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रहस्यमय गुफा में पाषाण रूप में तपस्यारत दिखे देवी-देवता !

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सनेल कस्बे (उत्तराखंड-हिमाचल बार्डर पर) के पास एक प्राचीन गुफा का पता चला, विशेष आकृतियां बनी कौतुहल का विषय 

उदय दिनमान डेस्कः रहस्यमय गुफा में पाषाण रूप में तपस्यारत दिखे देवी-देवता !हिमालय की तलहटी गांवों से अगर ऐसी खबरे आ जाए तो कोई बडी बात नहीं है। लेकिन कोई रहस्यमय गुफा मिले तो यह चौकाने वाली बात ही होगी। ऐसा ही कुछ हुआ उत्तराखंड और हिमांचल की बार्डर पर। यहां एक रहस्यमय गुफा मिली जो अपने आप में रहस्यमयी है ही साथ ही इस बारे में विस्तार से जानकारी एकत्र करने की भी आवश्यकता है।

 

उल्लेखनीय है कि हिमालय से लगे उत्तराखंड और हिमाचंल को देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है। सदियों से देश-विदेश के हजारों श्रद्धालुओं, पर्यटकों, घुम्मकडों और विशेषज्ञों के लिए हिमालय किसी रहस्य से कम नहीं है। कहते हैं कि यहां के कण-कण में भगवान शिव का वास है और शिव ही इस सृष्टि के निर्माण कर्ता होने के साथ-साथ इसके पालनहार भी है तो यह स्वाभाविक है कि उनके साथ सभी देवी-देवता होंगे। यह हम नहीं कह रहे यह हमारो शास्त्रों, पुराणों में लिखा हुआ है।

 

अकेले केदारखंड की बात करें तो केदारखंड में यह भी लिखा हुआ है कि यहां पाषाण, सजीव रूप में कोटी देवी-देवता तपस्यारत है और कई रिष मुनि तो इस हिमालय क्षेत्र में अजगर जैसे विशाल साप के रूप में तपस्या करते हैं। यही नहीं स्थानीय लोगों को हिमालय में जब कई बार अजगर दिखते हैं तो लोग इस बात को मानते है। वैसे आपको बता दें कि हिमालय की कंदराओं में आज भी सैकडों ऐसी गुफाएं है जहां तपस्या में लीन रिष मुनि से लेकर देवी-देवताओं के दर्शन किए जा सकते है। लेकिन असंख्य गुफाए आज भी किसी को पता नहीं है।

 

हाल में उत्तराखंड और हिमाचंल प्रदेश की सीमा से लगे एक क्षेत्र में एक गुफा मिली जिसमें देवी देवताओं की कलाकृतियां देखने को मिली तो लोगों का कौतूहल स्वाथाविक था। आपको बता दें कि देहरादून जिले के जनजातीय क्षेत्र जौनसार-बावर के बुल्हाड़-गोरछा गांव के बाद अब उत्तराखंड-हिमाचल बार्डर पर स्थित सनेल कस्बे के पास भी एक प्राचीन गुफा का पता चला है।यह खबर आग की तरह फैल गयी और लोग इस ओर जाने और इसे देखने के साथ यहां पूर्जा-अर्चना के लिए उमड पडे। कठिन डगर होने के कारण आम लोगों का यहां जाना असंभव है फिर भी लोग यहां जा रहे हैं।

 

इस गुफा के अंदर मौजूद विशेष आकृतियां लोगों में कौतुहल का विषय बनी हुई हैं। गुफा के दीदार को सनेल पहुंचे त्यूणी के कुछ लोगों ने जब वहां शिवलिंग जैसी आकृतियां देखी तो उनकी पूजा करने लगे। कई लोग जेपीआरआर (जगाधरी-पांवटा-राजवन-रोहडू़) हाइवे से सटी पहाड़ी के बीच मौजूद इस गुफा को पांडवकालीन बता रहे हैं।लोगों की आस्था और कौतूहल का पता इस बात से चलता है कि लोगों के अंदर भगवान के प्रति आस्था और भगवान के दर्शन की अभिलाषा है यही कारण है कि यहां लोग जाना चाहते हैं।

 

हालांकि, गुफा की प्राचीनता का पता लगाने के लिए अभी एएसआइ (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) देहरादून की टीम सनेल नहीं पहुंची है। लेकिन, स्थानीय लोगों के बीच गुफा के महत्व को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं आम हैं। चकराता तहसील प्रशासन भी अब गुफा की लोकेशन जानने के लिए वहां टीम भेजने की तैयारी कर रहा है।प्रशासन की ओर से किए जा रहे प्रयासों के बावजूद लोग इस स्थल के लिए खुद ही निकल रहे हैं।

 

पत्रकार चंदराम राजगुरु के अनुसार हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड को जोडऩे वाले जेपीआरआर हाइवे पर सनेल बार्डर की ओर घूमने निकले त्यूणी क्षेत्र के कुछ लोगों को वहां पहाड़ी के बीच एक रहस्यमय गुफा मिली। उन्होंने गुफा के अंदर बनी विशेष आकृतियों को कैमरे में कैद कर जब अन्य लोगों को इस बारे में बताया तो वहां लोगों की भीड़ जुटने लगी।

 

त्यूणी निवासी गुगुमल राम, जोबन दास व प्रदीप बताते हैं कि सनेल बॉर्डर के पास मिली रहस्यमय गुफा दस से पंद्रह मीटर गहरी है। गुफा तक जाने के लिए कोई पैदल मार्ग नहीं है। वे स्वयं चट्टाननुमा खड़ी पहाड़ी पर चढ़कर जैसे-तैसे गुफा अंदर दाखिल हुए। गुफा के अंदर चारों तरफ देवी-देवताओं की आकृतियां मौजूद हैं।

 

इनमें शिवलिंग जैसी कई छोटी-बड़ी आकृतियां भी शामिल हैं। ये आकृतियां प्राचीन महत्व की प्रतीत होती हैं। बताया कि उन्होंने शिवलिंगनुमा इन आकृतियों की पूजा-अर्चना भी की। अब उन्होंने इस गुफा की प्राचीनता का पता लगाने के लिए एएसआइ की टीम वहां भेजने की सरकार से मांग की है।

 

बता दें कि बीते वर्ष जौनसार-बावर के गोरछा-बुल्हाड़ गांव के पास जंगल के बीच भी इसी तरह की एक रहस्यमय गुफा मिली थी। बाद में एएसआइ देहरादून स्थित क्षेत्रीय कार्यालय की अधीक्षण पुरातत्वविद लिली धस्माना के नेतृत्व में एक टीम ने भी गोरछा गांव पहुंचकर गुफा के बारे में जानकारी जुटाई। यहां से एकत्र कुछ अवशेष परीक्षण के लिए भी भेजे गए हैं। जिनकी जांच रिपोर्ट आनी बाकी है।

 

चकराता के उपजिलाधिकारी बृजेश कुमार तिवारी का कहना है कि मुझे सनेल के पास गुफा मिलने की सूचना है। यह पता लगाने के लिए कि गुफा उत्तराखंड की सीमा में है या हिमाचल की, प्रभारी तहसीलदार त्यूणी स्वराज तोमर के नेतृत्व में जल्द एक टीम वहां भेजी जाएगी। मानचित्र से मिलान के बाद यदि गुफा उत्तराखंड की सीमा में हुई तो इसकी प्राचीनता जानने के लिए एएसआइ को पत्र लिखा जाएगा।