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सावधानः नोटों से फैल रही हैं खतरनाक बीमारियां !

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संगठन ने विभिन्न अध्ययनों के निष्कर्ष का हवाला देते हुए दावा किया कि नोटों में बैक्टीरिया पाए गए हैं, जो बीमारियां फैलाते हैं

 

दिल्लीः सावधानः नोटों से फैल रही हैं खतरनाक बीमारियां !चौंक गए ना! क्योंकि बात ही ऐसी है तो कोई भी चौंक जाएगा.ध यह हम नहीं कह रहे हैं। इस बारे में  व्यापारियों के संगठन कैट ने नोटों से स्वास्थ्य संबंधी खतरा पैदा होने वाली खबरों का हवाला देते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली को रविवार को चिट्ठी लिखी और से इस संबंध में जांच करने का आग्रह किया है।

 

आपको बता दें कि कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन से भी मामले पर तुरंत संज्ञान लेने का आग्रह किया। संगठन ने विभिन्न अध्ययनों के निष्कर्ष का हवाला देते हुए दावा किया कि नोटों में बैक्टीरिया पाए गए हैं, जो बीमारियां फैलाते हैं .

 

इनसे पेट खराब होना, टी.बी और अल्सर जैसी अन्य बीमारियां का खतरा हो सकता है।स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री हर्षवर्धन को लिखी चिट्ठियों में सीएआईटी ने कई खोज और मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए उनसे इस मामले को जल्द से जल्द संज्ञान में लेने का आग्रह किया.

 

व्यापारी संगठन ने अलग-अलग खोजों से मिली जानकारियों का उदाहरण देते हुए रोगाणु से दूषित नोटों से संभावित कई बीमारियों जैसे मूत्र और श्वास नलिका के संक्रमण, सेप्टिसीमिया, त्वचा रोग, बार-बार होने वाली दिमागी बुखार, टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम और कई तरीकों के गैस्ट्रो-इंटेस्टिनल बीमारियों के फैलाने की क्षमता के बारे में चेतावनी दी.सीएआईटी के सचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि वैसे तो साइंस जर्नल इन चौंकाने वाली सच्चाइयों को लगभग हर साल ही छापते आ रहे हैं, लेकिन दुख की बात ये है कि इस पर कोई कदम नहीं उठाया गया.

 

उन्होंने कहा, ‘ट्रेडिंग समुदाय करेंसी नोटों का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है और अगर ये रिपोर्ट सही हैं, तो फिर वो नोट न केवल व्यापारियों बल्कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक हैं. सरकार के अलावा, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन को जांच के लिए आगे आना चाहिए कि आखिर ये नोट किस हद तक दूषित हैं.’कैट के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि हर साल इस तरह की रिपोर्ट विज्ञान पत्रिकाओं में प्रकाशित होती है, लेकिन दुख की बात स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता।

 

उन्होंने कहा की देश में व्यापारी वर्ग मुद्रा नोट का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करता है, क्योंकि अंतिम उपभोक्ता से उसका सीधा संपर्क होता है और यदि यह शोध रिपोर्ट सत्य हैं तो यह व्यापारियों के स्वास्थ्य के लिए घातक है। यही नहीं, यह उपभोक्ताओं को भी प्रभावित करेगा।