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रामनाथ कोविंद ने संभाली भारत के 14वें राष्ट्रपति की कमान

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नई दिल्ली। रामनाथ कोविंद ने भारत के 14वें राष्ट्रपति की कमान संभाल ली। सेंट्रल हाल में मंगलवार को एक गरिमापूर्ण समारोह में देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जेएस खेहर ने कोविंद को राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई।

 

राष्ट्रपति पद की कमान संभालने के तत्काल बाद कोविंद ने अपने पहले संबोधन में संविधान की रक्षा का भरोसा देते हुए देश की विविधता के बावजूद एकजुटता को बड़ी ताकत करार दिया। कोविंद ने विनम्रता से राष्ट्रपति पद का दायित्व संभालने की बात कहते हुए देश के 125 करोड़ नागरिकों के जताए गए विश्वास पर खरा उतरने का वचन दिया।

 

सेंट्रल हाल में दोपहर 12.15 बजे राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद अंदर मेजों की थपथपाहट तो बाहर तोपों की गूंज के बीच कोविंद ने प्रणब मुखर्जी से कुर्सी की अदला बदली कर औपचारिक रुप से देश के संवैधानिक प्रमुख और तीनों सेनाओं के कमांडर इन चीफ की कमान थाम ली। उत्तर प्रदेश से देश के पहले राष्ट्रपति बने कोविंद इस शीर्ष पद पर पहुंचने वाले भाजपा के पहले नेता हैं।

 

जस्टिस खेहर ने कोविंद को राष्ट्रपति के रुप में संविधान के संरक्षण और सुरक्षा के साथ कानून की रक्षा का दायित्व निभाने की शपथ दिलाई। शपथ के बाद कोविंद ने राष्ट्रपति की हस्ताक्षर पुस्तिका पर दस्तख्त किए। इसके बाद सेंट्रल हॉल में निर्वतमान राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने कोविंद को राष्ट्रपति की कुर्सी सौंप दी।

 

शपथ के बाद कोविंद ने सेंट्रल हाल में ही राष्ट्रपति के रुप में अपना पहला संबोधन दिया। इसकी शुरूआत कोविंद ने बतौर सांसद सेंट्रल हाल की अपनी पुरानी स्मृतियों को याद करते हुए की और कहा- ‘इसी कक्ष में हमें कई लोगों के साथ विचार-विमर्श का मौका मिला। इसमें कई बार हम सहमत होते थे तो कई बार असहमत। मगर हमने एक दूसरे के विचारों का सम्मान करना सीखा और यही लोकतंत्र की खूबसूरती है।’

 

केआर नारायणन के बाद दलित समुदाय से देश के दूसरे राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि एक छोटे से गांव में मिट्टी के घर में पले-बढ़े और उनकी यात्रा बहुत लंबी रही है। यह यात्रा अकेले उनकी नहीं बल्कि हमारे देश और समाज की यही गाथा रही है। कोविंद ने कहा कि सवा सौ करोड़ नागरिकों ने जो विश्वास उन पर जताया है उस पर खरा उतरने का वचन देते हैं। साथ ही डा राजेंद्र प्रसाद, डा सर्वपल्ली राधाकृष्णन, एपीजे अब्दुल कलाम और अपने पूववर्ती प्रणब मुखर्जी के पदचिन्हों पर चलने का भी भरोसा देते हैं।

 

 

नए राष्ट्रपति के पहले संबोधन पर लगी दिलचस्पी के बीच कोविंद ने देश की विविधता के बावजूद एकजुटता को राष्ट्र की सफलता का मंत्र करार दिया। उन्होंने कहा कि विविधता ही हमारा वो आधार है जो हमें अद्वितीय बनाता है। हमें भारत की विविधता, समग्रता और सर्वधर्म समभाव पर गर्व है। साथ ही भारत की मिट्टी पानी, संस्कृति, परंपरा और अध्यात्म पर भी गर्व है। कोविंद ने देश के हर नागरिक की राष्ट्र निर्माण में भूमिका का उल्लेख करते हुए उन पर गर्व करने की बात कही।

 

नए राष्ट्रपति ने सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिकों, पुलिस, किसान, वैज्ञानिक, शिक्षक, महिलाओं, डाक्टर-नर्स, स्टार्ट अप के जरिए योगदान करने वाले नौजवानों से लेकर किसानों के योगदानों का जिक्र करते हुए हर नागरिक को राष्ट्र निर्माता करार दिया। कोविंद ने कहा कि राष्ट्र निर्माण अकेले सरकारें नहीं कर सकतीं। सरकार सहायक हो सकती है और दिशा दिखा सकती है।

 

राष्ट्र निर्माण का आधार राष्ट्रीय गौरव है। उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र के रुप में हमने बहुत कुछ हासिल किया है मगर हमें इस बात का ध्यान रखना होगा कि समाज के आखिरी पंक्ति पर खड़े गरीब परिवार की बिटिया के लिए नए अवसरों के द्वार खुलें। कोविंद ने महात्मा गांधी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के समान अवसर देने वाले समाज की कल्पना को साकार करने को 21वीं सदी के भारत का लक्ष्य करार दिया।

 

सेंट्रल हाल में शपथ लेने से पहले कोविंद अपनी पत्‍‌नी संग महात्मा गांधी को नमन करने राजघाट गए। इसके बाद राष्ट्रपति भवन से घुड़सवार अंग रक्षकों के साथ संसद भवन पहुंचे। शपथ के बाद राष्ट्रपति कोविंद और पूर्व राष्ट्रपति मुखर्जी एक ही गाड़ी में राष्ट्रपति भवन लौटे। जहां मुखर्जी ने उन्हें राष्ट्रपति के कक्ष में बिठाया। इसके बाद पूर्व राष्ट्रपति को कोविंद ने विदा किया और सरकार के वरिष्ठ मंत्री अरुण जेटली प्रणब को 10, राजाजी मार्ग के उनके नए आवास पर छोड़ने गए।

 

वहीं राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में इसके बाद राष्ट्रपति के सुरक्षा गार्डो ने कोंविद को गार्ड ऑफ आनर दिया। सेंट्रल हाल के शपथ समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, स्पीकर सुमित्रा महाजन, पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, मनमोहन सिंह, देवेगौड़ा, सोनिया गांधी और लालकृष्ण आडवाणी से लेकर तमाम राज्यों के मुख्यमंत्री, राज्यपाल के साथ कोविंद के परिजन और रिश्तेदार भी मौजूद थे।