udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news रहस्यमयी: निधिवन में आज भी हर रात रास रचाते हैं राधा-कृष्णा !

रहस्यमयी: निधिवन में आज भी हर रात रास रचाते हैं राधा-कृष्णा !

Spread the love

वृंदावन: रहस्यमयी: निधिवन में आज भी हर रात रास रचाते हैं राधा-कृष्णा ! आप मानो या ना मानो लेकिन यह सत्य है और इसकी सत्यता की खोज करनी है तो आप भी जाइए इस वन में लेकिन संभलकर. यहां खतरा भी है उस अदृश्य दैवीय शक्ति से जो दिखती नहीं है. क्योंकि आपके पग उनकी राशलीला में खलल पैदा कर सकते हैं।

चलिए आपको बताते है इसके बारे में विस्तार से। मान्यता है कि वृंदावन स्थित निधिवन जितना पवित्र है उतना ही रहस्यमयी है। माना जाता है कि इस वन में आज भी कान्हा एवं श्रीराधा अर्द्धरात्रि के बाद रास रचाते हैं। रास के बाद वन परिसर स्थित रंग महल में शयन करते हैं। इस महल में शयन के लिए पलंग लगाया जाता है।

सुबह बिस्तर के देखने से प्रतीत होता है कि यहां निश्चित ही किसी ने रात्रि में विश्राम किया है। कहा जाता है कि जिसने भी इस वन में लीला को देखने की कोशिश की वह अंधा, गूंगा, पागल या उन्मादी हो गया। इसी कारण सुबह खुलने वाले निधिवन को संध्या आरती के पश्चात बंद कर दिया जाता है। उसके बाद वहां कोई नहीं रहता है। यहां तक कि निधिवन में दिन में रहने वाले पशु-पक्षी भी संध्या होते ही निधि वन को छोड़कर चले जाते हैं।

निधि वन की एक अन्य खासियत हैं यहां के तुलसी के पेड़। इस वन में तुलसी का हर पेड़ जोड़े में है। मान्यता है कि जब राधा संग कान्हा वन में रास रचाते हैं तब यही जोड़ेदार पेड़ गोपियां बन जाती हैं। सुबह सब फिर तुलसी के पेड़ में बदल जाती हैं। इस वन के वृक्षों की खासियत है कि इनमें से किसी भी वृक्ष के तने सीधे नहीं हैं। इनकी डालियां नीचे की ओर झुकी तथा आपस में गुंथी हुई प्रतीत होती हैं।

निधि वन में स्थित रंगमहल में राधा और कृष्ण के लिए रखे गए चंदन के पलंग को शाम सात बजे के पहले सजा दिया जाता है। पलंग के पास में एक लोटा पानी, राधाजी के शृंगार का सामान और दातुन संग पान रख दिया जाता है। सुबह पांच बजे जब रंगमहल का पट खुलता है तो बिस्तर अस्त-व्यस्त, लोटे का पानी खाली, दातुन कुची हुई और पान खाया हुआ मिलता है।