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राणा को मिला केदारघाटी सेवा शिरोमणि सम्मान संस्कृति

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पैलिंग गांव में पांच दिवसीय गौ कथा का आयोजन ,विभिन्न कार्यक्रमों का भी किया जा रहा आयोजन
रुद्रप्रयाग। ऊखीमठ तहसील के सुदूरवर्ती पैलिंग गांव में पांच दिवसीय गौ कथा के आयोजन के साथ साथ अनेकों कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। गौ कथा का शुभारम्भ रुच्छ महादेव खोनू में साधनारत बाबा अरविन्द भारद्वाज, कथा वाचिका बहिन राधिका ने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों व भक्तजनों की उपस्तिथि में किया।

 

कथा में जहां दूर-दराज से श्रोताओं ने पहुंचकर गौ वंश के महातम्य का लाभ उठाया, वहीं आयोजन समिति द्वारा प्रतिदिन अनेकों कार्यक्रमों के माध्यम से कथा के आयोजन को और भव्य बनाया जा रहा है। कार्यक्रमों में केदारघाटी की नन्दा नृत्य नाटिका, रामादल यात्रा, कीर्तन मंडलियों की प्रस्तुतियां, विशेष पांडव नृत्य, जल कलश यात्रा, विभिन्न विद्यालयों की प्रस्तुतियों एवं विशिष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों का सम्मान भी किया गया।

 

केदारघाटी सांस्कृतिक जनमंच सेवा समिति पैलिंग द्वारा इस वर्ष का केदारघाटी सेवा शिरोमणि सम्मान संस्कृति, समाजसेवा व शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए डॉ जैक्सवीन नेशनल इंटर कॉलेज गुप्तकाशी के संस्थापक लखपत सिंह राणा एवं ग्रामीण विकास व संस्कृति के क्षेत्र में विशेष कार्यों के लिए मरणोपरांत स्वर्गीय जगत सिंह नेगी को नवाजा गया। मुख्य आचार्य गिरीश चन्द्र सेमवाल, नवीन देवशाली, सर्वेश्वर दत्त सेमवाल, सुभाष चंद्र सेमवाल, शिव प्रसाद सेमवाल, ओम प्रकाश सेमवाल ने सभी पूजा पाठ की विधियों को पूर्ण किया, जबकि हरीहरा नन्द गिरी, ऋषिराज गोस्वामी, विवेक गोस्वामी ने संगीत पर साथ निभाया। कथा वाचिका आचार्य राधिका बहिन ने बताया कि हमारी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 33 करोड़ देवी देवताओं का निवास है, जिस कारण गौमाता चलता फिरता देवालय है और जब गाय के दूध, दही, घी, गौ मूत्र की बात करें तो ये मधुमेह, जोड़ो के दर्द, दमा, टीबी आदि 48 रोगों की औषधियां बनाने के काम आते हैं।

 

अर्थात गाय अपने में औषधालय भी है। हम गौ माता को जन्म देने वाली माता के सामान आदरणीय भारतीय संस्कृति का प्राण, गंगा, गायत्री, भगवान की तरह पूज्य मानते हैं। पद्म पुराण के अनुसार गौ माता के सिर में ब्रह्मा, ललाट में वृषभ ध्वज मध्य में विविध देवगण और रोम-रोम में महर्षियों का वास है। पूंछ में शेषनाग, खुरों में अप्सराओं, मूत्र में गंगा, नेत्रों में सूर्य चंद्रमा, मुख में चारों वेद, कानों में अश्विनी कुमारों, दातों में गरुड़, जिह्वा में सरस्वती तथा अपान में सारे तीरथों का निवास होता है।

 

आज भी वैतरणी पार करने के लिए गोदान का महत्व है, लेकिन कुछ लोगों में राक्षस का वास हो गया है जो गौ माता की हत्या कर रहे हैं। गाय का उपयोग कर सड़कों पर जंगल आदि स्थानों पर मरने के लिये छोड़ रहे हैं, जिसमें सुधार आना अति आवश्यक है। इस मौके पर प्रताप सिंह नेगी, प्रताप सिंह नेगी, बलराम सिंह नेगी, दरवान सिंह राणा, सुजान सिंह नेगी, धीर सिंह नेगी, शिव सिंह नेगी, भ्युराज सिंह सुरज्वाण, सहित कई मौजूद थे।

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