान का समर्थन करने के लिए, और लोगों के बीच रोग के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए, देहरादून के चिकित्सकों ने लोगों को रोकथाम और उपचार समााान पर शिक्षित करने के लिए खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया है। सामान्यत: उत्तराखंड राज्य में हाल के वर्षों में और विशेष रूप से देहरादून शहर में हेपेटाइटिस बी की उच्च घटनाएं एक महत्वपूर्ण चिंता रही हैं।

 

देहरादून के अस्था हस्पिटल के कंसल्टेंट गैस्ट्रोएंटरोलजिस्ट डा पी$के$ अग्रवाल का मानना है कि जब तक असुरक्षित रक्त संक्रमण (अनसेफ ब्ल्ड ट्रांसफ्यूजन), मेडिकल सेट-अप में रक्त के उत्पादों के प्रदूषण (कंटामिनेशन अफ ब्लड प्रडक्ट इन मेडिकल सेट-अप्स), और वायरस से माता-से-बच्चे के संचरण की उच्च संभावनाएं हैं,

 

शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में वायरस के तेजी से फैलने के पीछे सबसे महत्वपूर्ण कारण है इस राज्य में अब तक नीम-हकीमों द्वारा बिना चिकित्सा पद्घतियों की जानकारी के इलाज किया जा रहा है। सामान्य आबादी के बीच जागरूकता की कमी से, इनका दबाव ज्यादा बढ़ रहा है।

 

ड$ अग्रवाल कहते हैं औसतन, हम हर दिन हिपेटाइटिस बी के लगभग पांच-सात रोगियों को देखते हैं, इनमें कुछ नए होते हैं और कुछ फोलोअप कस होते हैं। यह संख्याएं ही हमारे क्षेत्र में हिपेटाइटिस द्वारा उत्पन्न बढ़ते स्वास्थ्य खतरों को दिखाने के लिए काफी हैं, हालांकि हिपेटाइटिस सी, हेपेटाइटिस बी के मुकाबले राज्य में अपेक्षात कम है।

 

सामान्यत:, संक्रमण अािकांशतरू इस्तेमाल की गई अनस्टेरेलाइज्ड सूई या इंजेक्शन को दोबारा-या बार-बार उपयोग करने से होता है। ग्रामीण और यहां तक कि उप-शहरी क्षेत्रों में, प्रसार दर लगभग 10 प्रतिशत उच्च होने की आश्चर्यजनकरूप रिपोर्ट है। निस्संदेह, अािकांशत: संक्रमण अनरिजस्टर्ड चिकित्सकों और झोलाछापों के द्वारा बड़े पैमाने पर गैर-वैज्ञानिक अभ्यासों से फैल सकता है।

 

हेपेटाइटिस सी ट्रांसमिशन तब भी हो सकता है जब दूषित रक्त और रक्त उत्पादों के संक्रमण, दूषित इंजेक्शन का उपयोग, और निडिल स्टिक इंजरीज हों। यह सब कहने के बाद, मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि मजबूत जागरूकता पैदा करने के लिए अभियान गायब हो रहे हैं, खासकर जब एचबीवी की बात आती है सामुदायिक स्तर पर लंबी अवाि के जन जागरूकता अभियान बहुत जरूरी चीज है, ताकि हिपेटाइटिस का संक्रमण जल्दी से पता चल सके और तुरंत इलाज किया जाए।

 

डक्टर कहते हैं, डिस्पोजेबल सुइयों का पुन उपयोग करने जैसी सामान्य रूप से जागरुकता पैदा करने के अलावा, नाई द्वारा असुरक्षित ब्लेड का उपयोग और अनस्टीलाइज्ड सुई का उपयोग, निवारक पारिवारिक स्क्रीनिंग, उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों की जांच, और थकावट, भूख की कमी और पीलिया जैसी लक्षणों वाले रोगियों को जमीनी स्तर से बीमारी के जोखिम को खत्म करने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए। रोग के अस्तित्व के बारे में जागरूकता पैदा करने के अलावा, लोगों को उपचार और टीकों की उपलबता के बारे में शिक्षित किया जाना चाहिए।